फेक न्यूज फैलाते हुए पकड़ा गया ‘द वायर’, भड़के आईआईटी मुंबई के छात्रों ने किया पलटवार

‘द वायर’ ओपिनियन वेबसाइट एक बार फिर फेक न्यूज फैलाने को लेकर चर्चा में है. दरअसल वेबसाइट ने आईआईटी मुंबई की प्रतिष्ठा और पीएम मोदी को लेकर फेक खबर पब्लिश की है . इस खबर के बाद वेबसाइट पर आईआईटी मुंबई के छात्रों ने जबरदस्त हमला बोल दिया है. भड़के छात्रों ने आईआईटी जैसे संस्थान को बदनाम करने के लिए वेबसाइट के संपादकों पर जमकर वार किया है. छात्रों ने द वायर की खबर को पूरी तरह से झूठा करार देते हुए संस्थान की छवि को धूमिल करने का आरोप लगाया है. आइए बताते हैं क्या है पूरा मामला.

क्या है मामला

प्रधानमंत्री मोदी ने 11 अगस्त को आईआईटी मुंबई के 56 वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया था. इस दौरान अपने 30 मिनट के संबोधन में उन्होंने इंडियन इस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलाजी, मुंबई की जमकर प्रशंसा करते हुए उसे आने वाली चुनौतियों से अवगत कराया. इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने ढांचागत विकास के लिए संस्थान को 1000 करोड़ रुपये की सहायता राशि भी देने की घोषणा की थी. प्रधानमंत्री मोदी ने संस्थान को मिले एमिनेंस के दर्जे को लेकर खुशी जाहिर करते हुए उसकी तारीफ भी की थी.

आईआईटी मुंबई के 56 वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते प्रधानमंत्री मोदी: (Image Source:Dainiktribune)

 

अक्सर प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करने वाली ओपिनियन वेबसाइट द वायर ने इसी बात को लेकर आईआईटी मुंबई को बदनाम करते हुए  अपनी मनगढ़ंत कहानी छापी थी. इसके पीछे उसका साफ मकसद था कि किसी बहाने से पीएम मोदी के साथ ही आईआईटी मुंबई को बदनाम किया जाए. द वायर ने अपनी इस ओछी हरकत में कुछ छात्रों के सहारे प्रधानमंत्री मोदी को भी नही छोड़ा और उन पर भी करारा आघात करने की कोशिश की है. हैरानी की बात तो ये द वायर ने उन छात्रों का कहीं जिक्र तक नही किया है और ‘अनाम’ छात्रों के सहारे इस खबर को पब्लिश कर दिया है.

द वायर के आरोप में क्या है, जानिए यहां

द वायर का कहना है कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने देश की शिक्षा व्यवस्था के लिए कुछ नही किया. द वायर ने अपनी ‘महाफेक’ कहानी में पीएम मोदी से देश में कथित रुप से बढ़ रहे अपराध पर भी सवाल उठाया है. वेबसाइट के जरिए मोदी विरोधियों ने पूछा है कि शिक्षा नीति सभी के लिए है या सदियों से चले आ रहे ब्राह्मण वादी वर्चस्व वाले सवर्णों और अमीरों के लिए ही है.

जहां देश में सबका साथ सबका विकास के सहारे मोदी सरकार सबको साथ लेकर चल रही है वहीं द वायर और उसके विचारकों के मन में बसी कुंठा ऐसे फेक खबरों के जरिए बाहर आ रही है. उन्हें लगता है कि देश में विकास सिर्फ सवर्णों का हो रहा है जो कि गलत है.

 

 

 

द वायर की मंशा और मोदी सरकार के प्रति कुंठा इसी बात से जाहिर हो जाती है कि वेबसाइट ने इस मनगढ़ंत खबर को पब्लिश तो कर दिया लेकिन इसमें कहीं भी किसी भी छात्र का नाम नही है जिसने मोदी सरकार पर ये आरोप लगाया हो.

छात्रों ने एक झटके में खोल दी द वायर की पोल

कहते हैं सत्य परेेशान हो सकता है पराजित नही ठीक उसी तरीके से द वायर जिन ‘अनाम’ छात्रों के सहारे इस फेक खबर को चला रहा था, उस खबर को उसी संस्थान के छात्रों ने गलत साबित कर दिया.  बता दें कि IIT मुबंई के छात्रों ने अपने नाम के साथ ये बताया है कि संस्थान के किसी छात्र की ऐसी कोई बात किसी वेबसाइट से हुई ही नही है.

आईआईटी के छात्रों ने वामपंथी-प्रोपेगंडावादी वेबसाइट के संपादकों पर करारा वार किया है

आईआईटी-मुंबई के छात्रों ने वेबसाइट द्वारा छापी गई इस खबर को पूरी तरह से झूठा करार दिया है. इतना ही नही छात्रों ने वेबसाइट पर आईआईटी जैसे संस्थान को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए द वायर को छद्मवादी और असत्यवादी बताया है. छात्रों का कहना है कि किसी संस्थान के दीक्षांत समारोह में देश के प्रधानमंत्री के पहुंचने से उस संस्था के अलावा छात्रों का भी मान बढ़ता है. ऐसे में कोई छात्र भला ऐसा क्यों बोलेगा.

ये हो सकती है द वायर की असली मंशा 

आईआईटी-मुंबई के छात्रों का कहना है कि संस्था के किसी भी छात्र ने ऐसा कोई बयान नही दिया है जैसा कि द वायर ने छापा है बल्कि कुछ वामपंथी संगठन ऐसे हैं जो हमेशा इस यूनिवर्सिटी में समस्या पैदा करने में लगे रहते हैं. द वायर भी उनमें से एक हो सकता है.

 

द वायर ने आईआईटी के कुछ अनाम छात्रों की आड़ में जिस तरह से अपनी रोटी सेेंकने की कोशिश की है वह घोर निंदनीय है. देश का कोई भी प्रबुद्ध वर्ग आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान और पीएम मोदी के खिलाफ इस तरह से फैलाये गए दुष्प्रचार से सहमत नही होगा. ‘द वायर’ द्वारा छापी गई न्यूज एक तरह से संकीर्ण मानसिकता का नतीजा है.

द वायर की हमेशा से ऐसी मानसिकता रही है कि जब भी एनडीए के नेतृत्व वाली केन्द्र की सरकार ने कुछ अच्छा काम किया है वह उसमें अड़ंगा डालने की जरुर कोशिश की है. इस बार भी उसने वही करने की कोशिश की है. हालांकि प्रधानमंत्री मोदी और आईआईटी मुबंई को बदनाम वाली उसकी फेक न्यूज पकड़ी गई.

आपसे एक सीधा सवाल

इस तरह की फेक न्यूज फैलाने वालों के खिलाफ आपकी क्या राय है?

 

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