भारत से रिश्ते खराब करके चीन ने कर लिया अपना नुकसान अब सोच रहा है .

भारत-चीन विवाद जानें क्या है मामला

पिछले एक महीने से डोका ला इलाके में भारत-चीन के बीच तनातनी जारी है. चीन समझौता करने को तैयार नहीं हो रहा है. फ़िलहाल में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिये जिनपिंग ने मना कर दिया है. सिक्किम की सीमा पर दोनों देशों की सेना बॉर्डर पर तैनात है. लेकिन चीन भारत से तनाव करके अपना कितना बड़ा नुकसान कर रहा है यह चीन सोच भी नहीं सकता. वो शायद यह भूल रहा है भारत से रिश्ते खराब करने पर आर्थिक रिश्तों पर इसका कितना प्रभाव पड़ेगा. सारा विवाद एक सड़क बनाने को लेकर है सिक्किम सीमा के डोका ला इलाके में चीन सड़क बनाना चाह रहा है. भारत ने जब इसका विरोध किया तो चीन भारत को गीदड़भरी धमकी दे रहा है.

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चीन को सता रहा अब डर

चीन भारत को लगातार डराने की कोशिश करने में लगा हुआ है. 1962 के समय के युद्ध की बात करता है चीन का कहना है कि भारत सीमा से अपनी सेना हटा ले नहीं तो अंजाम बेहद बुरे होंगे. लेकिन चीन यह भूल गया कि भारत में उसका बाजार में कितना बड़ा निवेश है. भारत से रिश्ते खराब करके चीन अपना बहुत बड़ा नुकसान कर सकता है. भारत के बड़े बाजार पर ध्यान लगाये बैठे चीन को भी अब व्यापार का डर सताने लग रहा है .

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भारत ने चीनी वस्तुओं का बहिष्कार किया तो

इस तरह की खबर की झलक चीन की मीडिया में देखने को मिल रही है. भारतीय बाजार में निवेश किये बैंठी चीनी कंपनियों को लगातार चेताया जा रहा है कि अगर सीमा पर बड़े तनाव को लेकर चीन समझौता नहीं करता है तो भारत में बिकने वाली चीनी वस्तुओं का बहिष्कार किया जायेगा. चीनी मीडिया ने अपने एक लेख में लिखा है कि भारत के लोग अपने देश को लेकर एकजुट हैं इस तरह से भारत में स्थित चीनी कंपनियों की मुश्किल बढ़ सकती है.

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2014 की तुलना में चीन का निवेश 6 गुना ज्यादा बड़ा

चीन का भारत से आपसी विश्वास बढ़ने के बाद 2014 की तुलना में चीन का भारत में 6 गुना ज्यादा निवेश बड़ा है. भारत के मुकाबले चीन का भारत में निवेश काफी ज्यादा है.चीन भारत में लगभग 7 अरब डॉलर का निवेश करता है वहीं भारत का चीन में मात्र 16 मिलियन डॉलर है. आपको बता दें कि जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जब भारत आये थे तो उस समय एशिया के दो महार्थियों के रिश्ते के बीच गर्माहट थी. उसके बाद से ही  चीन का भारत में निवेश तेज़ी से बड़ा है.

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भारत चीन विवाद पर विशेषज्ञों का मानना

बात अगर विदेशी निवेश की करते हैं तो चीन ने 2014 में एक मिलियन डॉलर से निवेश किया था वही 2015 में चीन का व्यापर काफी बढ़ा तो निवेश बढ़ कर 6 गुना ज्यादा होकर 6 मिलियन डॉलर हो गयी थी. भारत में चीन का पसंदीदा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर है जिसे चीन खोना नहीं चाहता क्यों कि इस वजह से चीन की आर्थिक स्थिति काफी बिगड़ सकती है. हाल में अमेरिका और चीन के फर्स्टनीति के चलते रिश्तों में खटास आयी है. चीन को भी एक मजबूत बजार की जरुरत है तो यह बात चीन भी जानता है कि उसे भारत से बेहतर बाजार नहीं मिलेगा. विशेषज्ञों का मानना है की अगर भारत-चीन में इस तरह तनाव चलता रहेगा तो इसके लिये दोनों देशों के आर्थिक स्थिति में दरार आएगी जिससे चीन को भारी नुकसान होगा और पश्चिमी देशों को इसका फायदा मिलेगा.

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