CAG के अनुसार अगर चीन से जंग हुई तो भारत के पास 10 दिन लड़ाई लड़ने लायक भी…

भारत चीन विवाद

भारत और चीन के बीच चल रहे टकराव को लेकर आये दिन चीन धमकी दे रहा है. दोनों देशों कि सेना डोकलाम इलाके पर तैनात हैं. चीनी मीडिया आये दिन भारत के खिलाफ जहर उगल रही है. चीनी मीडिया ने कहा कि चीन को भारत के साथ गतिरोध करने के लिए तैयार रहना चाहिए. इसी के साथ चीनी मीडिया भारत को लगातार धमकी दे कह रहा है कि इसी तरह तनाव रहता है तो भारत और चीन के बीच अन्य सीमाओं पर भी संघर्ष छिड सकता है. चीन कह रहा है, भारत डोकलाम को लेकर सपना देखना छोड़ दे यह सिर्फ भारत का सपना है. चीन के अख़बार ने “ग्लोबल टाइम्स ” ने कहा है कि चीन डोकलाम इलाके से सेना हटाने को कभी तैयार नहीं होगी.    modi

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CAG  रिपोर्ट सौंपी कहा अगर जंग हुई तो भारत के पास 10 दिन लायक भी गोला बारूद नहीं.

भारत और चीन के बीच चल रहे तनाव को देखते हुए सरकारी खातों को ऑडिट करने वाली संस्था CAG ने सेना के पास मौजूद गोला बारूद को लेकर विश्लेषण किया है. CAG ने सेना के पास गोला-बारूद की कमी को लेकर अंदेशा जताया है. CAG ने गोला बारूद की कमी को लेकर संसद में रिपोर्ट सौंप दी है. रिपोर्ट के मुताबिक CAG ने कहा है कि अगर भारत की जंग हुई तो भारत के पास 10 दिन लड़ाई लायक भी गोला बारूद नहीं है.

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गौरतलब है कि रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास इतना भी गोला बारूद नहीं है जो 10 दिन तक दुश्मनों का सामना कर सके. एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार CAG ने भारतीय नौसेना को आड़े लेते हुए कहा कि चार पनडुब्बी रोधी वाहक युद्धक पोत के निर्माण में भी असाधारण विलंब बताया है.

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21 जुलाई को संसद में सौंपी रिपोर्ट के अनुसार CAG ने बताया है कि आर्मी हेडक्वार्टर ने 2009 से 2013 के बीच खरीदारी के लिए जिन मामलों की शुरुआत की थी.उनमें अधिकतर मामले जनवरी 2017 तक पेंडिंग में ही पड़े हुए थे. सन 2013 में गोला बारूद सप्लाई करने वाली कम्पनी ऑर्डिनेंस को गोला बारूद की कमी की गुणवत्ता को लेकर ध्यान दिलाया था. उसके बाद भी इस मामले में किसी तरह की प्रगति न हुई. जरुरत के हिसाब से कमी कायम रही है. खराब व रिजेक्ट पड़े गोला बारूद हटाने व रिपेयर करने में भी कोई खास काम नहीं किया जा रहा है.

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रिपोर्ट के अनुसार गोला बारूद की कमी 

रिपोर्ट के अनुसार गोला बारूद मैनेजमेंट को ऑडिट किया गया था जिसमे बताया गया है कि सेना ऑपरेशन अवधि की जरुरत के अनुसार वॉर वेस्टेज को रिजर्व रखा जाता है.रक्षा मंत्रालय ने रिज़र्व वॉर वेस्टेज को  40 दिन की अवधि को मंजूरी दी थी. सन 1999 में आर्मी ने फिर तय किया था कि रिज़र्व वॉर वेस्टेज को कम से कम 20 दिन की अवधि के साथ रिजर्व होना ही चाहिए. जब जाँच की गयी तो पाया गया कि सिर्फ 20 प्रतिशत गोला बारूद ही 40 दिन के मानक के हिसाब से खरे उतर पाये, बल्कि 55 प्रतिशत गोला बारूद 20 दिन के स्तर से भी कम थे. इस तरह हालत बेहद चिंताजनक हैं.

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सन् 2008-2013 के बीच 9 सामग्रियों की खरीदारी के लिए पहचान की गयी थी. रिपोर्ट के अनुसार जब देखा गया तो 2014-2016 के बीच इनमें से केवल 5 सामग्रियों पर ही कम हो सका. कमी को देखते हुए सेना मुख्यालय ने उप प्रमुख के वित्तीय अधिकार बढ़ा दिए हैं.भारत को ज्यादातर आपूर्ति ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड की ओर से की जाती है, लेकिन उत्पादन का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता है !

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