ब्रिटिश संसद ने भारत की आज़ादी का दिन 30 जून 1948 तय किया था लेकिन इन वजहों से 1947 में ही आज़ाद हो गया भारत

भारत को आज़ाद हुए 7 दशक हो गए हैं. भारत ने इन सत्तर सालों में बहुत प्रगति की है और अब भारत दुनिया में एक ताकतवर देश के रूप में जाना जाता है. हमारे देश को आज़ाद कराने के लिए कई लोगों ने हँसते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी और देश को आगे बढाने के लिए भी कई लोगों ने अपना योगदान दिया है. अंग्रेजों की गुलामी से आज़ाद होने में हमें 200 साल लगे लेकिन जब अंग्रेजों ने भारत को आज़ाद किया तो बहुत हड़बड़ी दिखाई.

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आज़ादी के बाद स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने कांग्रेस के 1929 में हुए लाहौर अधिवेशन में पहली बार ‘पूर्ण स्वराज’ का नारा दिया था और अपनी पार्टी का लक्ष्य भी पूर्ण स्वराज बताया था. 26 जनवरी को ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से आजादी के दिन के रूप में चुना गया था.

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जब भारत आज़ाद हो गया तो इस दिन को ऐतिहासिक महत्व का दिन बताते हुए इसे गणतंत्र दिवस घोषित किया गया. 1950 की जनवरी में आज़ाद भारत का संविधान लागू हुआ और भारत एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में दुनिया में जाना जाने लगा. तो ऐसे में सवाल ये उठता है कि 15 अगस्त के दिन ही भारत आज़ाद क्यों हुआ?

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जब भारत को आज़ादी दी गई थी उस समय भारत के वायसराय लुईस माउंटबेटन थे. उनको ब्रिटिश संसद ने 30 जून 1948 तक सत्ता-हस्तांतरण का ज़िम्मा सौंपा था. उस समय सी गोपालचारी ने कहा था कि अगर माउंटबेटन ने 30 जून 1948 तक इंतजार किया होता तो उनके पास हस्तांतरित करने के लिए कोई सत्ता नहीं बचती. उनका कहने का तात्पर्य था की भारतीय 1948 से पहले ही अंग्रेजों से सत्ता छीन लेते.

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इसी वजह से माउंटबेटन ने अगस्त 1947 में ही ये दायित्व पूरा कर दिया. माउंटबेटन ने ये दावा भी किया था कि सत्ता-हस्तांतरण पहले करने से खून-खराबा रोका जा सकता है. हालांकि माउंटबेटन पूरी तरह से गलत साबित हुए. बाद में माउंटबेटन ने यह कहकर अपना बचाव किया कि “जहां भी औपनिवेशिक शासन खत्म हुआ है, वहीं खून-खराबा हुआ है. ये इसकी कीमत है जो आपको चुकानी पड़ती है.”

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माउंटबेटन ने भारत से सूचनाएं भेजीं. ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमंस में इंडियन इंडिपेंडेंस बिल चार जुलाई 1947 को पेश किया गया. भारत को एक स्वतंत्र मुल्क बनाने के लिए पेश किया गया ये बिल जल्द ही पारित भी हो गया. इस विधेयक में ये माना गया कि 15 अगस्त 1947 को भारत में ब्रिटिश राज समाप्त हो जाएगा.

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ब्रिटिश हुकूमत ने भारत की 500 से ज्यादा रियासतों का भारत और पाकिस्तान के हाथ में छोड़ दिया था. इन रियासतों को भारत और पाकिस्तान में से किसी एक में शामिल होना था. कई रियासतें 15 अगस्त 1947 से पहले ही भारत या पाकिस्तान का हिस्सा बन गई थीं लेकिन कुछ रियासतें आजादी के बाद तक दोनों में से किसी देश में नहीं शामिल हुई थीं. जूनागढ़ जम्मू-कश्मीर, जोधपुर, हैदराबाद और त्रावणकोर की रिसायतें आजादी के बाद देश का हिस्सा बनीं.

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