पाकिस्तान में एक नाई की दुकान से भारत के रॉ को मिल गई थी महत्वपूर्ण जानकारी लेकिन मोरारजी देसाई ने फोन करके..

बात शुरू करते हैं पाकिस्तान में स्थित एक नाई की दुकान से. इस नाई की दुकान में बाल कटवाने आए पाकिस्तानी वैज्ञानिकों पर भारत के रॉ एजेंट की नज़र थी. जब वैज्ञानिक बाल कटवा के चले गए तो भारतीय एजेंट ने कुछ बाल चुराकर इनकी जांच की और जांच से पता चल गया कि पाकिस्तान परमाणु बम बनाने की तैयारी कर रहा है. इससे पहले भारत की रॉ को अफवाहों के रूप में खबरें मिल रही थीं, लेकिन बालों के सैम्पल में युरेनियम की मात्रा से पाकिस्तान की हक़ीकत सामने आ गई. इजराइल को पता चला तो उसने पाकिस्तान के परमाणु संयंत्र को उड़ाने का पूरा मन बना लिया.

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भारत के पास पूरा मौक़ा था कि वो पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम पर पानी फेर सके और भारत का साथ देने के लिए इजराइल भी आगे आ गया था, लेकिन ऐसा क्या हुआ जो जानकारी होने के बावजूद भी भारत ने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को रोका नहीं ?

भारत के परमाणु कार्यक्रम के बाद पाकिस्तान में मची थी खलबली

अब हम आपको ले जाते हैं 70 के दशक में. 1971 में भारत-पाक युद्ध के तीन साल बाद 18 मई 1974 को भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण कर दुनिया को अपनी ताकत का एहसास करा दिया. भारत के परमाणु कार्यक्रम के बाद पाकिस्तान छटपटाने लगा. इसके बाद पाकिस्तान ने भी परमाणु बम बनाने का प्रयास शुरू कर दिया. भारत को पता था कि पाकिस्तान परमाणु बम बनाने का प्रयास करेगा इसलिए पाकिस्तान की हरकतों पर नज़र रखने के लिए भारत ने रॉ को ज़िम्मेदारी सौंपी.

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रॉ ने खोल दी पाकिस्तान की पोल 

पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में किसी को पता नहीं था. यहाँ तक कि भारत और इजराइल की ख़ुफ़िया एजेंसियां भी इस बारे में कुछ नहीं जानती थीं. इजराइल की ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंतित थी इसलिए इजराइल की मोसाद भारत के रॉ के साथ मिलकर काम कर रही थी. फ्रांस भी इस बात को लेकर चिंतित था हालांकि पहले उसने पाकिस्तान की मदद की थी, लेकिन अमेरिका के दबाव के बाद फ्रांस ने भी पाकिस्तान की मदद करना बंद कर दिया. पाकिस्तान का पूरा ध्यान कहूता में परमाणु संयंत्र विकसित करने में था.

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70 के दशक में ही भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ ने पाकिस्तान में अच्छा-ख़ासा नेटवर्क स्थापित कर लिया था, इसी वजह से अफवाहों के तौर पर ही सही लेकिन कहूता परमाणु संयंत्र की जानकारी मिल गई थी. अब समस्या ये थी कि इस अफ़वाह की पुष्टि किस प्रकार की जाए. परमाणु संयंत्र की जासूसी करने में बहुत समय लग सकता था. पाकिस्तान ने इस जानकारी को बहुत गुप्त रखा था इतना कि इसके बारे में अफ़वाहों के जरिये ही पता लग पाया था. कहा जाता है कि इस संयंत्र की निगरानी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से भी ज्यादा अच्छी तरह से की जाती थी. फिर रॉ ने सबको चौंका देने वाले एक मिशन में पाकिस्तान के वैज्ञानिकों के बालों को चुराकर और उनका परीक्षण कर के पता लगा लिया कि अफ़वाहें केवल अफ़वाहें नहीं ये सत्य है कि पाक परमाणु बम बनाने की तैयारी कर रहा है. भारत जान चुका था कि कहूता संयत्र परमाणु हथियार बनाने के लिए प्यूटोनियम संशोधन संयत्र था. भारत ने सिद्ध कर दिया था कि पाकिस्तान परमाणु बम बना रहा है.

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इजराइल ने पाकिस्तान के परमाणु संयंत्र को उड़ाने का बनाया प्लान लेकिन मोरारजी देसाई ने डाल दिया अड़ंगा

ये बात जब इजराइल को पता चली तो उसने पूरा मन बना लिया था कि वो पाकिस्तान का परमाणु संयंत्र बम से उड़ा देगा. इजराइल ने भारत से कहा कि वो उसके हवाई ज़हाज को भारत में उतरने दें और फ्यूल भरने दें जिसके बाद इजराइली ज़हाज पाकिस्तान को रवाना होंगे लेकिन भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने मना कर दिया और इसी के साथ एक बहुत बड़ी चूक भी उनसे हो गई. मोरारजी देसाई ने तत्कालीन पाकिस्तानी जनरल जियाउल हक़ से बात करते-करते एक ख़ुफ़िया जानकारी भी उन्हें दे दी. फोन पर बात करते हुए मोरारजी देसाई ने बता दिया कि रॉ को कहूता में पाकिस्तान के ख़ुफ़िया अभियान की जानकारी है. जिसके बाद पाकिस्तान ने इजराइल की बमबारी से बचने के लिए अमेरिका से गुजारिश की. इसके बाद रॉ और मोसाद का प्लान पूरा नहीं हो पाया.

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मोरारजी देसाई नहीं बताते तो नहीं मरता रॉ एजेंट 

पाक लेखक ग्रुप कैप्टेन एसएम हाली द्वारा ‘पाकिस्तान डिफ़ेंस जर्नल’ में लिखा गया है कि पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का ब्लू प्रिंट एक रॉ एजेंट के हाथ लग चुका था, और उसने मोरारजी देसाई से 10 हज़ार डॉलर में इसे भारत को बेचने का प्रस्ताव रखा था लेकिन मोरारजी देसाई ने मना कर दिया और उसके बाद पाकिस्तान को भी ये जानकारी दे दी. जिसके बाद रॉ का एजेंट पकड़ा गया और मारा गया. इसके बाद पाकिस्तान में कई रॉ एजेंट पकड़े गए और मारे गए.

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