आर्मी चीफ़ बिपिन रावत ने चीन को लेकर दिया ऐसा बयान कि दादागिरी करने वाले चीन के मुंह से निकल पड़े ऐसे बोल.

चीन आए दिन भारत से उलझने की कोशिश करता है. कभी वो अरुणांचल प्रदेश के इलाकों का खुद नामकरण कर देता है तो कभी उसके सैनिक भारत की सीमा में आकर अतिक्रमण करने की कोशिश करते हैं. हालही में भारत के चुंबी घाटी इलाके में भी चीन ने ऐसी ही हरकत की उसके जावानों ने भारत की सीमा पर सड़क बनाने की कोशिश की जिन्हें भारत के सैनिकों ने रोक लिया जिसके बाद ये मामला गरमा गया.

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चीन की हरकत के बाद भारत के थलसेना प्रमुख ने एक बयान जारी किया जिसमें उन्होंने भारत से उलझने वाले देशों से कहा कि भारत की सेना ढाई मोर्चे पर युद्ध के लिए तैयार है. थलसेना प्रमुख के इस बयान के बाद चीन बौखला गया और उसकी तरफ से जारी किये गए बयान में कहा गया कि भारतीय थलसेना अध्यक्ष द्वारा दिया गया बयान गैर-ज़िम्मेदाराना है. साथ ही चीन ने ये भी कहा बिपिन रावत युद्ध का शौर मचाना बंद करें.

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थलसेना अध्यक्ष विपिन रावत ने अपने बयान में साफ़ तौर पर कहा था कि चीन और पाकिस्तान के साथ अंदरूनी खतरों से निपटने के लिए भारत पूरी तरह से तैयार है. जिसके बाद चीनी सेना के प्रवक्ता कर्नल वू क्यियान ने प्रतिक्रिया दी थी.

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चीन ने भारत को 1962 के युद्ध की याद भी दिलाई लेकिन चीन भूल गया कि अब वो दौर नहीं है. उस समय भारत इतना शक्तिशाली देश नहीं था जितना कि अब और अगर युद्ध होता भी है तो इसमें नुक्सान उसी का होगा चूँकि भारत एक विकासशील राष्ट्र है और चीन विकसित राष्ट्रों की सूचि में जगह बना चूका है, लेकिन अगर वो भारत से युद्ध करता है तो वो सब कुछ गंवा बैठेगा. इसलिए ये सोचना कि चीन, भारत से लड़ेगा गलत है. चीन एक स्वार्थी देश है और वो भारत से युद्ध करके अपना नुक्सान नहीं करवाएगा इसीलिए आए दिन वो भारत से जुबानी जंग करता रहता है.

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