नीच पाकिस्तान ने 12 साल पहले बना ली थी कारगिल युद्ध की रणनीति लेकिन युद्ध में भारत के इस एक कदम से डरकर भाग गया था पाक..

भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध को अब 18 साल हो चुके हैं और अब  भी भारत और पाकिस्तान के बीच तनातनी ज़ारी है. जब कारगिल युद्ध हुआ तो तो एक समय ऐसा आ गया था कि मानों दोनों ही देश तबाह हो जाएंगे लेकिन फिर भारत ने बड़े ही बेहतरीन तरीके से पाकिस्तान को धूल चटाई और अपने विजय का परचम लहराया. इस युद्ध में ना जाने कितने भारतीय भारत मां के लिए लड़ते-लड़ते शहीद हो गये और बदले में इतिहास के रूप में एक एतिहासिक जीत दे गये.

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जानिये कैसे शुरू हुआ था युद्ध..

आपको बता दें 8 मई का वो दिन था जब पहली बार भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सैनिकों को कश्मीरी आतंकियों के साथ कारगिल में देखा था. तभी अंदेशा हो गया था कि युद्ध होने वाला है.  शुरुआत में भारत की सेना को लगा कि शायद यह लोग गलती से आयें हैं और भटक गये हैं लेकिन कुछ ही देर में  स्थिति  साफ़ हो गयी.  कहा यह भी जाता है कि 3 मई को एक बकरी चराने वाले ने भारत को यह जानकारी दी थी कि उसने पाकिस्तानियों को कारगिल की पहाड़ी पर देखा है, तभी से भारतीय सेना चौकन्नी हो गयी थी.

 

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जब पाक ने फेंका पहला गोला..

जैसे ही पाकिस्तान ने भारत की ओर पहला गोला फेंका निशाना सीधा हमारे बन्दूक और बारूद के स्टॉक पर लगा और लगभग सभी समान बर्बाद हो गया था. इसके तुरंत बाद हाई अलर्ट की घोषणा की गयी और भारतीय सेना की एक टुकड़ी को कश्मीर के रास्ते कारगिल भेजा गया.

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भारतीय वायु सेना ने संभाला मोर्चा..

9 मई को भारतीय वायु सेना ने उड़ान भरते हुए पाकिस्तानी फौजियों को जवाब देना शुरू ही किया था कि भारत के 2 प्लेन और एक हेलीकाप्टर गिरा दिए गय, स्तिथि नाज़ुक होती जा रही थी और पाक लगातार कारगिल के अंदर घुस रहा था.

 

 

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अब भारत की बारी आ गयी थी..

अब जवाब देने की बारी भारत कि थी, 9 जून को भारतीय सेना ने पाकिस्तान को जवाब देना शुरू कर दिया और पाक की कई  चौकियों को उखाड़ फेंका. इस युद्ध में भारत आगे बढ़ने लगा था और पाक को अब डर सताने लगा था. इसी बीच भारत ने पाक के जनरल परवेज मुशर्रफ की एक रिकॉर्डिंग जारी की जिसमें वो चीन से युद्ध की बात कर रहे थे.

 

12 साल पुरानी घटना की वजह से हुआ था युद्ध ?

सन 1984 में भारत के ऑपरेशन मेघदूत के ज़रिये भारत ने सियाचीन पर कब्ज़ा जमा लिया था और उस समय पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल जिया उल हक थे. इस बात से वो बौखलाए हुए थे. इस ऑपरेशन के 3 साल  बाद 1987 में पाक सेना के एक सीनियर ऑफिसर ने जिया के सामने एक ऐसा प्लान रखा जिससे युद्ध की बात सामने आई,  प्लान के मुताबिक” कारगिल की पहाड़ियों से नेशनल हाईवे दिखता है और यह लेह-लद्दाख को जोड़ता है. इससे होकर सियाचिन की सप्लाई लाइन जाती है”

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बेनजीर भुट्टो के सामने रखा गया प्रस्ताव..

उन दिनों पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में एक मोर्चा छेड़ा हुआ था और पाक भारत से ऐसे में युद्ध करने लायक नहीं था.  इसके बाद जिया की सरकार चली गयी और बेनजीर भुट्टो की सरकार आई उसके सामने फिर एक बार कारगिल युद्ध का प्रस्ताव रखा गया लेकिन उन्होंने कहा कि कहीं हमारे हाथ से कश्मीर भी ना चला जाए और युद्ध के लिए मना कर दिया.  उस समय परवेज़ मुशर्रफ डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स थे.

 

 

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 फिर भी हुआ युद्ध और युद्ध से कुछ हफ्ते पहले..

युद्ध से कुछ हफ्ते पहले परवेज़ मुशर्रफ ने भारतीय सीमा के 11 किलोमीटर अंदर तक अपना हेलीकाप्टर उड़ाया था और वहीं एक स्थान पर रात भी बिताई थी. 80 ब्रिगेड के तत्कालीन कमांडर ब्रिगेडियर मसूद असलम  भी उनके साथ मौजूद थे. साल 2010 में पाक ने खुद ये बात कबूली थी और यह भी बताया था कि कारगिल युद्ध में उनके 400 से ज्यादा जवान मारे गये थे.

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जब लड़ाई अपने चरम पर थी तो..

जब युद्ध चरम पर था तो बिल क्लिंटन जो उस समय अमेरिका के प्रेसिडेंट थे नवाज़ शरीफ को कॉल किया था और उनसे कारगिल से अपनी सेना हटाने के लिए कहा था लेकिन नवाज़ नहीं माने और युद्ध ज़ारी रखा.  अब भारत ने पाक पर तीन तरफ़ा हमला शुरू कर दिया और देखते ही देखते टाइगर हिल पर कब्ज़ा जमा लिया.

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बाल-बाल बचे नवाज़ शरीफ और परवेज़ मुशर्रफ..

परवेज़ मुशर्रफ और नवाज़ शरीफ एक साथ एक ही कैंप में मौजूद थे और भारतीय एयर फाॅर्स ने उस कैंप को निशाना बना लिया लेकिन निशाना थोडा चूक गया और दोनों बच गये, यहीं से पाक को हार का डर साफ दिखने लगा और तुरंत नवाज़ शरीफ ने अमेरिका फ़ोन करते हुए कहा कि हम अपनी सेना पीछे हटा रहे हैं. बाद में पता चला कि भारत ने जब गुलटेरी को निशाना बनाया तो यह खबर नहीं थी कि परवेज और नवाज़ दोनों यहाँ मौजूद हैं. इसके बाद 26 जुलाई को पाक सेना को भारतीय सेना ने पहाड़ी से खदेड़ दिया और वापिस अपना कब्ज़ा जमा लिया.

अटल जी ने किये जीत का एलान…

अटल जी ने तुरंत युद्ध में विजय का एलान किया और 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस बनाने का फैसला किया गया l

 

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