JNU के इस छात्र को मेट्रो स्टेशन पर सुरक्षाकर्मियों से बहस करना पड़ा भारी, लगी ऐसी क्लास कि JNU की सारी फीलिंग ख़त्म हो गयी

JNU देश का एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान है लेकिन यहाँ के कुछ छात्र देशविरोधी ताकतों का समर्थन करके और आतंकियों की बरसी मानकर इसका नाम ख़राब करने की कोशिश कर चुके हैं. कन्हैया कुमार और उमर खालिद जैसे लोग कहने को तो छात्र हैं इस यूनिवर्सिटी के लेकिन जिस संदर्भ में इनका नाम सामने आया है वो बेहद ही शर्मनाक है. आज देश का हर नागरिक JNU के ऐसे छात्रों की करतूत समझ गया है और इसलिए इन्हें लेकर लोगों की सोच भी बदल गयी है. कन्हैया कुमार को लेकर जो मामला सामने आया, उसकी पूरे देश में निंदा हुई लेकिन अब एक और मामला JNU से सामने आ रहा है जो सुरक्षाकर्मियों से भिड़ने को लेकर है.

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दरअसल दिल्ली मेट्रो में JNU के एक छात्र की ऐसी घटना सामने आई है जो बेहद ही शर्मसार करने वाली है. दरअसल खुद को एक अलग विचारधारा का मानकर JNU के कुछ छात्र हमेशा अलग दिखने की कोशिश में रहते हैं लेकिन उनकी यही कोशिश उन्हें तब भारी पड़ गयी जब दिल्ली मेट्रो के राजीव चौक स्टेशन पर सुरक्षा जाँच में बाधा पहुँचाने की कोशिश की गयी.

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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे 22 साल के अमन सिन्हा को CISF के कांस्टेबल शोएब और पीसी भट्ट से उलझना उस वक्त भरी पड़ गया जब वो सुरक्षा जांच में अलग विचारधारा से जुड़कर, अलग बनने की कोशिश कर रहे थे. दरअसल अमन जब राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पहुंचा तो सुरक्षाकर्मियों ने उसे हेडफोन कान से निकालने और सुरक्षा में सहयोग करने के लिए कहा लेकिन ‘यो यो टाइप’ के गाने सुनने वाला अमन उनके इस निवेदन से नाराज हो गया और बहस करने लगा. इस दौरान उसने बहस ही नही बल्कि सुरक्षाकर्मियों से बदतमीजी भी की और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया.

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पीछे लाइन बढ़ती जा रही थी और अमन अपना JNU वाला रौब दिखाता जा रहा था, उसे ये अहसास हो गया था कि JNU के छात्रों की सोच अलग होती है और सुरक्षाकर्मियों को भी मात दे सकता है. बस फिर क्या था सुरक्षाकर्मियों ने जब देखा कि अमन सिन्हा उनका और लोगों का समय बर्बाद कर रहा है तो वो उसे लाइन से हटने को कहकर अपने कार्यालय तक ले गये.

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CISF के वरिष्ठ कर्मी ने बताया…

आपको बता दें कि मेट्रो स्टेशन्स पर सुरक्षा के लिहाज से सभी को सहयोग देना पड़ता है और देना भी चाहिए लेकिन अमन JNU का था इसलिए उसे ये गंवारा न हुआ और वो CISF के जवानों से भिड़ गया. दोनों पक्षों में खूब बहस हुई. जवानों ने सुरक्षा का हवाला दिया तो अमन सिन्हा ने JNU से मिले ज्ञान को ढाल बनाकर उनसे बहस करता रहा. जहाँ तक खबर है कि सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़कर मेट्रो स्टेशन में ही थोड़ी दूर पर स्थित अपने कार्यालय में ले गये.CISF के एक वरिष्ठ कर्मी ने बताया कि कांस्टेबल शोएब और पीसी भट्ट के साथ की गयी बेइज्जती को लेकर माफीनामा लिखवाकर अमन को छोड़ दिया गया.

अमन सिन्हा JNU

..लेकिन अमन का कहना कुछ और है

इस पूरे मामले में अमन का कहना कुछ अलग है, अमन के अनुसार “मैंने हेडफोन निकालने पर एतराज जताया तो लेकिन सुरक्षाकर्मी बहस करने लगे तो मैंने भी बहस शुरू कर दी लेकिन तभी एक सुरक्षाकर्मी और आ गया जिसने मुझसे कहा कि ‘तुम जैसे लोग देश का नाम ख़राब कर रहे हो.’ एक निजी चैनल की खबर के मुताबिक बहस करने से हो रही सुरक्षा जाँच में दिक्कतों के बाद अमन को पीटा भी गया और उसे अपमानजनक शब्द भी कहे गये. ये टीवी चैनल कोई और नही बल्कि NDTV है.

CCTV की फुटेज देखकर CISF के एक अधिकारी ने कहा कि ये घटना महज 30 मिनट में ही ख़त्म हो गयी थी लेकिन इसे तूल दिया जा रहा है जबकि इसमें मारपीट का कोई मामला ही नही है, बदतमीजी करने पर बस उससे माफीनामा लिखवाया गया था. आप खुद सोचिये कि ‘क्या JNU में पढ़ने का मतलब ये होता है कि आपको सुरक्षा जाँच में भी छूट मिलेगी ?’ वैसे देश के लोगों के टैक्स से इनकी आरामदायक पढ़ाई के लिए पैसे जाते हैं, तो क्या ये सुरक्षा के नाम पर बदतमीजी करेंगे, जबकि वैसे भी देशविरोधी काम करके शिक्षा के मंदिर को बदनाम कर चुके हैं.

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