जेडीएस-कांग्रेस के बीच मचा एक और बवाल ! इस बार सिद्धारमैया ने चिट्ठी लिखकर कुमारस्वामी को..

कर्नाटक में जनमत के खिलाफ जेडीएस और कांग्रेस ने मिलकर सरकार बना तो ली लेकिन दोनों पार्टियों में वर्चस्व की लड़ाई आये दिन देखने को मिलती रहती है. जनमत के खिलाफ इसलिए भी कह रह हैं क्योंकि जनता ने पूर्ववर्ती कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार को पूरी तरीके से ख़ारिज कर दिया था और भाजपा को सबसे ज्यादा सीटें दी थीं. इसके बावजूद कांग्रेस भाजपा विरोध में जेडीएस को समर्थन देकर सरकार हिस्सा बन गयी. फ़िलहाल सरकार तो बना ली लेकिन अब जो हालात हैं वो बद से बदतर हैं.

मोदी शाह की जोड़ी की नीतियों के बदौलत आज बीजेपी देश की सबसे बड़ी पार्टी बनी है (फोटो सोर्स: Hindustan Times)

सिद्धारमैया मुख्यमंत्री नहीं बन पाए लेकिन चिट्ठियां लिख-लिखकर..

बेहद दिलचस्प ये है कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया इस सरकार के बनने के बाद से अक्सर मुख्यमंत्री कुमारस्वामी को पत्र लिखते रहते हैं. लेटर के माध्यम से सिद्धारमैया अपनी मांगों को रखते रहते हैं. जिसकी वजह से कुमारस्वामी की नींद उड़ी हुई है. पत्रों में मांगों को देखकर कुमारस्वामी बेचैन हैं और वो गठबंधन के चलते कोई ठोस कदम उठा पाने में विफल हैं.

सिद्धारमैया की चिट्ठियों ने कुमारस्वामी का चैन छीन लिया है (फोटो सोर्स: रिपब्लिक)

क्या है इस बार की चिट्ठी में ?

रिपब्लिक चैनल की मानें तो सिद्धारमैया अबतक कुमारस्वामी और उनके मंत्रियों को करीब दर्जनभर चिट्ठियां भेज चुके हैं. इन चिट्ठियों में ज्यादातर उन्होंने अपने चुनावी क्षेत्र बादामी को लेकर मांग रखी है. अभी जल्द में ही 31 जुलाई को सिद्धारमैया ने कुमारस्वामी को एक और पत्र लिखा जिसमें उन्होंने मैसूर से फिल्म सिटी का निर्माण रामनगर होने के प्रस्ताव का विरोध किया है और कहा है कि, “मेरा आपसे अनुरोध है कि इस फिल्म सिटी को रामनगर में स्थानांतरित ना करके मैसूर में ही बनाया जाय.”

बता दें कि कुमारस्वामी कैबिनेट इस फिल्म सिटी को मैसूर की जगह रामनगर में बनवाने की सोच रही है, जिसका पत्र के जरिये सिद्धारमैया ने विरोध दर्ज करवाया है.

कुमारस्वामी को चिट्ठियां भेजने का असली मकसद तो अपना दबदबा दिखाने का है (फोटो सोर्स: न्यूज़ X)

लेटर पॉलिटिक्स की असली वजह तो ये है…!

कहा तो ये भी जा रहा है कि इन चिट्ठियों के जरिये वो कर्नाटक सरकार में अपना दबदबा बनाने की कोशिश करते रहते हैं. वो कुमारस्वामी को जताने की कोशिश में लगे रहते हैं कि मुख्यमंत्री भले ही कुमारस्वामी हों लेकिन राज्य में उनकी ही चलेगी. इस बात को इससे भी समझा जा सकता है कि, “कुछ दिन पहले कुमारस्वामी ने एक कार्यक्रम के दौरान भावुक होते हुए कह दिया था कि, ‘इस गठबंधन का विषपान कर रहा हूँ.’ इस बात से उनका निशाना कांग्रेस ने नेताओं की तरफ था जो राज्य में अपनी मनमर्जी चलाने की कोशिश कर रहे हैं.”

अब देखना ये है कि इस विष को पीते हुए कुमारस्वामी आखिर कितने दिनों तक मुख्यमंत्री बने रहते हैं और ये गठबंधन की सरकार कर्नाटक में कितने दिनों तक चलती है.

आपके लिए एक सवाल:

क्या जेडीएस को कांग्रेस का साथ छोड़ देना चाहिए ?

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