विपक्ष ने पूछा था पीएम मोदी इजराइल जाकर भी फिलिस्तीन क्यों नहीं गये ? एक लीक्ड ऑडियो से मिला इसका जवाब.

नेतन्याहू ने भारत के प्रधानमंत्री मोदी का जिस तरह से स्वागत किया था उससे सारी दुनिया को साफ़ सन्देश चला गया था कि इजराइल भारत को अपना अच्छा दोस्त मानता है. इजराइल में भारत के प्रधानमंत्री का जिस तरह से स्वागत हुआ वैसा किसी और देश के प्रधानमंत्री का नहीं हुआ. अभी हाल ही में इजराइल के प्रधानमंत्री ने यूरोप के नेताओं से बातचीत की.भारत और चीन के साथ मजबूत संबंधों का हवाला देते हुए इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने यूरोपीय संघ (EU) पर खूब हमले किए.

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प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि यूरोपीय संघ का उनके देश के प्रति रवैया सनक भरा और खुद को नुकसान पहुंचाने वाला लगता है साथ ही यह भी कहा कि यूरोपीय संघ दुनिया का एकमात्र ऐसा संगठन है जो इजरायल के साथ अपने संबंधों में शर्तें रखता आया है.

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आपको बता दें कि इस बुधवार 19 जुलाई को बंद कमरे में 4 यूरोपीय नेताओं के साथ प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू एक मीटिंग पर थे लेकिन उसी दौरान वहां मौजूद किसी नेता का माइक्रोफोन खुला रह गया और जिससे वहां हुई सारी बात कमरे से बाहर आ गई.

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वहीँ प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को अपनी मीटिंग के दौरान यह कहता पाया गया कि इजरायल की भारत और चीन के साथ बढ़ती तकनीकी साझेदारी की तरफ इशारा करते हुए कहा कि चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग इजरायल को ‘तकनीक का दैत्य’ कहकर बुलाते हैं, और साथ ही भारत और चीन के साथ हमारा बेहद खास रिश्ता है और यह वो देश हैं जो राजनीतिक मुद्दों की परवाह नहीं करते हैं।

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आपको बता दें कि इसी दौरान नेतन्याहू ने पीएम मोदी के साथ हुई हालिया मुलाकात का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा है कि पीएम मोदी ने भारत के हितों को ध्यान में रखने की बात कही थी।  कि ‘ मुझे ज्यादा पानी, साफ पानी की जरूरत है, मैं इसे कहां से लाऊंगा?…रामल्लाह से?’ नेतन्याहू पीएम मोदी के बारे में बात करते हुए पाए गए. 

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नेतान्याहू ने बताया कि पीएम मोदी क्यों नहीं गए थे फिलिस्तीन 

जहाँ पीएम मोदी की इज़राइली दौरे की जहाँ देश भर में चर्चाएँ थीं वहीँ दूसरी तरफ विपक्ष के कई नेताओं को ये बात भी खाये जा रही थी कि इज़राइल तक जा कर भी पीएम मोदी फिलिस्तीन क्यों नहीं जायेंगे? तो हम आपको बता दें इस बात का भी खुलासा करते हुए नेतान्याहू के इस ऑडियो में से ऐसी बात सामने निकल कर आई है जिसे आपको भी यकीन हो जायेगा कि आखिर पीएम मोदी ने फिलिस्तीन ना जाकर कोई गलती नहीं की है.

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बता दें कि रामल्लाह फिलिस्तीन के पश्चिमी तट पर स्थित एक महत्वपूर्ण शहर है. जानकारी के लिए बता दें कि भारत सहित तमाम देशों के उच्चायोग रामल्लाह में ही स्थित हैं. अबतक का इतिहास उठा कर देखें तो जब भी दुनिया के किसी भी देश का राष्ट्राध्यक्ष जब भी इज़राइल का दौरा करते हैं तो वो रामल्लाह अरूर जाते हैं लेकिन पीएम मोदी ने ऐसा नहीं किया था. माना जाता है कि पीएम मोदी का ऐसा करना विदेशी संबंधों के मामले में इजरायल और फिलिस्तीन को जोड़ने की प्रवृत्ति को तोड़ना था.

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लीक्ड ऑडियो के मुद्दे पर बताया जा रहा है कि यह गलती उस वक्त हुई जब इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन, स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको, पोलैंड के प्रधानमंत्री बीटी जिडलो और चेक गणराज्य के प्रधानमंत्री बोहुस्लैव सोबोत्का के साथ मुलाकात कर रहे थे.

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इसी दौरान माइक्रोफोन के जरिए कमरे से बाहर एक बात और सामने आई है जिसमें  नेतन्याहू कह रहे हैं कि ‘हम अजीब हालात देख रहे हैं’ यूरोपीय संघ की अगर बात करें तो ये संघ दुनिया देशों का संगठन है जो इजरायल के साथ संबंधों को लेकर शर्तें लगाता रहता है.

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इसी दौरान नेतन्याहू को यह भी कहते हुए सुना गया, कि ‘मुझे लगता है कि यह साफतौर पर पागलपन है, मैं अपने और इजरायल के हितों की बात नहीं कर रहा हूं बल्कि मैं यूरोपीय संघ के हितों की बात कर रहा हूं.  नेतन्याहू ने कहा कि फिलिस्तीन और इजरायल के बीच शांति स्थापित करने के प्रयास में यूरोप, इजरायल के साथ संबंधों को खतरे में डालकर अपने ही हितों को अनदेखा कर रहा है। नेतन्याहू यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि इजरायल विकास के हर मुकाम पर है और यूरोप खुद को इस देश से अलग करके बहुत बड़ी भूल कर रहा है.’

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तभी इतने में ही नेतन्याहू ने चेतावनी भरे लहजे में बोल डाला कि , ‘ मैं चुप रहता अगर बात केवल मेरे हितों की होती लेकिन यूरोप के हितों के बारे में इस पूरे क्षेत्र में केवल एक ही देश है जो सोच रहा है. जिस बात को यूरोप को ध्यान में रखना चाहिए और साथ ही इजरायल पर हमला ना करते हुए इजरायल के साथ समर्थन करना चाहिए। इस मौके पर देखा गया कि पीएम नेतन्याहू अपने समकक्षों को ईयू-इजरायल असोसिएशन समझौते के लिए मनाने की कोशिशें कर रहे थे। आपको बात दें कि यह वो समझौता है जो इजरायल के गाजा में 2008-2009 में किए गए ऑपरेशन के बाद से ठंडे बस्ते की तरह पड़ा हुआ है।

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