जिस दिन वेंकैया नायडू ने उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन किया था उसी दिन बीजेपी के नेताओं ने आडवाणी को उनकी अहमियत बता दी थी !

लालकृष्ण आडवाणी भारतीय जनता पार्टी के ऐसे नेता हैं जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी को जीवंत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है लेकिन इन दिनों उनके दिन कुछ खास अच्छे नही चल रहे हैं. दरअसल 2014 में जब लोकसभा का चुनाव होना था तो तब यही कयास लगाये जा रहे थे कि शायद पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता होने के नाते आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया जाय लेकिन उस वक्त नरेंद्र मोदी बाजी मार गये. फिर जुलाई 2017 में ही राष्ट्रपति पद का उमीदवार चुनना था तो लगा कि मोदी शायद आडवाणी को गुरु दक्षिणा स्वरुप राष्ट्रपति पद के लिए चुन लें लेकिन ऐसा भी नही हुआ. अंततः आडवाणी को मार्गदर्शक मंडल में ही संतोष करना पड़ा.

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आडवाणी को अब उम्मीद छोड़ देनी चाहिए

अब तो वेंकैया नायडू को उप राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाया गया है ऐसे में जब उनका नामांकन हो रहा था तो भाजपा के वरिष्ठ नेता के साथ कुछ ऐसा वाकया हुआ जिससे पता चलता है कि भाजपा में उनकी क्या अहमियत है. कितना भी हो लेकिन आडवाणी ऐसे नेता हैं जिन्होंने पार्टी की कमजोर हालत को मजबूत दिशा दी और बड़ी पार्टी बनाई लेकिन उप राष्ट्रपति के नामांकन के दौरान जो हुआ उससे खुद आडवाणी भी काफी दुखी होंगे और अब उन्हें भी समझ जाना चाहिए कि पार्टी या उसके नेताओं से किसी भी तरह की उम्मीद बेईमानी होगी.

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आडवाणी अकेले गेट नंबर 4 पर खड़े रहे

आपको बता दें कि 18 जुलाई को जब वेंकैया नायडू ने उप-राष्‍ट्रपति पद के लिए नामांकन दाखिल किया तो इस मौके पर उनके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व उनके प्रमुख मंत्री मौजूद थे. इस नामांकन में वरिष्ठ नेताओं के साथ लालकृष्‍ण आडवाणी भी मौजूद थे. जब नामांकन दाखिल हो गया तो सभी एक साथ बाहर निकले. इस दौरान वेंकैया नायडू मीडिया से बातचीत करने के लिए वहां पहुंचे जहां मीडिया का जमावड़ा था.  मगर सबके साथ बाहर निकलने के बाद भी आडवाणी अकेले संसद के गेट नंबर 4 पर खड़े रहे.

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तेज धूप में अकेले खड़े रहे, मीडियाकर्मियों ने बुलाया तो…

दरअसल गेट नंबर 4 पर सांसदों और नेताओं की गाड़ी आती है और वो वहीं से निकलते हैं और इसीलिए आडवाणी भी उसी गेट पर पहुंचे और कड़ी धूप में अपनी गाड़ी का इंतजार करते रहे. काफी देर तक आडवाणी अकेले इस गेट पर खड़े रहे लेकिन जब कुछ देर तक उनकी गाड़ी नहीं आई तो वहां मौजूद मीडियाकर्मी उनके पास गये और उन्हें पत्रकारों के लिए बनी जगह पर आकर बैठने को कहा. आपको बता दें कि गेट नंबर 4 के सामने पत्रकारों के लिए उचित स्थान बनाया गया है, जहां पत्रकारों का जमावड़ा लगता है. आडवाणी मीडियाकर्मियों के कहने पर उस जगह पर गये और एक कैमरामैन के साथ बेंच पर बैठ गए.

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न तो कोई नेता था और न ही कोई सुरक्षाकर्मी

आपको बता दें कि जब आडवाणी अपनी गाड़ी का इंतजार कर रहे थे तो उनके साथ न तो कोई नेता था और न ही सुरक्षाकर्मी. सारे मीडियाकर्मी ये देखकर हैरान थे कि इतने वरिष्‍ठ नेता अकेले कैसे पड़ गये. मीडियाकर्मियों में से कुछ ने आडवाणी से बात करने की कोशिश तो की लेकिन वो कुछ नहीं बोले. काफी देर तक अपने बीच आडवाणी को पाकर लोग सेल्फी लेने लगे लेकिन तभी आडवाणी उठे और गेट नंबर 1 की तरफ चल दिए. वहां भी उनको कुछ देर इंतजार करना पड़ा और थोड़ी देर बाद उनका काफिला वहां पहुंचा जिसके बाद वो वहां से निकले.

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अकेले हो गये हैं आडवाणी?

जो पत्रकार संसद की रिपोर्टिंग कर रहे थे उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि शायद ऐसा पहली बार हुआ है कि आडवाणी इस तरह संसद परिसर में अकेले घूमते दिखाई दिए हों. पत्रकार अशोक सिंहल के मुताबिक ‘अक्सर ऐसा होता है जब आडवाणी संसद के लिए आते हैं, तो गेट नंबर 6 से आते हैं और अपने पूरे काफिले के साथ ही संसद भवन स्थित अपने कार्यालय जाते हैं. ऐसा बहुत कम हुआ है कि वो दूसरे गेट से आये हों.’

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