जानिए नॉएडा की महागुन सोसाइटी में बांग्लादेशी नौकरानी जब चोरी करते पकड़ी गयी तो बुला लायी दंगाईयों को और कहा फ़्लैट मालिक की पत्नी की इज्जत लूट लो जिसके बाद…

आज की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में कहीं ना कहीं सब चाहते हैं कि वो जब दिन भर नौकरी करके थके-हारे घर पहुंचे तो वहां उनका हाथ बटाने वाला कोई हो और शायद इसी चाह में लोग नौकर रखते हैं. आज के समय को देखते हुए ये कहना गलत नही होगा कि अगर आपको नौकर सही मिल गया तो आपकी लौटरी है और नहीं मिला तो ज़िन्दगी नर्क बनने में भी ज्यादा समय नहीं लगता. ये पंक्ति इस वक़्त अगर सबसे सटीक किसी पर बैठती है तो वो है नॉएडा के सेक्टर 78 के महागुन मोड़ेरने में रहने वाले एक परिवार पर. इस परिवार ने भी अपने घर में एक नौकरानी रखी थी जिससे उन्हें उम्मीद थी कि वो उनकी मदद करेगी लेकिन उनकी नौकरानी मदद की जगह उन्ही के घर में चोरी करती थी.

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नौकरानी ने कुबूला कि उसने चोरी की थी 

सोशल मीडिया पर ये मुद्दा इस वक़्त गरमाया हुआ है. तो चलिए हम आपको इस मुद्दे से जुड़ी कुछ ऐसी बातों से रूबरू करा देते हैं जिनके बारे में जानकर आप भी अपने घर में अगली बार नौकर रखने से पहले सौ बार सोचेंगे. कहानी किसी भी आम घर की तरह है. एक मालिक है, एक नौकर है. मालिक को एक दिन भनक लगती है कि उनकी नौकरानी उनके पीठ पीछे उनके घर में चोरी करती है. इस बात की पुष्टि करने के लिए मालिक ने खुद नौकरानी से पूछा कि क्या वाकई ऐसा है?

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मालिक ने सबूत के तौर पर नौकरानी से ये भी कहा कि उनके पास नौकरानी की चोरी करते समय का वो वीडियो भी है जिससे साफ़ साबित होता है कि उसी ने चोरी की है. खुद को मामले में घिरता देख नौकरानी, ज़ोहरा बीबी, जो कि एक बंगलादेशी मुसलमान है, उसने अब अपना गुनाह कबूल कर लिया लेकिन बात यहीं नहीं थमी.

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किसी भी जागरूक इंसान की तरह फ्लैट मालिक ने ज़ोहरा से कहा कि वो इसकी शिकायत पुलिस में करेंगें, जिसपर वो भड़क गयी. ज़ोहरा ने कहा, “हाँ मैंने तुम्हारे घर से 10.000 रुपये चुराए हैं उन्हें तुम मेरी तनख्वाह से काट लेना.” लेकिन मालिक ने इस पर भी ये कहा कि ये मामला वो पुलिस में ले जायेंगे क्योंकि उन्हें पता था कि ज़ोहरा महागुन के ही कई और फ्लैट्स में भी काम करती हैं और आज अगर उन्होंने शिकायत नहीं की तो हो सकता है कल को ज़ोहरा कोई और बड़ा गुल खिला दें.

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अपना फोन मालिक के घर छोड़कर भाग खड़ी हुई ज़ोहरा  

अब ज़ोहरा को यकीन हो चला था कि उसका मालिक उसको यूँ ही नहीं जाने देने वाला है. ऐसे में जैसे-तैसे बिना कोई बात ख़त्म किये ज़ोहरा अपना फोन वहीँ मालिक के घर छोड़कर रफूचक्कर हो गयीं. मालिक ने भी जागरूक नागरिक का फ़र्ज़ अदा करते हुए ज़ोहरा की शिकायत जाकर आपने सोसाइटी के मेन्टेनेन्स डिपार्टमेंट में कर दी. साथ ही उन्होंने ज़ोहरा को फोन भी वहीँ जमा करा दिया.

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लगभग शाम 5:30 की गयी इस शिकायत पर मेंटेनेंस हेड रामास्वामी ने फ्लैट मालिक को आश्वासित किया कि वो निश्चिन्त हो कर घर जायें. वो ज़ोहरा और बाकी सभी नौकरों पर नज़र रखेंगे और उचित कार्यवाही भी करेंगें. शिकायत कर के मालिक अब अपने फ्लैट में आ गए. ये सोच कर वो शायद अब निश्चिंत हो गए हों कि चलो शायद चोरी के पैसे तो वापिस नहीं आयेंगे लेकिन कम-से-कम ज़ोहरा की शिकायत कर के उन्होंने ज़ोहरा को आगे किसी और के साथ ऐसा करने से तो रोक दिया.

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रात के 9 बजे फिर फ्लैट मालिक के घर की घंटी बजी 

फ्लैट मालिक अब सब भूलने की ही सोच रहे होंगे कि तभी रात के तकरीबन 9 बजे उनके घर की घंटी बजती है. दरवाज़ा खोलने पर सामने महागुन में ही रहने वाली 2 महिलाएं, ज़ोहरा के पति और 2 पुलिसकर्मी  के साथ दरवाज़े पर खड़ी थीं. फ्लैट मालिक को लगा हो ना हो ज़ोहरा के पति ने 100 नंबर पर डायल कर इस बात की खबर पुलिस को ज़रूर दी होगी. ज़ोहरा के पति का मालिक से पहला सवाल था कि मेरी पत्नी कहा हैं? और उसका जो फोन यहाँ छूट गया था वो कहाँ है?

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फ्लैट मालिक ने एक बार फिर से पुलिस को सारी कहानी सुनाई और साथ ही उन्होंने पुलिसकर्मियों को ज़ोहरा के फोन की भी जानकारी दे दी. सारी खबर सुनकर पुलिस वाले ने ज़ोहरा के पति को चिल्लाते हुए कहा कि, “खबरदार अगर आगे से इन्हें परेशान किया तो.” “तुम जाकर अपनी पत्नी को कहीं और ढूंढो. या उसकी FIR दर्ज कराओ.” पुलिस को भी अब यकीन हो गया था कि इस मामले और ज़ोहरा के लापता  (इस समय तक) होने में फ्लैट मालिक का कोई हाथ नहीं हैं.

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ये सोच कर सोये कि अब शायद सब ठीक हो गया हो, लेकिन सुबह जो हुआ…

फ्लैट मालिक को लगा कि अब शायद ज़ोहरा के मुद्दे पर ठीक-ठाक तमाशा हो चुका है और अब कुछ नहीं बचा. सब ख़त्म और उस दिन को एक बुरा सपना समझ कर फ्लैट मालिक का परिवार सो गया. सोने से पहले उन्होंने मन में ही प्रण लिया कि अब कुछ भी क्यों ना हो अब कोई बंगलादेशी को घरेलु मदद के नाम पर वो अपने गले नहीं बांधेंगे. लेकिन वो जब सुबह जागे तो…

https://www.facebook.com/SayNo2SoldMedia/videos/266865887131027/

फ्लैट मालिक सुबह जागे तो जो हुआ वो आप सब ने न्यूज़ चैनल पर देखा ही होगा लेकिन इस हमले का ज़िक्र करते हुए लोगों ने बताया कि उस वक़्त महागुन, जो कि एक  रिहायशी इलाका माना जाता है वहां दंगो सा माहौल था. अब तक ज़ोहरा के कई बंगलादेशी दूत दंगाइयों की शक्ल में सोसाइटी में घुस चुके थे और उन्होंने फ्लैट मालिक के घर पर तोड़फोड़ शुरू कर दी.

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इधर घर के खिड़की दरवाज़ों का कांच टूटता उधर फ्लैट मालिक शायद खुद से ही ये सवाल करता कि आखिर उसकी गलती क्या थी? एक बंगलादेशी मुस्लिम महिला को घर पर नौकर रखना? या उसकी गलती पर उसकी शिकायत करना? आखिर ऐसा क्या हुआ था कि ज़ोहरा के परिजनों ने सोसाइटी में घुसकर ताबड़तोड़ पत्थरबाज़ी शुरू कर दी थी?

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सवाल तो यहाँ ये भी खड़ा होता है कि अगर ज़ोहरा के पति ने ये कहा की ज़ोहरा फ्लैट मालिक के घर में काम करने के बाद अपने घर नहीं लौटी तो आखिर ज़ोहरा के पति को ज़ोहरा के उस फोन के बारे में कैसे पता चला? ज़ोहरा के पति को ये कैसे पता चला कि ज़ोहरा का फोन मालिक के घर पर है? इन सवालों का जवाब चाहिए तो आपको नॉएडा में इस तरह के हुए कई हमलों की फाइलें खंगालनी पड़ेगी. जैसे कि डॉ नारंग का केस.

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कौन थे डॉ. नारंग और क्या थी उनकी कहानी ? 

कुछ समय पहले ही नॉएडा से एक और ऐसी ही कहानी सामने आई थी जहाँ एक छोटी सी बात पर बंगलादेशी मुसलमानों के एक गुट ने डॉ. नारंग को सबके सामने पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया था.

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डॉक्टर नारंग की भी गलती ढूँढने जायेंगे तो आपके हाथ शायद ही कुछ लगे. 23 मार्च को डॉ.नारंग को उनके घर से बाहर खींच कर लोहे के रॉड से पीट-पीटकर मार डाला गया था. इसके पीछे का कारण जानना है तो एक दिन पीछे यानी की 22 मार्च की घटना के बारे में जान लीजिये. दरअसल 22 मार्च को डॉक्टर नारंग अपने बेटे और भतीजे के साथ क्रिकेट खेल रहे थे.

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खेलते-खेलते क्रिकेट की बॉल सड़क की दूसरी तरफ चली गयी. खेल रुकता देख डॉ.नारंग का बेटा सड़क की तरफ भागा, बेटे को सड़क पर जाता देख डॉक्टर नारंग भी बेटे के पीछे दौड़े कि तभी दो-बाइकसवारों से गलत ड्राइविंग को लेकर उनकी बहस छिड़ गयी. खबर के अनुसार बाइकर बाइक तेज़ी से और गलत तरीके से गाड़ी चला रहा था जिसके चलते डॉ.नारंग ने उसे थप्पड़ जड़ दिया था. हालाँकि ये मामला यहीं ख़त्म हो गया था लेकिन इस थप्पड़ से आहत इन युवकों ने देर रात डॉ.नारंग के घर पहुँच कर उन्हें बाहर घसीट कर लोहे की रॉड से पीट-पीटकर मार डाला था. बताते हैं कि इस मामले में सभी दोषी बंगलादेशी मुसलमान ही थे.

Posted by शुभ्रांशु झा on 2017 m. liepa 11 d.

फ्लैट के मालिक की पत्नी को भी दी गयी थी धमकी 

यहाँ ये सब बातें बताने का एक कारण ये भी है कि सबको पता चले कि आखिर कैसे इन बंगलादेशी मुसलमानों का खौफ और कहर बढ़ते जा रहा है. महागुन केस में भी एक ऐसा मेसेज सामने आया है जिसमे साफ़ लिखा है कि कैसे उस वक़्त वहां पहुंचे बंगलादेशी वहशी दंगो की फ़िराक में थे. वो छोटी-मोटी लड़ाई कर मानने नहीं वाले थे.

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सोशल मीडिया पर वायरल एक मेसेज में साफ़ बताया गया है कि कैसे जब ये पत्थरबाज़ महागुन के गार्ड्स और लोगों पर पत्थर बरसा रहे थे उसी वक़्त उन बंगलादेशी युवकों की भीड़ से आवाज़ आई कि महिला (फ्लैट मालिक की पत्नी)  को छोड़ो मत उसकी इज्ज़त लूट लो. उसके बच्चों को मार दो.

मामले को बढ़ता देख महागुन के निवासियों ने फ्लैट मालिक और उनके पूरे परिवार को इस मामले के दौरान बाथरूम में बंद कर दिया था और शायद इसी वजह से आज उनकी जान बच पाई.

बांग्लादेशी नौकरों की इस हरकत के बाद सोसाइटी ने उठाया ये बड़ा कदम

इस मामले ने तूल पकड़ा तो महागुन सोसाइटी ने ये फैसला किया कि अब वो किसी भी बंगलादेशी युवक/युवती को अपनी सोसाइटी में काम नहीं देंगे. जैसे की बताया जा रहा है कि अभी तक महागुन का खुद का कोई  Resident Welfare Association नहीं है ऐसे में इस मामले की उचित और तुरंत कार्यवाही करते हुए ये फैसला किया है कि अब वो अपनी सोसाइटी में कोई भी बंगलादेशी सेवक नहीं रखेंगें.

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