अपने तैश में दिए गए इस्तीफे में ये बड़ी चूक कर गयीं मायावती, 3 पेज का इस्तीफ़ा तो लिख दिया लेकिन उसमें…

जैसा की सभी जानते हैं  18/07/2017 को मायावती ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया था.  बताया जा रहा है कि वो इस बात से खफा हैं कि उन्हें राज्यसभा में बोलने नहीं दिया जाता है. साथ में मायावती ने ये भी कहा है कि उनका राज्यसभा में रहने का कोई फायदा नहीं जब वो अपने समुदाय की बात नहीं रख पा रही हैं.  आपको बता दें मायावती को  सहारनपुर में दलितों पर हो रहे अत्याचार का मुद्दा उठाने के लिए 3 मिनट दिए गये थे.

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जब 3 मिनट पूरे हो गए तो… 

जैसे ही मायावती के 3 मिनट पूरे हो गये तो उनको उप सभापति ने रोकते हुए बैठने को कहा, इस बात पर मायावती  गुस्सा हो गयी और उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया. इसके बाद मायावती ने  अपना इस्तीफ़ा सभापति पीजे कुरियन को भेज दिया.

 

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पत्रकारों से बातचीत करते हुए मायावती ने क्या कहा…

“यूपीए और अन्य विपक्ष के नेताओं ने मुझसे अनुरोध किया था कि आप देश और जनहित के मुद्दे पर मज़बूती से अपनी बात उठाती हैं. हमारा अनुरोध है कि आप इस्तीफा न दें. “मुझे कमज़ोर तबके के जो लोग हैं, जो ग़रीब लोग हैं, किसान हैं, मज़दूर हैं और खास तौर से जिस समाज से मैं ताल्लुक रखती हूं, जब उस समाज की बात भी मैं हाउस में नहीं रख पाऊंगी तब मेरा इधर रहने का कोई फायदा नहीं है.”

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इस्तीफा नहीं होगा स्वीकार क्योंकि…

आपको बता दें मायावती ने जो इस्तीफ़ा दिया है वो नियमों के खिलाफ है और इसी के चलते उनका इस्तीफ़ा मंजूर नहीं होगा. उन्होंने नियमों के खिलाफ अपने इस्तीफे में वजह बताई है और उनका इस्तीफ़ा 3 पन्नों का है. नियम ये कहता है कि इस्तीफ़ा सिर्फ एक लाइन का होगा.

 

देखिये इस्तीफ़ा…

मायावती का इस्तीफ़ा पूरे 3 पेज का है और इस्तीफे में उनके ऐसे करने की पूरी वजह लिखी हुई है जबकि यह नियमों के खिलाफ है.

 

अब बात साफ़ है इस्तीफा  शयद ही मंजूर होगा, ये सिर्फ और सिर्फ पब्लिसिटी स्टंट है. सबसे मजेदार बात ये रही कि मायावती को इस्तीफ़ा लिखना नहीं आया.

 तो इसलिए मायावती देखकर पढ़ती हैं अपना भाषण !

भारतीय राजनीति में अक्सर आपने ऐसे कई नेता देखें होंगे जो अपना भाषण बिना देखे नही पढ़ पाते l जिनमें मायावती का भी नाम आता है l अक्सर आपने देखा होगा बसपा सुप्रीमों मायावती जब भी अपना भाषण या बयान देती हैं तो उनके हाथ में एक पर्चा जरूर होता है और उसे वो देख-देखकर पढ़ती है l इस बात को लेकर सोशल मीडिया पर उनका खूब मजाक भी उड़ता है l वैसे आपको बता दें इस लिस्ट में इकलौती मायावती ही नही है सोनिया गाँधी भी इस इसी कतार में आती हैं l

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सोशल मीडिया और विरोधियों द्वारा मजाक जाने के बाद मायावती ने लिखे हुए भाषण पढ़ने के आरोपों का जवाब देते हुए खुलासा किया कि वर्ष 1996 में उनके गले का बड़ा आपरेशन हुआ था और पूरी तरह खराब हो चुका एक ‘ग्लैण्ड’ डॉक्टरों ने निकाल दिया था। उन्होंने कहा कि बिना लिखा भाषण देने में ऊँचा बोलना पड़ता है लेकिन डॉक्टरों ने ऐसा नहीं करने की सलाह दी है।

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