DSP अयूब की हत्या के 6 दिन बाद ही तय हो गया था कि अब मीरवाइज को नहीं मिलेगी ज़ेड श्रेणी की सुरक्षा.

उस रात अपनी हत्या के वक़्त डीएसपी अयूब पंडित जिस अलगाववादी नेता मीरवाइज मौलवी उमर फारूक की सुरक्षा पर तैनात थे उस अलगाववादी नेता की सुरक्षा पर सख्त कदम उठाते हुए सरकार ने उनकी “Z” श्रेणी में मिलने वाली सुरक्षा को घटाने का फैसला किया है. अबतक मिली खबर के अनुसार जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मीरवाइज को अबतक मिलने वाली सुरक्षा में कटौती करते हुए उसकी संख्या आधी कर दी है. जिसके तहत अब मीर वाइज की सुरक्षा में पहले से तैनात 16 जवानों की जगह सिर्फ आठ जवान रहेंगे. प्रशासन ने यह कदम पिछले दिनों भीड़ द्वारा डिप्टी एसपी मोहम्मद अयूब पंडित की पीट-पीटकर हत्या किए जाने की घटना के बाद उठाया है.

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मस्जिद के बाहर की गयी थी डीएसपी अयूब की हत्या और…

याद दिला दें कि डीएसपी पंडित की हत्या पिछले महीने की  23 तारीख़  को नौहट्टा इलाके के जामिया मस्जिद के बाहर कर दी गयी थी. उस वक़्त वहां लोग अलविदा नमाज अदा करने वहां पहुंचे थे कि तभी एक अफ़वाह के चलते भीड़ में मौजूद उपद्रवियों को आया था गुस्सा जिसके चलते उन्होंने डीएसपी पंडित की हत्या कर दी थी.  बताया जाता है कि डीएसपी पंडित की हत्या का कारण उनकी वर्दी पर छपा उनका अधूरा नाम था. बताते चलें कि डीएसपी अयूब पंडित की वर्दी पर उनका नाम डीएसपी “पंडित” लिखा हुआ था, जिससे लोगों ने उन्हें हिन्दू समझ लिया था.

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मस्जिद के अन्दर ही मौजूद थे मीरवाइज…

डीएसपी अयूब पंडित की नृशंस हत्या के बाद ही कई खबरें आई थी जिन्होंने ये साफ़ किया था कि जिस वक़्त डीएसपी अयूब पंडित उग्र भीड़ का शिकार हुए थे उस वक़्त अलगाववादी नेता मीरवाइज मस्जिद के अंदर ही मौजूद थे, लेकिन उन्होंने उस वक़्त ना बाहर आने की सोची और ना ही उग्र भीड़ के प्रकोप से डीएसपी अयूब पंडित को बचाने की| हालाँकि मीरवाइज ने इस बात का खंडन किया था.

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डीएसपी अयूब की हत्या के बाद ही शुरू कर दी गयी थी मीरवाइज की सुरक्षा घटाने की प्रक्रिया 

यूँ तो हुर्रियत कॉन्फ्रेन्स के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारुक की इस तरह से सिक्यूरिटी घटा कर आधी कर देना अचानक हुआ फैसला जैसा लग रहा है लेकिन हम आपको बता दें कि मीरवाइज की सुरक्षा घटाने की प्रक्रिया डीएसपी की हत्या के 6 दिन बाद यानी की 29 जून को ही शुरू कर दी गई थी.

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काफ़ी समय से “Z” प्लस सिक्यूरिटी का लुफ्त उठा रहे थे मीरवाइज 

बात करें अगर मीरवाइज की सिक्यूरिटी कि और इस वजह की कि आखिर मीरवाइज जैसे अलगाववादी नेता को “Z” सिक्यूरिटी मिलने के  कारण की तो हम आपको बता दें कि मीरवाइज के पिता मीरवाइज मौलवी मोहम्मद फारुक की हत्या साल 1990 में उनके आवास पर हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकियों ने कर दी थी. उसी के बाद से उन्हें जेड प्लस की सुरक्षा मिली हुई थी.

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अब किस श्रेणी में रखे जायेंगे मीरवाइज ये तय नहीं हुआ है

इस तरह से “Z” श्रेणी की सुरक्षा घटाये जाने के बाद अब सवाल ये उठता है कि आखिर मीरवाइज अब किस श्रेणी में रखे जायेंगे तो हम यहाँ आपको बता दें कि मीरवाइज को जेड श्रेणी की सुरक्षा थी, लेकिन अब उन्हें किस वर्ग में रखा जायेगा इसकी अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है. मीरवाइज से जब अपनी सुरक्षा के घट जाने पर सवाल किया गया तो उन्होंने अपनी सुरक्षा  में हुई कटौती की पुष्टि करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. मैंने कभी सुरक्षा कवच का आग्रह नहीं किया था। मीरवाइज की सुरक्षा में तैनात 16 सुरक्षाकर्मियों के दस्ते में से आठ को हटा लिया गया है.

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