बाढ़ से प्रभावित गुजरात में कुछ मुस्लिम युवकों ने एक मंदिर में जाकर किया ऐसा काम कि वहां मौजूद हिन्दुओं ने…

इस समय भारत के कई इलाके बाढ़ से प्रभावित हैं. बाढ़ से प्रभावित इन इलाकों में गुजरात का नाम भी है. एक समय पर साम्प्रदायिक झगड़े के कारण पूरे भारत में गुजरात का नाम आया था लेकिन आज जो खबर हम आपको दिखाने बताने जा रहे हैं उसने गुजरात में भाईचारे की मिसाल पेश की है. बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित बनासकांठा के धनेरा इलाके में ऐसा नज़ारा देखने को मिला जिसने बता दिया कि हिन्दू-मुस्लिम भारत में भाईचारे के साथ रहते हैं. गुजरात में बाढ़ से कई इलाके डूब गए हैं, इस बाढ़ की चपेट में जब एक मंदिर आया तो मुस्लिम समुदाय के लोग गाद में धंसे मंदिर की सफाई में लग गए.

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कुछ दिन पहले तक गुजरात का बनासकांठा इलाका बाढ़ की चपेट में आ गया था. बनासकांठा के धनेरा में स्थित सिद्धि विनायक गणपति मंदिर के पुजारी ने बताया कि, ‘पूरे इलाके में 8 से 10 फीट पानी भर गया था. जब पानी उतरा तो मंदिर में बहुत ज्यादा गाद भर गई थी.

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मंदिर के पुजारी ने आगे बताया कि, ‘पालनपुर के जामिया उलेमा-ए-हिंद के लगभग 15-20 मुस्लिम भाइयों ने मदद करने के लिए हाथ बढ़ाया. उन्होंने कई धार्मिक स्थलों की साफ़-सफाई की. जब मुस्लिम भाइयों को लगा कि मुझे मदद की जरुरत है तो वो मेरी मदद करने के लिए भी पहुँच गए.’ इन मुस्लिम युवकों ने करीब 2 घंटों तक लगातर काम करके मंदिर की सफ़ाई कर दी. गणपति मंदिर की सफाई में हाथ बंटाने के बाद इन लोगों ने सती माता के मंदिर को साफ़ करने में भी मदद की. इस टीम की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ़ हो रही है. वहां मौजूद हिन्दुओं ने भी मुस्लिमों के इस कदम को सराहा.

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भारत एक ऐसा मुल्क है जहाँ हर धर्म के लोग रहते हैं और समाज में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो लोगों को आपस में लड़ाकर अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाहते हैं. इसीलिए कई बार हमको हिन्दू-मुस्लिमों के बीच साम्प्रदायिक झड़पों की ख़बरें मिलती रहती हैं. चाहे अपराधिक मानसिकता वाले लोग कितनी भी कोशिश कर लें लेकिन वो भारत की अखंडता को खत्म नहीं कर सकते. आज भी भारत में हिन्दू-मुस्लिम एकता के साथ रहते हैं और उनकी एकता की मिसाल गुजरात में पेश हो चुकी है.

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हिंदुस्तान एक विविधताओं का देश है और यहाँ पर कई धर्मों के लोग रहते हैं और अक्सर देखा जाता है कि इनके बीच कभी-कभी संघर्ष भी हो जाता है, लेकिन गुजरात के ही जैसा वाराणसी से भी एक मामला सामने आया था, ये एक ऐसा वाकया था जो हिन्दू-मुस्लिम के बीच खड़ी दीवार को गिराने के लिए काफी था. दरअसल अभी कुछ दिनों से जिस तरीके से देश के अंदर माहौल ख़राब करने की साजिश चल रही है उसको देखते हुए ये मामला उन सभी लोगों  के मुंह पर तमाचा है जो हिन्दू और मुस्लिमों को आपस में लड़ाने का कार्य करते हैं. पश्चिम बंगाल में हुए दंगों को केंद्र में रखकर बात करें तो सिर्फ फेसबुक की एक पोस्ट पर दंगा करने का प्रयास किया गया ऐसे लोगों को इस खबर को को जरुर पढ़ना चाहिए और सीख लेनी चाहिए इस मुस्लिम महिला जिसने हिन्दू-मुस्लिम एकता को दर्शाया है.

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आपको बता दें कि वाराणसी की रहने वाली एक मुस्लिम महिला जिसका नाम आलम आरा है लगभग 17 सालों से शिवलिंग बनाती आ रही हैं. जब उनसे पूछा गया कि वो खुद मुस्लिम हैं फिर वो शिवलिंग क्यों बनाती हैं, तो उन्होंने इस सवाल पर तीखा जवाब देते हुए साफ कर दिया था कि वो हिंदू-मुस्लिम नहीं बल्कि एक हिंदुस्तानी हैं. उन्होंने आगे कहा, ‘यह कला तो भगवान का तोहफा है और इसे हम प्यार से बनाते हैं.’ उनकी इस बात से उन लोगों को सीख लेनी चाहिए जो बात-बात पर धर्म को लेकर लड़ने लगते हैं

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