ट्रम्प-मोदी की मुलाक़ात के बाद पाकिस्तान में भी हुई थी एक उच्च मीटिंग जिसमें नवाज़ ने बौखलाहट में ले लिया था ऐसा अटपटा फैसला

लगभग हफ्ते भर पहले हुई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक ऐतिहासिक मुलाक़ात कई लोगों के गले अभी तक ठीक से नहीं उतर पाई है| इन लोगों में सबसे पहला नाम आता है पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ का| दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली माने जाने वाले नेताओं को इस तरह से गले मिलते देख नवाज़ शरीफ ठीक तरह से बौखला उठे हैं| नवाज़ शरीफ को तो मानो अब ये समझ ही नहीं आ रहा है कि वो किस ओर जायें और किससे मदद मांगे? ऐसे में अपनी इसी बौखलाहट में नवाज़ शरीफ ने हाल ही में पाकिस्तान में एक उच्चस्तरीय मीटिंग बुलाकर कुछ ऐसे फैसले लिए हैं जिनसे ना सिर्फ पाकिस्तान की झुंझलाहट बल्कि उसकी बदनीयत भी साफ़ दिखाई दे रही है|

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बताया जा रहा है कि इस उच्चस्तरीय मीटिंग में खुद नवाज़ शरीफ तो मौजूद थे ही साथ ही इसमें पाकिस्तानी  वित्त मंत्री इशाक दार और विदेश मंत्रालय से जुड़े कई दूसरे और बड़े अधिकारी भी मौजूद थे। ये बात साफ़ तौर पर पाकिस्तान की झुंझलाहट दर्शाती है| यूँ तो  पहले भी भारत और अमेरिका की बढ़ती नज़दीकियों को देखकर पाकिस्तान के कलेजे पर सांप लोट चुका है लेकिन इस बार की इस उच्चस्तरीय मीटिंग में…

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ख़बरों की माने तो पाकिस्तानी  विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज इस मीटिंग में  नवाज शरीफ को कई मामलों की जानकारी देंगे।  साथ ही इस मीटिंग में भारत-पाकिस्तान के रिश्तों के साथ ही कश्मीर और एलओसी पर कड़ी नज़र रखने की बात भी की जाएगी| पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प की पहली ही मुलाकात से नवाज़ शरीफ के पसीने इस कदर छूट चुके हैं कि अपनी इस मीटिंग में   पाकिस्तान, अफगानिस्तान के बॉर्डर को लेकर भी बात कर सकता है|

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सूत्रों के मुताबिक सिर्फ यही मीटिंग ही नहीं बल्कि पीएम  मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के बाद पाकिस्तान इस कदर झुंझला चुका है कि उसने कई और भी बड़े कदम उठाये हैं। ये बात तो तय है कि पीएम  मोदी और ट्रम्प की पहली मुलाकात ही पाकिस्तान के लिए खतरा बन चुकी है| बता दें कि पीएम मोदी और ट्रम्प की मुलाकात से थोड़ी देर पहले ही अमेरिका स्टेट डिपार्टमेंट की तरफ से भारत के सबसे बड़े दुश्मन हिजबुल मुजाहिदीन के चीफ सैय्यद सलाउद्दीन को अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कर दिया गया था|

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पाकिस्तान में हुई इस मीटिंग में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये थी कि इस मीटिंग के बाद हाफिज सईद की पार्टी तहरीक-ए-आजादी जम्मू और कश्मीर को पाक में बैन कर दिया गया जिसका साफ़ ईशारा इस तरफ है कि हो ना हो पाकिस्तान को इस बात की भनक लग गयी होगी कि पीएम मोदी और ट्रम्प की इस मीटिंग में पाकिस्तान की तरफ से पनप  रहे आतंकवाद की जडें काटने का कदम ज़रूर उठाया होगा|

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ऐसे में पाकिस्तान को यही उचित लगा कि इससे पहले कि अमेरिका और भारत पाकिस्तान और नवाज़ शरीफ का आतंकवाद के मुद्दे पर गला पकड़े इससे बेहतर होगा कि वो खुद ही हाफ़िज़ सईद से अपना पीछा छुड़ा लें| बेशक दिखावे के ही लिए|

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