उस दिन मस्जिद में सिर्फ इस वजह से DSP मोहम्मद अयूब पंडित की बच सकती थी जान लेकिन उनके…

कश्मीर में जिस तरीके से हालात चल रहे हैं उससे पूरा देश प्रभावित है, 22 जनवरी को एक मस्जिद में DSP मोहम्मद अयूब पंडित को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डालाl वजह जानेंगे तो आपके होश उड़ जाएंगेl दरअसल वजह ही ऐसी है कि हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देती हैl कश्मीर जोकि भारत का ही हिस्सा है लेकिन वहां हिन्दू-मुस्लिम साथ रहने से तहलका मच जाता है और इसे ऐसे ही नही कहा जा रहा है इसके पीछे एक वजह भी हैll DSP मोहम्मद अयूब पंडित की हत्या भी इसी से जुड़ी हुई हैl दरअसल अयूब पंडित को मस्जिद में नमाज के वक्त मारा गया और इतना ही नही मस्जिद के अंदर अलगाववादी नेता मीरवाइज अंदर नमाज पढ़ रहे थे और बाहर DSP को 200-300 लोगों की भीड़ ने पीट-पीट कर मार डालाl

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DSP एक जिम्मेदार पुलिस ऑफिसर थे और एक देशभक्त भी थेl जामिया मस्जिद के बाहर शब-ए-कद्र की रात उनकी हत्या हुई लेकिन अब उनकी हत्या को लेकर तरह-तरह की बातें हो रही हैं। दरअसल दिवंगत के परिजनों का कहना है कि, ‘अगर नाम के साथ पंडित नहीं जुड़ा होता तो शायद जान बच जाती।’ सोचने वाली बात है कि अगर मोहम्मद अयूब पंडित के नाम में पंडित न होता तो वो आज जिंदा होतेl इस बात पर सवाल उठता है कि अगर कश्मीर में पंडित दिखाई तो उसे मारने के हक़ किसने दिया ? कहीं न कहीं इस हत्या में एक साजिश की बू आती हैl दरअसल कहा जा रहा है कि DSP का घर मस्जिद से लगभग 2 किमी दूर था और उनकी स्थानीय पहचान भी थीl  कहा जा रहा है कि इनकी वजह से नापाक इरादे रखने वालों को दिक्कत हो रही थी, जिसकी कसक उन्होंने मस्जिद में पूरी कर लीl

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शहीद डीएसपी के रिश्तेदारों ने तो यहां तक कह दिया कि, ‘ मुहम्मद अयूब पर भीड़ ने यह सोचा कि वह कश्मीरी पंडित है और इसलिए उसपर हमला कर दिया होगा, क्योंकि उसके पास जो विभागीय पहचान पत्र था, उस पर उसका नाम मुहम्मद अयूब पंडित के बजाय एमए पंडित लिखा हुआ था।’ यहां हम आपको बता दें कि  कश्मीर घाटी में अधिकतर मुस्लिम आबादी मूल रूप से कश्मीरी पंडित समुदाय से जुड़ी है। चूंकि लोग धर्मातरण के बाद मुस्लिम बने हैं इसलिए यहां कई लोग आज भी अपने मुस्लिम नाम के साथ अपने पुराने नाम जोड़ कर लिखते हैं। कश्मीरी में पंडित समुदाय में पंडित नामक एक जात होती है और इसलिए धर्म बदलने वाले लोग आज भी अपने नाम के साथ पंडित लिखते हैं।

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दिवंगत के एक परिजन कहना है कि ‘DSP का जो सरकारी पहचानपत्र था उसपर पंडित लिखा हुआ था और यह उसके विभाग की गलती है। उसने कहा कि ‘अक्सर जब कश्मीर में किसी जगह हुर्रियत समर्थक पत्थरबाज और शरारती तत्वों को पुलिसकर्मी पकड़ते हैं तो सबसे पहले उनका पहचानपत्र देखते हैं। मुहम्मद अयूब के पहचानपत्र पर एमए पंडित लिखा हुआ था और दूसरा वह डीएसपी था। इसलिए वहां मौजूद भीड़ को लगा कि एमए पंडित वहां पत्थरबाजों की मुखबिरी करने आया हैl इस वाकये से एक बात और सामने आती है वो ये कि अभी भी कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को लेकर हालात सुधरे नही हैं और उनके प्रति नफरत अभी भी बरकरार रखी गयी है और इस आग में घी डालने का काम अलगावादी नेता जैसे लोग करते आ रहे हैंl

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