मासूमों की जान तो चली गई लेकिन जान का सौदा करने वाली ऑक्सीजन एजेंसी पर जब छापा पड़ा तो देखिए वहां से क्या मिला

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक दुखद घटना हुई. बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में लगभग 48 घंटे में 36 मासूमों की जान चली गई और मासूमों की मौत की ये संख्या अब 60 से भी ऊपर बताई जा रही है. गोरखपुर में बच्चों की मौत के बाद चारों तरफ हड़कंप मच गया है और इस एक घटना ने न जानें कितने लोगों को झिंझोर कर रख दिया है. सूत्रों की मुताबिक इतनी अधिक संख्या में मौत अस्पताल में ऑक्सीजन न होने की वजह से हुई है.

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ऐसे में सवाल ऑक्सीजन एजेंसी पर उठ रहे थे जिसका नाम पुष्पा गैस एजेंसी है.इस बीच जब एजेंसी से ये सवाल किया गया कि आखिर इतनी बड़ी गलती कैसे हुई तो जो जवाब मिला वो हैरान करने वाला था. कंपनी की HR ने बताया कि ऐसे कोई ऑक्सीजन नहीं काट सकता है.

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इस बयान के बाद जिन्हें योगी सरकार पर शक था उन्हें अब उसपर शक करना बंद करना होगा. आपको बता दें कि योगी ने कुछ दिन पहले ही वहां जाकर सब चीज़ की जांच की थी लेकिन अमूमन देखा गया है कि जब कोई बड़ा सरकारी अफसर ऐसी जगाहों पर आता है तो सभी चीज़ें बेहतर कर दी जाती हैं.

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आपको बता दें यह सरकार की नहीं बल्कि कॉलेज प्रशासन की ज़िम्मेदारी है कि वो ऑक्सीजन देने वाली कंपनी का बकाया पैसा चुकाएं, मौत शुरू होने के बाद कॉलेज ने 22 लाख बकाया राशि देने का फैसला किया और फिर पुष्पा गैस कंपनी ने ऑक्सीजन दी है.

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ऐसे में शक के घेरे में आता है तो वो शख्स जिसका काम कंपनी से लेकर मेडिकल कॉलेज तक ऑक्सीजन देना है. सूत्रों की माने तो जिस आदमी के पास ऑक्सीजन सप्लाई करने का ज़िम्मा था उसके 68 लाख बकाया था जिसकी वजह से उसने ऑक्सीजन की सप्लाई बंद कर दी थी. जानकरी के लिए बता दें सरकार इन सब कामों के लिए टेंडर निकालती है और ऐसे में ज़िम्मेदारी टेंडर लेने वाले की हो जाती है ना कि सरकार की.

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कंपनी का पक्ष इसलिए भी मजबूत नजर आ रहा है कि इस संबंध में 10 अगस्त को अस्पताल के एक कर्मचारी द्वारा कॉलेज के प्राचार्य लिखा एक पत्र भी सामने आया है। पत्र में बताया गया था कि लिक्विड ऑक्सिजन का स्टॉक खत्म होने के संबंध में 3 अगस्त को भी मेडिकल कॉलेज प्रशासन को जानकारी दी गई थी। पत्र में साफ लिखा गया है कि पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड ने 63.65 लाख रुपये के बकाए का भुगतान न होने पर ऑक्सिजन सप्लाई न करने की बात कही है। सप्लाई बाधित होने पर सीधे मरीजों की जान को खतरा पैदा हो सकता है।

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अंत में सवाल तो यह उठता है कि जिस आदमी के पास ऑक्सीजन सप्लाई करने का ज़िम्मा था और अगर समय रहते उसके बकाया पैसों का भुगतान नहीं हुआ था तो इसके चलते उसने मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सप्लाई रोक दी, बिना ये सोचे समझे की उसके द्वारा उठाये गए इस कदम से ना जानें कितने लोगों कि जान खतरे में हो सकती है. जैसा कि हुआ भी उसके एक कदम से 60 से भी ऊपर मासूम बच्चों ने अपनी जान गवां दी है.

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माना जा रहा है कि इस एजेंसी ने अस्पताल को एक पत्र लिखा था जिसमें उसने पैसे भुगतान न होनें की बात कही थी और साथ ही चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर पैसे नहीं दिए तो सप्लाई बंद कर दूंगा जिससे तुम्हारे अस्पताल के लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है. इसका मतलब इस शख्स को साफ़ साफ़ मालूम था कि उसके इस कदम से क्या नुक्सान होगा. सिर्फ इस एक आदमी की वजह से हमारे देश ने ना जानें कितने आने वाले भविष्य को खो दिया है और न जानें कितने घरों के चिराग को बुझा दिया है.

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