पहली बार सामने आया चोटी कटने का वीडियो, इस ‘खास धर्म’ से है इसका नाता !

वैधानिक चेतावनी: इस खबर को पढ़ने से पहले आप अपनी चोटी को पकड़कर रखें!

राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड समेत और भी कई ऐसे राज्य हैं जहां चोटी कटने जैसी भयावह ख़बरों ने अपना घर बनाया हुआ है. चोटी कटने की खबर से लोग इतने भयभीत हैं कि उनकी नींद गायब हो चुकी है. कही-कही इस खबर के दमपर अफवाह फ़ैलाने का काम हो रहा है तो कही मजाक में भी चोटी कट रही है. दिल्ली में ही एक ऐसा मामला सामने आया था जहां एक लड़की की चोटी काट दी गयी थी लेकिन जब पुलिस ने जांच की तो पता चला कि चोटी लड़की के भाईयों ने ही मजाक में काटा था. फ़िलहाल ये मजाकभर था लेकिन अब उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले से चोटी कटने का एक वीडियो सामने आया है जो आपको वाकई दहशत में डाल देगा.

दरअसल उत्तर प्रदेश में सुल्तानपुर जिले के नगर पंचायत कोइरीपुर में उस वक्त सनसनी फ़ैल गयी जब पता चला कि यास्मीन नाम की लड़की की चोटी काट दी गयी है. आपको बता दें कि यह घटना 10 जुलाई को सुबह 5 बजे के आसपास हुई. बताया जा रहा है कि यास्मीन सुबह 5 बजे उठी ही थी कि किसी ने उसकी चोटी काट दी. जिसके बाद वो जोर से चिल्लाई और आसपास के लोग इकट्ठा हो गये. यास्मीन की माँ का कहना है कि, ‘सुबह 5 बजे ही यास्मीन के चिल्लाने की आवाज आई तो हम लोग दौड़कर उसके पास गये तो यास्मीन रो रही थी और उसके बाल काटे जा चुके थे.’

वीडियो

इस घटना का वीडियो भी सामने आया है और जिसमें साफ-साफ दिखाई दे रहा है कि लड़की के बाल काटकर बेहद छोटे कर दिए गये हैं. मौके पर ‘हिंदुस्तान अख़बार’ के स्थानीय पत्रकार दिनेश शुक्ला ने जाकर पड़ताल की तो पता चला कि किसी चेहरे को देखकर लड़की सहम गयी और थोड़ी देर बाद पता चला कि उसके बाल कट चुके हैं. अब सवाल ये है कि आखिर कौन है जो लोगों के बाल काट रहा है और इसके पीछे की वजह क्या है? वैसे तो कुछ लोग इसे भ्रम या अन्धविश्वास से भी जोड़ रहे हैं लेकिन घटनाओं पर गौर करें तो कुछ और ही सामने नजर आता है.

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गौर करने वाली बात ये है कि अब तक जितनी भी घटनाएं घटी हैं, इनमें ज्यादातर मुस्लिम धर्म से ताल्लुक रखने वाली औरतें और लड़कियां हैं और ये बात ऐसे ही नही आंकड़ों के जरिये सामने आ रही है. इन आंकड़ों पर गौर करें तो 7 अगस्त की एक घटना है जिसमें उत्तराखंड में खुशनुमा, निसार और सद्दाम की पत्नी सोनी की चोटी काटी गयी. 7 अगस्त को ही  सहारनपुर में सरवरी,शेखपुर में कुर्बान और सलमा और बेहट में कनीज़ की चोटी काटी गयी. 8 अगस्त को उत्तर प्रदेश के नकटपुरा में फरहाना, और नजमा की चोटी काटी गयी और अब 10 अगस्त को सुल्तानपुर में यास्मीन की चोटी काटी गयी. उदाहरण और भी हैं लेकिन इनका इशारा हमें कहीं और ले जाता है.

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ऐसा नही है कि चोटी कटने की जितनी भी घटनाएँ हुई हैं, उसका शिकार सिर्फ मुस्लिम औरतें या लड़कियां ही हुई हैं, दूसरे धर्म की औरतें भी इसका शिकार हुई हैं लेकिन 80% से भी ज्यादा मुस्लिम महिलाएं ऐसी घटनाओं का शिकार हुई हैं. ‘चोटी कटने’ के पीछे सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी ख़बरें भी फ़ैल रहीं है जो कहीं न कहीं आपको सोचने पर मजबूर करती हैं.

दरअसल ज्यादा घटनाएं मुस्लिमों के साथ होने की वजह से कहा जा रहा है कि मुस्लिम औरतों में डर पैदा किया जा रहा है जिससे वो इस्लाम द्वारा बताई गयी बातों पर ही चल सकें. ऐसा इसलिए क्योंकि इस्लाम में फैशन करना और बेपर्दा होना और सर खुला रखना हराम माना जाता है. सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि मोदी सरकार में फतवा जारी करने वाले मौलवियों की दुकाने बंद होने लगी हैं.

कहा जा रहा है कि तीन तलाक के मामले में मुस्लिम औरतों को इस सरकार में बल मिल रहा है और फतवा जारी करने वाले मौलवी कुछ कहने से बच रहे हैं इसलिए उन्होंने ये अलग तरीका अपनाया है. कहा जा रहा है कि इस तरीके में वो मुस्लिम औरतों में डर पैदा किया जा रहा है जिससे वो आधुनिकरण को न अपनाएं और इस्लाम के तौर-तरीके से जियें.

अब चोटी कटने के पीछे वजह कुछ भी हो लेकिन जिस तरीके से लोग डर के साये में जी रहे हैं वो वाकई भयावह है. उम्मीद है कि अब आगे से किसी की चोटी कटने की खबर नही आये.

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