आये दिन उग्र भीड़ द्वारा हो रही हत्याओं को एक “खास धर्म” से जोड़ने पर भड़क गये परेश रावल और सिखा दिया पाठ!

देश में आये दिन उग्र भीड़ द्वारा हत्याएं हो रही हैं और कुछ लोग उन्हें अपनी राजनीति का साधन बना रहे हैंl कुछ लोग ऐसी घटनाओं का आरोप सीधा सरकार पर मढ़ रहे हैं तो कुछ कह रहे हैं कि इस सरकार में गुंडों का मनोबल बढ़ गया हैl इतना ही नही कुछ लोगों ने हद पार करते हुए ये भी आरोप लगाया कि भीड़ में शामिल लोग एक खास धर्म के लोग हैं जो मोदी सरकार में किसी से नही डर रहे हैंl आपको बता दें कि एक्टर और भाजपा सांसद परेश रावल ने देश में भीड़ द्वारा की जा रही हत्याओं को एक धर्म विशेष से जोड़ने पर अपनी कड़ी नाराजगी जताई और उन लोगों की जमकर क्लास ली है l उन्होंने कहा है कि अगर आतंक का कोई धर्म नही होता तो भीड़ द्वारा की जा रही हत्याओं में एक धर्म विशेष के लोग कैसे हो सकते हैंl 

परेश रावल ने इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी ट्विटर पर दिखाई और ट्वीट करते हुए लिखा कि “आतंकियों का कोई मजहब नहीं होता है लेकिन हत्या करने वाली भीड़ का धर्म होता है।” परेश रावल ने शेक्सपीयर की प्रसिद्ध पंक्ति को भी ट्वीट करते हुए लिखा कि “नाम में क्या रखा है।” बस फिर क्या, परेश रावल के इस ट्वीट के बाद ट्वीटर पर लोगों को ने अपनी खुलकर प्रतिक्रिया दीl

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आपको बता दें कि परेश रावल ने इसके पहले भी देश से जुड़े मुद्दों पर अपनी बेबाकी से राय रखी है और लोगों ने उसपर भी अपनी प्रतिक्रिया दी है लेकिन इस बार परेश रावल ने जो कहा वो वाकई सोचने योग्य हैl

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वैसे परेश रावल की बात पर गौर किया जाय तो आप खुद सोचियेगा कि जब कही भी कोई आतंकी हमला होता है तो कई लोग अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहते हैं कि हमलावर किसी धर्म को मानने वाले नही हैं और उनका किसी भी धर्म से कोई वास्ता नही है, क्योंकि वो हिंसा करते हैं और कोई भी धर्म हिंसा करने की आज़ादी नही देता, लेकिन वहीं जब किसी और धर्म से जुड़े लोग हिंसा में शामिल पाए जाते हैं तो उनकी राय बदल जाती है और उन्हें धर्म के चश्मे से देखा जाता है और उन्हें निशाना बनाकर अपने फायदे की बात करते हैंl

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परेश रावल के ट्वीट “अगर आतंक का कोई धर्म नही होता तो भीड़ द्वारा की जा रही हत्याओं में एक धर्म विशेष के लोग कैसे हो सकते हैं” के बाद काफी लोगों ने जवाब दिया जिनमें से एक यूजर ने दादरी और गाज़ियाबाद की घटना को लेकर तुलना करते हुए बताने की कोशिश कि दिल्ली से दादरी 50 किमी. की दूरी पर है और वहां अखलाक़ की मौत पर सारे नेता पहुंच गये लेकिन दिल्ली से 15 किमी की दूरी पर स्थित गाज़ियाबाद में सिंघासन यादव की मौत पर कोई नही जाताl

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सचिन शर्मा नाम के यूजर ने परेश रावल का समर्थन करते हुए लिखा कि “वाह सर जी, क्या उत्तर दिया है, हमें आप पर गर्व है क्योंकि आप बिना डर के अपनी बात रखते हैंl”

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प्रभाकर सिंह नाम के एक यूजर ने लिखा कि “कश्मीरी  हिंदुओ का सब कुछ छिन गया फिर भी वे आतंकी नहीं बने, वहीँ मुसलमानों को सब कुछ दिया गया फिर भी वो आतंकी बन रहे|”  वाकई ये सभी बातें सोचने पर मजबूर करती हैं कि आखिर किसी घटना को किसी धर्म से क्यों जोड़ते हैं लोग और अगर ऐसा ही सही है तो सभी घटनाओं पर करना चाहिएl

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