सत्ता से बाहर जाने के बाद लालू गये थे हाईकोर्ट , जिसके बाद आया ऐसा फैसला जो कर देगा सबको..

बिहार की सत्ता से काफी दिनों तक बाहर रहने के बाद फिर एक बार लालू के परिवार को सत्ता में बैठने का मौका मिला था. लेकिन कहा जा रहा है कि लालू के पुत्र मोह ने उन्हें सत्ता से बेदखल करा दिया.  नीतीश कुमार से गठबंधन बना कर महागठबंधन के सहयोग से सत्ता में वापसी करने वाले लालू यादव इस समय झटके पर झटके खा रहे है. काफी सालों बाद सत्ता में वापसी करने के बाद लालू और उनका परिवार खुश था दोनों बेटे सरकार में अच्छी और महत्वपूर्ण कुर्सियों पर बैठ भी गये. लेकिन लालू के परिवार की ख़ुशी ज्यादा दिन टिक नही पाई. आखिरकार नीतीश कुमार ने लालू का साथ छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गये इसके बाद अब मिला लालू को दूसरा झटका!

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दरअसल जब नीतीश कुमार ने अचानक से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देकर लालू समेत पूरी रजद को परेशान कर दिया. नीतीश के इस्तीफ़ा देते ही लालू भड़क गये और उन्होंने नीतीश पर आरोपों की बौछार लगा दी.लेकिन अगले दिन नीतीश ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली. तो लालू और आरजेडी के नेता और भी भड़क गये. राज्यपाल द्वारा नीतीश कुमार को सरकार बनाने के लिए बुलाए जाने के विरोध में कोर्ट में एक याचिका भी डाली गयी थी.इस याचिका को आरजेडी के एक नेता ने ही कोर्ट में दी थी. याचिका में कहा गया कि राज्यपाल द्वारा नीतीश कुमार को सरकार बनाने के लिए बुलाना नियमों की अनदेखी है.

 

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इस याचिका के दायर किये जाने के बाद तमाम तरह की अटकले लगायी जा रही थी. लेकिन सोमवार को कोर्ट ने इससे जुडी दो याचिकाओं को खारिज कर दिया जिसके बाद लगायी जा रही सभी अटकलों पर विराम लग गया. इस याचिका के खारिज होने के बाद ही लालू यादव समेत आरजेडी के नेताओं को बड़ा झटका लगा है. नीतीश कुमार से गठबंधन टूटने के बाद लालू यादव इस सब से कितने समय में संभल पायेंगे ये देखने वाली बात है. वैसे सत्ता गंवाने की पीड़ा तो आरजेडी सुप्रीमों लालू यादव के छोटे बेटे तेजस्वी में भी देखी जा सकती है.

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कई सारी पार्टियों ने मिलकर मोदी के खिलाफ एकजुट होने के लिए महागठबंधन बनाया था. 2013 में मोदी का नाम प्रधानमंत्री के उम्मीद्वार के रूप में सामने आने से नीतीश कुमार ने बीजेपी से गठबंधन तोड़कर महागठबंधन में शामिल हो गये थे और कांग्रेस, आरजेडी के साथ मिलकर सरकार बना ली थी. लेकिन अब फिर महागठबंधन छोड़कर बीजेपी के साथ आ गये. आरजेडी और कांग्रेस को बीच रास्ते में छोड़ देने से दोनों ही पार्टियां को बड़ा झटका तो लगा ही है और दोनों बौखला गयी है.

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आपको बता दें कि आरजेडी के लगातार विरोध के बावजूद नीतीश ने बीजेपी के साथ मिलकर 27 जुलाई को शपथ ग्रहण किया था.सरकार के गठन के खिलाफ आरजेडी नेता सरोज यादव  और अन्य ने दायर की थी जबकि दूसरी याचिका समाजवादी पार्टी के नेता जितेन्द्र कुमार ने दायर की थी. आरजेडी कार्यकर्त्ता ने राज्यपाल के फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा गया कि सबसे बड़ी पार्टी आरजेडी होने के बावजूद हमें नही बुलाया गया.लेकिन इसमें नियमों की अनदेखी कर नीतीश कुमार को बुलाया गया.

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