पीएम मोदी ने सांसदों को लिया निशाने पर और दी ऐसी चेतावनी कि सांसदों के छूट गए पसीने

पीएम मोदी ने अपना कार्यकाल संभालते ही दल के नेताओं को संदेश दे दिया था कि वो किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेंगे. पीएम मोदी का कार्यकाल शुरू होते ही नेताओं से लेकर नौकरशाह तक सब समझ गए थे कि अब लेटलतीफी और लापरवाही की उन्हें बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है. पीएम मोदी ने जब से अपना कार्यकाल शुरू किया है तब से व्यवस्था में सुधार आया भी है. इन सुधारों के बीच भी कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन को लेकर पीएम अब भी चिंतित हैं. इस चिंता को जाहिर करते हुए उन्होंने एक बैठक के दौरान अपनी बातें रखीं.

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पीएम मोदी ने बोले तीखे बोल

गुरुवार को संसद में भाजपा संसदीय पार्टी की बैठक हुई जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी शामिल हुए. संसदीय पार्टी की इस बैठक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया. इस बैठक के दौरान पीएम मोदी ने अपने सांसदों पर तीखे बोल बोले उन्होंने संसद से गैरहाजिर रहने वाले सांसदों की जमकर क्लास लगाई.

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पीएम मोदी ने कहा अब मोज-मस्ती के दिन बंद 

एक टीवी चैनल की मानें तो, पीएम मोदी ने सदन में सांसदों की उपस्थिति को उठाया और कहा कि, सांसदों को सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी चाहिए. उन्होंने आगे सांसदों पर तंज कसते हुए कहा कि अध्यक्ष अब राज्यसभा में आ गए हैं, आप लोगों के मोज-मस्ती के दिन अब बंद हो जाएंगे.

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सांसदों की अटेंडेंस पर भी पीएम हुए नाराज़ और दी चेतावनी

पीएम मोदी ने अटेंडेंस को लेकर भी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा, ‘आप लोग अपने आपको क्‍या समझते हैं,मैं और आप कुछ नहीं हैं, जो है वह बीजेपी है पार्टी है. बार-बार व्‍िहप क्‍यों देना पड़ता है, आपलोगों को जो करना है करिए मैं 2019 में देखूंगा.‘  

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उपराष्ट्रपति चुनाव में भी कई सांसद थे नदारद

आपको बता दें कि उपराष्ट्रपति चुनाव में भी 14 सांसद उपस्थित नहीं थे. इन अनुपस्थित सांसदों में भाजपा के दो, कांग्रेस के दो, TMC के चार, IUML के दो व पीएमके और एनसीपी के एक-एक सांसद व दो निर्दलीय सांसद भी थे. पीएम मोदी को सदन में सांसदों के न आने से नाराजगी थी.

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पीएम मोदी देश की व्यवस्था में सुधार करना चाहते हैं और इसीलिए वो विदेशों से भी रिश्ते बेहतर कर रहे हैं. वो चाहते हैं कि भारत में भी दुनिया के विकसित देशों जैसा माहौल हो यहाँ भी साफ़-सफाई हो और भारत की छवि सुधरे. इस काम को अंजाम तक पहुंचाने के लिए जरुरी है कि भारत के राजनेता अपनी जिम्मेदारियों को समझें. वो इस तरह के काम न करें जिससे देश की जनता को गलत संदेश मिले. इसीलिए उन्होंने सांसदों को चेतावनी दी कि वो सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज करें.

 

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