अपने विदाई भाषण के दौरान प्रणव मुखर्जी ने इस नेता का नाम लेकर वहां बैठे सभी बीजेपी नेताओं को हैरान कर दिया!

24 जुलाई को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का कार्यकाल ख़त्म हो गया है. प्रणव मुखर्जी राष्ट्रपति बनने से पहले कांग्रेस के एक बड़े नेता थे. कांग्रेस सरकार सत्ता में जाने के बाद अब देश में मोदी सरकार यानी बीजेपी की सरकार है.मोदी हाल ही  में राष्ट्रपति को अपने पिता का दर्जा भी दे चुके है और यह कहते हुए नरेन्द्र मोदी भावुक भी हो गये थे. अगर देखा जाए तो राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी मोदी सरकार को समर्थन और सहयोग करते हुए अपनी कुर्सी की मर्यादा बनाए रखा. राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का भी सभी ने सम्मान रखा.

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लेकिन 24  जुलाई को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी अपने विदाई समारोह में भरी सभा में कुछ ऐसा कर दिया जिससे मोदी समेत सभी बीजेपी के नेता सन्न रह गये. सेंट्रल हाल में हो रहे विदाई समारोह में देश के तमाम बड़े नेता मौजूद थे. ऐसे में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी अपना विदाई भाषण दे रहे थे जो लिखा हुआ था राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी देश के सभी पूर्व बड़े नेताओं को याद कर रहे थे जिन्होंने देश को आगे बढ़ने में अपना योगदान दिया है.

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इसी बीच राष्ट्रपति ने सोनिया गांधी के नाम ले लिया जो उनके भाषण में लिखा नही था.जब राष्ट्रपति ने सोनिया गाँधी का नाम लिया तो लगभग सारे भाजपाई हैरान रह गये. हालाँकि हैरान करने वाली और बड़ी बात ये भी थी कि राष्ट्रपति ने अपने भाषण में कई पूर्व नेताओं को याद किया पर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का कहीं भी जिक्र नही किया| राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि समावेशी समाज का निर्माण विश्वास का एक विषय होना चाहिए|

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राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि ”मै आपके साथ कुछ सच्चाइयों को साझा करना चाहता हूँ जो मैंने इस अवधि के दौरान आत्मसात किया है| भारत की आत्मा ,बहुलवाद और सहिष्णुता में बसती है| भारत केवल एक भौगोलिक सत्ता नही है| इसमें विचारों दर्शन, बौद्धिकता, औद्योगिक प्रतिभा, शिल्प नवान्वेषण और अनुभव का इतिहास शामिल है|सदियों के दौरान, विचारों को आत्मसात करके हमारे समाज का बहुलवाद निर्मित हुआ है| हमें सहिष्णुता से शक्ति प्राप्त होती है|

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आगे उन्होंने कहा कि सहिष्णुता से हमें ताकत मिलती है| जन संवाद के विभिन्न पहलू हैं| हम तर्क वितर्क कर सकते है हम सहमत हो सकते है या सहमत नही हो सकते है| पर हम विविध विचारों की आवश्यक मौजूदगी को नही नकार सकते अन्यथा हमारी विचार प्रक्रिया का मूल स्वरूप नष्ट हो जाएगा| सहानुभूति की क्षमता हमारी सभ्यता की सच्ची नींव है| परंन्तु हम अपने आस-पास बढती हुई हिंसा देखते है| इस हिंसा कि जड़ में अज्ञानता,भय और अविश्वास है| हमें अपने जन संवाद को शारीरिक और मौखिक रूप से हिंसा मुक्त करना होगा| एक अहिंसक समाज ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगो के सभी वर्गों,विशेष कर वंचित और पिछड़ों की भागीदारी सुनिश्चित कर सकता है|

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यह सब बाते प्रणव मुखर्जी अपने विदाई समारोह के दौरान संसद भवन के सेन्ट्रल हाल में कही| आज देश के अगले राष्ट्रपति के तौर पर रामनाथ कोविंद शपथ लेने वाले है| सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस टी एस खेहर रामनाथ कोविंद को सेंट्रल हाल में प्रणव मुखर्जी के मौजूदगी मे चौदहवें राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाएंगे|

 

 

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