रामनाथ राष्ट्रपति तो बन गये लेकिन उनके शपथ ग्रहण समारोह में आने वाली है ये बड़ी परेशानी, सरकार ने खुद कहा..

काफी समय से देश में एक ख़बर ने सुर्ख़ियों में लगातार अपनी जगह बनाये हुए थी और वो ख़बर थी देश में होने वाले अगले राष्ट्रपति चुनाव की. नामांकन हुआ तो राष्ट्रपति चुनाव के लिए दो प्रबल दावेदारों के नाम सामने उभर कर आये. एक मीरा कुमार का तो दूसरा रामनाथ कोविंद का. देश में कई दिनों से चली उठा-पटक के बीच अंततः गुरुवार 20 जुलाई को भारी मतों से जीता कर रामनाथ कोविंद को देश का अगला राष्ट्रपति चुना जा चुका है. हालाँकि एनडीए ने जिस वक़्त से राष्ट्रपति पद के लिए रामनाथ कोविंद का नाम सुझाया था वो तभी से सुर्ख़ियों में आ गए थे. लेकिन अब उनकी भारी मतों से जीत के बाद ये देखना दिलचस्प होगा कि अब रामनाथ कोविंद अपनी इस ज़िम्मेदार को कितने बखूबी निभाते हैं.

जीत के बाद अब भारत के लिए 14 वें राष्ट्रपति के रूप में रामनाथ कोविंद 25 जुलाई को संसद के सेंट्रल हॉल में शपथ लेंगे, जिसकी तैयारियां पूरी हो चुकी है. आपको बता दें कि मंगलवार 25 जुलाई को दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर संसद सेन्ट्रल हॉल में रामनाथ कोविंद का शपथ ग्रहण समारोह होना है।

रामनाथ कोविंद देश के 14 वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे लेकिन आपको बता दें कि यह शपथ ग्रहण समारोह सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया है. क्योंकि जिस सेन्ट्रल हॉल में राष्ट्रपति कोविंद शपथ लेने वाले हैं उस हॉल में जगह कम है और लोग ज्यादा आने वाले हैं.

वैसे तो पीएम मोदी इस बार राष्ट्रपति कोविंद के शपथ ग्रहण समारोह को मेगा इवेंट बनाना चाहते हैं. जिसके लिए केन्द्र सरकार ने सभी के लिए एक संदेश ज़ारी किया है जिसमें कहा गया है कि इस महेत्वपूर्ण कार्यक्रम में देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों को न्योता दिया गया है इसके साथ ही देश के सभी राज्यों के सांसदों, केन्द्रीय मंत्रियों को भी इस कार्यक्रम में बुलाया गया है.

इस कार्यक्रम में देश के कई वीआईपी लोग भी शामिल रहेंगे जिस वजह से सेंट्रल हॉल में जगह की कमी पड़ रही है. इस समस्या का समाधान निकालते हुए सरकार ने निमंत्रण पत्र में साफ़ लिखा हुआ है कि जो भी लोग इस समारोह में आने वाले हैं वे लोग कृपया करके अपने साथ अपने पति या पत्नी को लेकर ना आएं.

साथ ही सरकार ने अपनी सफाई पेश करते हुए यह भी लिखा हुआ है कि सरकार अपनी तरफ से इस तरह के नियम नहीं बना रही है बल्कि सरकार ऐसा काम पहले से चली आ रही प्रथा के मुताबिक कर रही है और साथ ही इसके अलावा सेन्ट्रल हॉल में जगह की भी कमी होना बहुत बड़ा विषय है.

आपको बता दें कि इतने बड़े पैमाने पर शपथग्रहण करवाने का फैसला कुछ ही दिन पहले लिया गया है. इसलिए सरकार को जब यह लगा कि इतने कम समय में सभी राज्यों तक निमंत्रण पत्र भेजना संभव नहीं हो पाएगा तो उन्होंने तय किया कि दिल्ली में बैठे सभी राज्यों के रेजिडेंट कमिश्नर को निमंत्रण पत्र सौंप दिया जाए.

 

कैसे पूरी होती है राष्ट्रपति शपथग्रहण की प्रक्रिया…

 

हम आपको बता दें कि राष्ट्रपति का शपथग्रहण समारोह एक प्रोटोकॉल के अंतर्गत होता है. जिसके मुताबिक शपथ ग्रहण वाले दिन की सुबह सुबह भावी राष्ट्रपति पहले राष्ट्रपति भवन पहुंचते हैं, जिस दौरान राष्ट्रपति के सचिव उन्हें एस्कॉर्ट करते हैं और वहां भावी राष्ट्रपति और वर्तमान राष्ट्रपति अपने काफिले के साथ संसद भवन पहुंचते हैं.

इस दौरान पूर्व राष्ट्रपति और वर्तमान राष्ट्रपति दोनों ही एक ही कार में सफर करते हैं. जिसके बाद संसद में दोनों सदनों के प्रजाइडिंग ऑफिसर यानी की लोकसभा के स्पीकर और राज्यसभा के उपराष्ट्रपति उन्हें एस्कॉर्ट करते हैं और उन्हें सेन्ट्रल हॉल तक ले जाते हैं। इसके बाद शपथ ग्रहण की प्रक्रिया शुरू होती है.

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