RBI ने लांच किया नया 500 का नया नोट, ऐसे करें नए और पुराने नोट की पहचान

ज्ञात हो कि PM मोदी द्वारा 8 नवम्बर 2016 को नोटबंदी का फैसला लिया गया था जिसके अंतर्गत 500 और 1000के पुराने नोटों को बंद कर दिया गया था. इस फैसले के बाद कुछ नेताओं ने उनके इस फैसले को ‘तानाशाही फरमान‘ तक कह डाला था. एक समय ऐसा भी आ गया था कि बैंक कि लाइन में लगे किसी बुजुर्ग की यदि किसी गंभीर बीमारी से मृत्यु हो जाती तो उसका दोषी भी PM मोदी को ही ठहराया जाता.

source

नोटबंदी एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही बड़े बड़ों के होश उड़ जाते हैं, भारत में मोदी सरकार ने नवम्बर 2016 में नोटबंदी की थी और पूरे देश को चौंका दिया था. लेकिन अब तक यह पता नहीं लग सका है कि आखिर नोटबंदी में कितना काला धन पकड़ा गया था. लेकिन वहीँ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कुछ ऐसा फरमान सुनाया है जिसे सुनते ही हर कोई दंग रह जानें वाला है.

source

जी हाँ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पांच सौ रुपये का नया नोट लांच किया है. बैंक का कहना है कि घबराने की ज़रूरत नहीं है बल्कि इस नए नोट के आ जानें से बाज़ार में चल रहे पुराने नोटों में कोई फर्क नहीं पड़ेगा. बैंक का कहना है कि यह नया नोट पुराने नोट से थोड़ा अलग है.

SOURCE

सूत्रों की मानें तो बाज़ार में आ रहे नए पांच सौ के नोट में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है. बस इतना ही है कि जहां नंबर पैनल होता है उस जगह पर अंग्रेजी में ‘A’ लिख दिया गया है, रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल के हस्ताक्षर भी होंगे, नोट के पिछली तरफ नोट जारी करने का वर्ष 2017 भी दर्ज होगा.

source

जब पीएम मोदी ने खुद बताया इंदिरा गांधी के दौर में भी नोटबंदी का प्रस्‍ताव आया था लेकिन कांग्रेस ने…

नोटबंदी का फैसला एक ऐसा फैसला है जो चौतरफ़ा विरोध के बाद भी भारत के इतिहास में सबसे सफल फैसलों में से एक है. इस फैसले के बाद जहां बड़े-बड़े अर्थशास्त्रियों को डर था कि भारत की अर्थव्यवस्था कमजोर हो जाएगी वहीं इस फैसले के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है. इस फैसले का श्रय पूरी तरह से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं नोटबंदी का प्रस्ताव कांग्रेस काल में इंदिरा गाँधी के समक्ष भी रखा गया था ?

source

दरअसल पीएम नरेंद्र मोदी ने बीजेपी की एक संसदीय दल की बैठक में कहा था कि इंदिरा गांधी के दौर में भी नोटबंदी का प्रस्‍ताव आया था लेकिन कांग्रेस इसे लागू करने का हिम्‍मत नहीं जुटा पाई थी. उस दौर में वरिष्‍ठ नौकरशाह निरंजन नाथ वांचू कमेटी ने इसे लागू करने की सिफारिश की थी. उसके बाद उस प्रस्‍ताव को तत्‍कालीन वित्‍त मंत्री वाईबी चव्‍हाण प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पास लेकर गए लेकिन इंदिरा गांधी ने उनसे कहा.

source

नोटबंदी के प्रस्ताव को लेकर इंदिरा गांधी ने कहा, क्‍या अब कांग्रेस को आगे चुनाव नहीं लड़ना है? 

दरअसल कांग्रेस को इस निर्णय के लागू होने की स्थिति में चुनाव में खामियाजा भुगतने का डर था. लिहाजा इंदिरा गांधी ने इस प्रस्‍ताव को खारिज कर दिया और फिर इसे लागू नहीं किया गया.

source

उल्‍लेखनीय है कि आठ नवंबर की नोटबंदी की घोषणा के बाद से कांग्रेस लगातार सरकार को इस मोर्चे पर घेर रही है.  इसी पृष्‍ठभूमि में पीएम मोदी ने भाषण में यह भी कहा कि कांग्रेस के लिए देश नहीं दल सबसे ऊपर है और इसीलिए वे इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं लेकिन भाजपा के लिए देश सबसे ऊपर है.

source

मोदी सरकार के इन्हीं क़दमों का असर है कि आज यूपी में भी बीजेपी आ गई है. नोटबंदी जैसा फैसला लेना कोई आसान बात नहीं है, वो भी ऐसे देश में जहां जनता विरोध की भाषा ज्यादा आसानी से समझती है लेकिन पीएम मोदी ने हर कदम पर जनता का विश्वास जीतकर भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है.

Facebook Comments