ऐसा क्या हुआ जो अमरनाथ यात्रा में घायल हुए इस जोड़े ने सरकार से मुआवज़ा लेने से कर दिया इंकार ?

अमरनाथ यात्रा में घायल हुए जोड़े ने पेश की मिसाल 

अमरनाथ में हुए हमले के बाद सरकार ने पीड़ितों के परिवारों को 4 लाख तक की आर्थिक सहायता करने का ऐलान किया. इसी सिलसिले में एक ऐसा वाकया सामने आया जिसे सुनकर आप भी सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि क्या आज के दौर में भी ऐसे लोग मौजूद हैं. दरअसल बिलिमोरा के एक रिटायर्ड जोड़े ने सरकार द्वारा दी जा रही मदद की राशि को ठुकरा दिया. उन्होंने राज्य सरकार को एक चिट्ठी लिखी और उसमें साफ़-साफ़ कह दिया कि वो अपने इलाज़ का खर्च खुद उठा सकते हैं और वो प्रशासन पर बोझ नहीं बनना चाहते.PKOLM

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नटवरभाई पटेल ने याद किया वो दिन 

65 वर्षीय नटवरभाई पटेल और 60 वर्षीय उनकी पत्नी सुशीलाबेन पटेल बिलिमोरा में रहते हैं. वो अमरनाथ यात्रा पर गए थे जहाँ 10 जुलाई को आतंकवादियों द्वारा बस पर हुए हमले में वो भी इसके चपेट में आए थे और घायल हो गए थे. इस घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा, ‘ हम बस की चौथी सीट में बैठे हुए थे ठीक उसी समय आतंकियों ने बस पर हमला बोल दिया.  हम भाग्यशाली रहे कि जो हमें थोड़ी सी चोटें आईं और हम बच गए.’ उन्होंने आगे बताया, ‘ प्रदेश सरकार ने एक अधिकारी के द्वारा हमारे घर 2-2 लाख रूपए की सहायता राशि भेजी थी.’

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जब इस जोड़े ने कह दिया कि, हमें मुआवज़े की कोई आवश्यकता नहीं है

आपको बता दें कि नटवरभाई सिंडिकेट बैंक में ऑफीसर थे और अब रिटायर्ड हो चुके हैं. उन्होंने बताया कि हमने अधिकारी से कहा था कि वो मुआवज़ा पाने वालों की सूची से हमारा नाम हटा दें. इस संबंध में उन्होंने सरकार को एक पत्र भी लिखा था. उनकी पत्नी भी भारतीय स्टेट बैंक में काम कर चुकी हैं. उन्होंने कहा कि, ‘हम गंभीर रूप से घायल नहीं हुए हैं और हमें मुआवज़े की आवश्यकता नहीं है. हम अपनी देखभाल खुद कर सकते हैं. हम दोनों ही पेंशन पाते हैं. हमारा बेटा ऐअर इंडिया में पायलट है, फिर हमें सरकार से मदद की क्या आवश्यकता है.

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आगे उन्होंने कहा कि, ‘ सरकार ने हमारी चिकित्सकीय मदद की है और इसके साथ ही हमें घर तक भी सुरक्षित छोड़ा है तो हमारी भी ये जिम्मेदारी बनती है कि हम सरकार पर अतिरिक्त बोझ ना डालें जब हमें इसकी आवश्यकता ही नहीं है.’ उनके इस बयान को सुनकर उन लोगों को ज़रा सोचना चाहिए जो बेवजह सरकार से मुआवज़ा मांगते रहते हैं. इस दम्पति ने बता दिया कि नागरिकों की भी सरकार के प्रति कोई ज़िम्मेदारी बनती है.

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आपको बता दें कि अमरनाथ हमले में मारे जाने वाले लोगों की संख्या अब सात से बढ़कर आठ हो गई है. अमरनाथ यात्रा पर जा रहे तीर्थयात्रियों की बस पर 10 जुलाई की शाम को अनंतनाग में हमला हुआ था जिसमें करीब 7 लोगों की जान चली गई थी और 18 लोग बुरी तरह से घायल हो गए थे.

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अब तक मिली जानकारी के अनुसार पता चला है कि पाकिस्तान के आतंकी अबू इस्माइल के आतंकी समूह के कुछ लोगों ने इस नापाक घटना को अंजाम दिया. इस आतंकी हमले की जांच के लिए पुलिस द्वारा SIT भी गठित की जा चुकी है. इस यात्रा पर आए तीर्थयात्रियों में से लगभग डेढ़ लाख ने दक्षिण कश्मीर में गुफा के दर्शन कर लिए हैं. 40 दिनों तक चलने वाली ये तीर्थयात्रा सात अगस्त को खत्म हो जाएगी और यात्री अपने-अपने घरों को वापस आ जाएंगे.

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