कांग्रेस के लिए बड़ा झटका, इस दिग्गज नेता के बेटे ने छोड़ी कांग्रेस पार्टी, थाम लिया बीजेपी का दामन !

2019 लोकसभा चुनाव होने में अब कुछ महीने बाकी हैं, इसको लेकर जहां बीजेपी मोदी सरकार के दम पर मैदान में उतरने जा रही है, वहीं विरोधी महागठबंधन बनाने की जुगत में लगे हैं. कांग्रेस भी इस महागठबंधन में अपनी जगह और अपनी जरूरत तलाश रही है. हालाँकि महागठबंधन में पहले से सक्रिय दल कांग्रेस को लेकर कुछ असहज हैं. कुछ दलों का ये भी मानना है कि कांग्रेस अपने बलबूते चुनाव मैदान में उतरे, मतलब ये कि उन्हें कोई दल अपने साथ नहीं लेना चाहता. इन सबके बीच कांग्रेस के लिए एक और बुरी खबर सामने आ रही है जो कांग्रेस आलाकमान को परेशान कर सकती है.

पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी का ये स्वर्णिम काल चल रहा है (फोटो सोर्स-Jagran.com)

राहुल गाँधी के लिए ये बुरी खबर है

बता दें कि खबर गुजरात से है, गुजरात में एक बड़े नेता के बेटे ने कांग्रेस को छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है. इस खबर को जानने से पहले ये भी जानना जरूरी है कि गुजरात में बीते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हालत बीजेपी या यूँ कहें पीएम मोदी के आगे खस्ता हो गयी थी. इसके बाद अब कांग्रेस पार्टी को एक और झटका लगा है, जो पार्टी आलाकमान के लिए परेशानी का सबब बन सकता है.

अभी हाल ही में दो बड़े नेता कांग्रेस छोड़ चुके हैं

जी न्यूज़ के मुताबिक 14 जुलाई को कांग्रेस के बड़े नेता शंकर सिंह वाघेला के बेटे महेंद्र सिंह वाघेला ने कांग्रेस को छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया. इससे पहले कोली समाज के बड़े नेता कुंवरजी वावड़िया ने भी कांग्रेस छोड़ दिया था और भाजपा ज्वाइन कर लिया था.

शंकर सिंह वाघेला के बेटे महेंद्र सिंह वाघेला (फोटो सोर्स: जी न्यूज़)

महेंद्र सिंह ने तो कांग्रेस से पहले ही नाता तोड़ लिया था लेकिन..

ऐसे में जानने की बात ये भी है कि महेंद्र सिंह वाघेला ने पिछले विधानसभा चुनाव में ही कांग्रेस पार्टी को छोड़ दिया था लेकिन कोई दूसरी पार्टी नहीं ज्वाइन की थी, लेकिन अब उन्होंने बीजेपी में जाने का फैसला किया है. महेंद्र सिंह वाघेला गुजरात में बनासकांठा की बायड विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं.

शंकर सिंह वाघेला पीएम मोदी से मिलते हुए एक कार्यक्रम के दौरान(फोटो सोर्स: दैनिक भास्कर)

कौन हैं शंकर सिंह वाघेला

शंकर सिंह वाघेला ने अपनी राजनीतिक शुरुआत जनसंघ से की थी, हालांकि बाद में उन्होंने भाजपा छोड़ अपनी अलग पार्टी बना ली और फिर कांग्रेस की सहायता से गुजरात के मुख्यमंत्री बने. कुछ समय बाद शंकर सिंह वाघेला कांग्रेस में चले गये. UPA-I में वो केंद्र में मंत्री भी रहे, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव के ठीक पहले उन्होंने कांग्रेस पार्टी को छोड़ दिया.

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