सोशल मीडिया पर सरकार को नीचा दिखाने के लिए बोला गया झूठ हुआ बेनक़ाब, श्रेष्ठा सिंह के तबादले की असली वजह आई सामने!

अभी कुछ दिनों पहले आई एक खबर के मुताबिक बुलंदशहर की सीओ श्रेष्ठा ने ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले एक भाजपा नेता को जमकर लताड़ लगायी थी, और अब इस मामले से जुड़ी एक खबर के मुताबिक श्रेष्ठा सिंह को इस कदम के चलते भारी नुकसान उठाना पड़ गया है| दरअसल सोशल मीडिया पर फैली एक खबर के मुताबिक श्रेष्ठा सिंह को उनके इस कदम की वजह से भाजपा सरकार ने उनका तबादला कर दिया है लेकिन अब श्रेष्ठा सिंह के तबादले की असल वजह सामने आ गयी है|  इस वजह के सामने आते ही ये भी साफ़ हो गया है कि दरअसल ये सारा प्रोपोगेन्डा सिर्फ और सिर्फ सरकार को नीचा दिखाने के लिए रचा गया था और कुछ नहीं|

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क्या था पूरा मामला? 

वाकया उस वक़्त का था जब रौब में एक बीजेपी नेता ने ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कर दिया जिसके चलते उनपर ट्राफिक पुलिस ने चालान काट दिया, लेकिन भला नेता जी को चालान देना पड़े ऐसा कैसे हो सकता है? बस फिर क्या था चालान की टिकट देखते ही मानो नेता जी आपा खो बैठे|

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मामला बढ़ता देख खुद सीओ श्रेष्ठा को आना पड़ा था वहां

नेताजी के सर पर गलती के बावजूद ऐसा रुतबा चढ़ा जिसे उतारने फिर वहां महिला सीओ श्रेष्ठा को ही आना पड़ा| ये वाकया वाकई दुखद था क्योंकि जहाँ एक तरफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में कानून व्यवस्था दुरुस्त करने में लगे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे भी नेता हैं जिनकी चाहे कुछ भी कर लो दबंगई छूटने का नाम ही नहीं ले रही है|  अब इस मामले को देखकर तो ऐसा ही लग रहा था|

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चालान ना देने पर हुआ था बवाल

मामले की शुरुआत तब हुई थी जब स्याना में चेकिंग के दौरान जिला पंचायत सदस्या प्रवेश देवी के पति प्रमोद लोधी को पुलिस ने बिना हेलमेट और बिना कागजात के बाइक चलाते पकड़ लिया गया था| कानून तोड़ा था तो चालान तो लगना ही था लेकिन बजाय इसके कि वो चालान देकर अपनी गलती मान लेते वो तो उल्टा भड़क गए और हंगामा खड़ा कर दिया| मामला बढ़ता देख वहां सीओ स्याना श्रेष्ठा सिंह आयीं तो मंत्रीजी उनसे भी उलझ गए| बताया जा रहा है कि प्रमोद लोधी ने सीओ से भी अभद्रता की, जिसके बाद उनके खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में एफआईआर दर्ज कराकर गिरफ्तार कर लिया गया|

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तबादले का झूठा कारण किया जा रहा है सोशल मीडिया पर वायरल 

हर वक़्त केंद्र सरकार पर निशाना साधने वाली विपक्ष को इस मामले से मानो ब्रह्मास्त्र ही मिल गया हो| सीओ श्रेष्ठा सिंह के तबादले की खबर मिलना ही था कि ये झूठी खबर सोशल मीडिया पर फैला दी गयी कि श्रेष्ठा सिंह बीजेपी के नेता के साथ भिड़ीं थी जिसके चलते योगी सरकार ने उनका तबादला कर दिया था लेकिन क्या ये वाकई में सच है? तो हम आपको बता दें कि नहीं दरअसल ये महज़ सरकार को नीचा दिखाने की एक चाल है|

क्या है श्रेष्ठा सिंह के तबादले की असल वजह

श्रेष्ठा सिंह के तबादले की असल वजह कोई रंजिश नहीं बल्कि रूटीन ट्रान्सफर के तहत श्रेष्ठा सिंह का तबादला किया गया है| यहाँ हम आपको ये भी बताते चलें कि इस रूटीन ट्रान्सफर में सिर्फ श्रेष्ठा सिंह का ही नहीं बल्कि कई अन्य अधिकारियों का भी तबादला किया है, लेकिन भाजपा नेता के साथ उनकी भिडंत एक ताज़ा मुद्दा है जिसे निशाना बनाकर विपक्ष अपनी ही गन्दी राजनीति की रोटी सेंकने में लग गए|

हालाँकि इस मामले को एक नज़र में देखने से तो यही लगता है कि श्रेष्ठा सिंह का ये तबादला सिर्फ रंजिश के तौर पर हुआ है लेकिन इसकी सच्चाई कुछ और है| श्रेष्ठा सिंह के तबादले से कई लोग आहत दिखे| ऐसे में एक ट्विटर यूजर शैलेन्द्र नरेश ने जब ट्वीट कर के सीएम योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया तो बदले में मिला जवाब श्रेष्ठा सिंह के तबादले की असली वजह अपने साथ ले आया|

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शैलेन्द्र नरेश ने ट्विटर पर लिखा कि, ” योगी आदित्यनाथ अब समय आ गया है कि आप अपने MLA लोगों को काबू में रखिये और जाबांज पुलिस ऑफिसर जो उनके खिलाफ खड़े होने का दम रखते हैं उनका प्रोत्साहन बढ़ाईए| अब वक़्त आ गया है, या तो अब कोई फैसला लीजिये या जनता को अपना ये कदम समझिए|”

देखिये वीडियो: 

 

शैलेन्द्र नरेश के इस ट्वीट का जवाब देते हुए एक और ट्विटर यूजर ने उन्हें बताया कि, “ये कोई अलग बात नहीं है बस इसे मीडिया में तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है| श्रेष्ठा सिंह का ये तबादला एक रूटीन तबादला है| दरअसल यूपी सरकार ने 244 पुलिस उपाधीक्षकों (डीएसपी) का ट्रांसफर किया है और ट्रांसफर किए गए अफसरों की इस लम्बी लिस्ट में श्रेष्ठा सिंह का भी नाम शामिल हैं।

 

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