चलते शो में मौलाना की फिसली जुबान तो एंकर ने सुनाई ऐसी बात कि हर कोई रह गया दंग

भारत का राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् फिर से ख़बरों में आ गया है. भारत में कई लोग ऐसे हैं जो वंदे मातरम् को भी सम्मान की दृष्टि से नहीं देखते और भारत के राष्ट्रीय गीत पर भी राजनीति करना चाहते हैं. ख़बर आई है कि मद्रास उच्च न्यायालय ने पूरे तमिलनाडु के स्कूलों में हफ्ते में कम-से-कम दो बार राष्ट्रीय गीत यानि वंदे मातरम् गाना अनिवार्य कर दिया है.

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जब मौलाना ने गुस्से में में कह डाला दलाल 

न्यायालय के इस फैसले के बाद इस मुद्दे पर अब बहस शुरू हो गई है. एक टीवी डिबेट में जब इस मुद्दे पर बहस चल रही थी तो मौलाना साजिद राशिदी की बात पर शो के एंकर रोहित सरदाना बहुत नाराज़ हो गए. संघ द्वारा समर्थित संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के सदस्य डॉ गुलरेज शेख से मौलाना साहब की बहस छिड़ी तो धीरे-धीरे दोनों के बीच तनातनी बढ़ने लगी और इसके बाद डॉ शेख द्वारा कही गई एक बात पर मौलाना को इतना गुस्सा आ गया कि उन्होंने डॉ शेख को दलाल कह कर पुकारा दिया. उनके इतना कहते ही शो के एंकर रोहित सरदाना समेत पैनल में मौजूद सारे लोग भड़क गए.

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राम मंदिर को लेकर भी मौलाना ने बोली विवादित बात 

इसके बाद शो के एंकर रोहित ने मौलाना को तुरंत माफ़ी मांगने को कहा और बहस छोड़ने का फरमान सुना दिया. काफ़ी देर मौलाना को शो से बाहर रखा गया जब उन्होंने अपनी बात वापस ली और शब्दों पर ध्यान देने की बात की तो उन्हें वापस चर्चा में जोड़ दिया गया.

मौलाना ने कहा कि हिंदू धर्म से पुराना है इस्लाम 

इसके बाद फिर मौलाना ने राम मंदिर को लेकर भी टिप्पणी की जिसकी वजह से बहस एक बार फिर गर्मा गई और फिर डिबेट में आए लोग आपस में भिड़ने लगे. इसके साथ ही मौलाना ने ये भी कह डाला कि भारत में हिंदू धर्म से भी पहले से इस्लाम मौजूद है. उनकी इस बात को सुनकर रोहित सरदाना ने उन्हें स्पष्ट शब्दों में कहा कि अज्ञानता न दिखाएं.

अपने फैसले में कोर्ट ने कहा था कि अगर किसी व्यक्ति या संगठन को गीत गाने या बजाने में कोई परेशानी है तो उनसे जबरदस्ती नहीं की जाएगी वो इसके लिए बाध्य नहीं होंगे, बशर्ते उनके पास ऐसा करने का सही कारण होना चाहिए. न्यायाधीश ने कहा था कि, ‘इस देश के युवा आने वाले कल का भविष्य हैं और अदालत उम्मीद करती है और विश्वास करती है कि, इस आदेश को सही भावना की तरह से लिया जाएगा और इस महान देश के नागरिक इसे शब्दश: लागू भी करेंगे.’

वंदे मातरम् को लेकर बहस बहुत पुरानी है और अभी लगता नहीं है कि इसको लेकर कोई हल निकलेगा. भारत में कई ऐसे मुस्लिम हैं जो वंदे मातरम् शब्द को अपने मुंह से बोलना भी नहीं चाहते.

आप भी देखें वीडियो जिसमें मौलाना को एंकर ने सुनाई खरी-खरी

देखें वीडियो 

ताल ठोक के Live – देशभक्ति के लिए 'ऑर्डर-ऑर्डर' क्यों ? Rohit Sardana

Posted by Zee News English on 2017 m. liepa 25 d.

 

वंदे मातरम् का भारत की आज़ादी में भी बड़ा योगदान रहा है. देश के कई क्रांतिकारियों ने वंदे मातरम् बोलते हुए हँसते हुए भारत माँ के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी. वहीँ कुछ हिन्दू भी ऐसे हैं जो इसको लेकर अलग-अलग विचार रखते हैं. हमको ये समझना चाहिए कि राष्ट्र प्रतीकों को लेकर हमें राजनीति नहीं करनी चाहिए.

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