फोन पर दिलीप कुमार ने नवाज़ शरीफ से कहा, “मियां साहब, एक भारतीय मुस्लमान होने के नाते आपसे कह रहा हूँ कि ये युद्ध..”

आज से ठीक 18 साल पहले का आज का ही वो दिन था जब सन् 1999 में भारतीय सेना के शूरवीर जवानों ने पाकिस्तानियों की सेना पर फ़तह हासिल की थी. ऐसे में भला आज का दिन कौन सा भारतीय भूल सकता है? आज के दिन भारतीय सैनिकों ने कारगिल युद्ध में पाकिस्तानियों को मुंह की खिलाई थी और तब ही से हर वर्ष 26 जुलाई को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है. ये कहने वाली बात तो नही है कि इस युद्ध में भारत को जीत दिलाने का सबसे बड़ा श्रेय जाता है उन जवानों को जिन्होंने दुश्मन को एलओसी और टाइगर पॉइंट से खदेड़ते वक़्त अपनी जान की भी परवाह नहीं की.

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आज से ठीक 18 साल पहले करीब 18 हज़ार फीट की ऊंचाई पर जब ये जंग लड़ी जा रही थी तब इस जंग में 527 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे और लगभग 1363 जवान गंभीर रूप से घायल हो गये थे. ये युद्ध करीब 84 दिनों के लिए लड़ा गया था जिसके बाद भारत ने ये जंग जीत कर इतिहास कायम कर दिया था.

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जब कारगिल जंग को खत्म करने के लिए अटल जी ने नवाज शरीफ को फोन किया और उनकी बात एक्टर दिलीप कुमार से करवाई, जिसके बाद…

कारगिल युद्ध के दौरान एक वक़्त ऐसा भी आया था जब कारगिल जंग को खत्म करने के लिए अटल जी ने नवाज शरीफ को फोन किया और उनकी बात एक्टर दिलीप कुमार से करवाई थी. इस बात का जिक्र पाक के एक फॉरेन मिनिस्टर खुर्शीद कसूरी की बुक “नाइदर अ हॉक नॉर अ डव” में किया गया है. बताते हैं कि फोन पर इस तरह अचानक दिलीप कुमार की आवाज़ को सुनकर नवाज़ शरीफ चौंक गए थे. दरअसल हुआ यूँ था कि पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ ने अटल बिहारी वाजपेयी से दोनों मुल्कों के बीच छिड़े कारगिल युद्ध  पर अपना पक्ष रखने के लिए डेढ़ घंटे का समय मांगा था.

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खुर्शीद कसूरी की इस किताब में कुछ इस तरह से इस वाकये का वर्णन कुछ इस तरह किया गया है कि, “एक दिन नवाज़ शरीफ और नवाज शरीफ के तत्कालीन प्रिंसिपल सेक्रेटरी सईद मेहंदी एक साथ बैठे हुए थे जब अचानक से ही फोन बजता है. सईद फोन उठाकर कुछ बात करते हैं और नवाज शरीफ को बताते हैं कि, “सर, भारत से फोन है.

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भारत के पीएम अटल बिहारी वाजपेयी आपसे कुछ बात करना चाहते है.   फोन पर अटलजी नवाज शरीफ से  शिकायत के लहज़े में बोलते हैं कि, “ये क्या बात है नवाज़, एक तो आपने मुझे लाहौर बुलाया था, और उसके बाद भी मेरे देश के साथ ऐसा बर्ताव किया जा रहा है?”

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अटलजी की बात सुनकर बोले नवाज़ शरीफ कि…

अपनी हरकतों के बारे में इस तरह अचानक से अटल बिहारी वाजपेयी के मुंह से सुनकर नवाज़ शरीफ हैरान रह गए थे. अटल जी ने इस फोन कॉल पर नवाज़ शरीफ से कहा कि, ” यूँ तो लाहौर में बड़ी ही गर्मजोशी के साथ मेरा स्वागत किया गया था, लेकिन ये क्या नवाज़,  इसके बाद पाकिस्तान ने कारगिल को हथियाने में एक बार भी नहीं सोचा? ऐसा क्यों?

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 हड़बड़ाहट में बोले नवाज़, “अटल जी, मुझे नहीं पता आप किस बारे में बात कर रहे हैं”

फोन पर अटल जी की इस तरह की बात सुनकर नवाज़ हड़बड़ा जाते हैं और कहते हैं कि, “अटलजी ये आप क्या कह रहे हैं मुझे इसके बारे में कोई ख़बर नहीं है. मैं आपको आश्वासित करता हूँ कि मैं आर्मी चीफ जनरल परवेज़ मुशर्रफ से इस विषय पर बात कर के आपको सूचित करता हूँ.”  कसूरी की किताब में इस बात का ज़िक्र करते हुए बताया गया है कि नवाज शरीफ ने अटलजी को परवेज़ मुशर्रफ से बात करके जवाब देने के लिए डेढ़ घंटे का समय मांगा था.

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दिलीप कुमार की आवाज सुन चौंक गए थे नवाज

किताब में बताया गया है कि इससे पहले कि नवाज़ शरीफ और अटल बिहारी वाजपेयी जी की बात ख़त्म हो पाती अटल जी ने नवाज़ शरीफ से कहा कि, “फोन रखने से पहले रुकिए नवाज़ साब मुझे आपसे किसी और की बात करानी है.” इतना कह कर उन्होंने फोन दिलीप कुमार को थमा दिया.

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अचानक से दिलीप कुमार की आवाज़ सुनकर नवाज़ शरीफ चौंक गए थे. बता दें कि दिलीप कुमार मूलत: पाकिस्तान के पेशावर के रहने वाले  का असली नाम यूसुफ खान है और पाकिस्तान की जनता उनकी फिल्मों की मुरीद हैं.

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फोन पर दिलीप कुमार ने नवाज़ शरीफ से कहा..

फोन पर नवाज़ शरीफ से बात करते हुए दिलीप कुमार ने कहा, ” मियां साहब, ये क्या हो रहा है? आप तो हमेशा से ही पाकिस्तान और भारत के बीच अमन के सबसे बड़े हिमायती रहे हैं, ऐसे में ये जो कुछ भी हो रहा है मुझे आपसे इसकी उम्मीद तो कतई नहीं थी. दिलीप कुमार आगे बोलते हैं कि, ” एक भारतीय मुस्लिम होने के नाते मैं आपको (नवाज़ शरीफ) बताना चाहता हूं कि भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के चलते भारत के मुस्लिम खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं.

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भारतीय मुसलमान इस वक़्त इतना डरा हुआ महसूस कर रहे हैं कि वो तो अपना घर तक छोड़ने को तैयार हो गए हैं. ऐसा मत होने दीजिये, इस बिगड़ते हालात को जल्द-से-जल्द ठीक करने के लिए कुछ सोचिये.

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बुक में इस बात का ज़िक्र है कि, “प्रेसिडेंट परवेज मुशर्रफ के सामने ऐसे कई मौके आये जब उन्होंने ये साफ़ किया कि कारगिल ने इस बात को उजागर किया कि कश्मीर विवाद का हल ढूंढने की जरूरत है. जब वो ये तर्क देते हैं कि कश्मीर मुद्दे का हल ढूंढने के लिए जो मूवमेंट शुरू किया गया उसे आगे बढ़ाने में कारगिल कारगर हो सकता है, तब मुझे लगता है कि कारगिल ने पाकिस्तान को अलग-थलग कर दिया.

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 सीक्रेट चैनल से हुई थी बात

कसूरी ने अपनी किताब में इस बात का ज़िक्र किया है कि कारगिल युद्ध कई मायनों में अहम था इसलिए  इस दौरान बातचीत के लिए एक सीक्रेट चैनल बनाया गया था. इसमें विशेष राजदूत आरके मिश्रा, पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के एक ऐसे जनर्लिस्ट भी शामिल थे जिनपर अटल जी को भरपूर भरोसा था. साथ ही इसमे पूर्व पाकिस्तानी फॉरेन सेक्रेटरी नियाज ए. नाइक भी शामिल थे.  नियाज नवाज शरीफ की तरफ से इस बातचीत में हिस्सा ले रहे थे. वे लगातार इस मसले का हल ढूंढने के लिए पाकिस्तान और भारत के बीच यात्रा कर रहे थे.

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