गोरखपुर हादसे की खबर लगते ही पीएम मोदी ने योगी आदित्यनाथ को किया फोन जिसके बाद…

गोरखपुर में बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में उस वक्त कोहराम मच गया जब लगातार मासूम बच्चों की मौत होने की ख़बरें आने लगी. ख़बरों का सिलसिला ऐसे चलता रहा कि वो 12 अगस्त की सुबह तक 30 और दोपहर तक 63 तक चला गया. परिजन रोते बिलखते मेडिकल कॉलेज परिसर में दिखाई दे रहे थे लेकिन उनकी सारी उम्मीद जा चुकी थी. कहा जा रहा है कि ये हादसा नही एक हत्या है लेकिन कुछ तथ्य ऐसे भी हैं जिसपर सोचना जरुरी है. दरअसल इस मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन गैस देने का काम जिस एजेंसी के पास था उसने मेडिकल कॉलेज को नोटिस दिया था कि ‘आपका बकाया ज्यादा हो चुका है और ऐसे में हम गैस सप्लाई रोक सकते हैं.’

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आपको ये जानकर हैरानी होगी की तीन दिन पहले ही यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वहाँ का दौरा किया था. वैसे अमूमन देखा जाता है कि जब कोई बड़ा अधिकारी, मंत्री या मुख्यमंत्री कोई दौरा करता है तो सम्बंधित विभाग सारी चीजें दुरुस्त दिखाने की कोशिश करता है. तो ठीक इस बार भी यही हुआ कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामनें सब कुछ अच्छा दिखा दिया कि मानों सब ठीक चल रहा हो.

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प्रदेश के मुख्यमंत्री के दौरे के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने कोई सुधार नहीं किया उनका लापरवाही भरा रवैया जैसा था वैसा ही बना रहा. इस लापरवाही का अस्पताल प्रशासन पर तो कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन उनकी इस लापरवाही से कई मासूमों की जान चली गई. हालांकि अस्पताल प्रशासन ऑक्सीजन सप्लाई रुकने से मौत की बात को सिरे से नकार रहा है.

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गोरखपुर में बच्चों की मौत के बाद चारों तरफ हड़कंप मच गया है और इस एक घटना ने न जानें कितने लोगों को झिंझोर कर रख दिया है और कई परिवारों के चिराग को एक पल में बुझा दिया है. इस वक्त यूपी में बीजेपी की सरकार है और केंद्र में भी. बीजेपी एक मात्र दायित्व ही यही है कि समय रहते हर व्यक्ति की मदद मिलनी चाहिए जो कि इस बार नहीं हुआ और कई घर बर्बाद हो गए हैं.

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इस घटना ने देश भर में तहेल्का मचा दिया है एक साथ इतने ज्यादा मासूमों की जान कैसे जा सकती है. इस घटना को देखकर केंद्र सरकार भी चिंता में हैं. इतनी बड़ी घटना हो जानें के बाद यूपी गवर्नमेंट के ऑफिशियल सोर्स से मालूम हुआ है कि इस घटना के बारे में पता चलते ही देश के प्रधानमंत्री मोदी ने सीएम योगी को फ़ौरन फ़ोन किया और कुछ ऐसा कह दिया जिसे सुनते ही यूपी का पूरा प्रशासन हरकत में आ गया है.

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आपको बता दें कि पीएम मोदी ने योगी आदित्यनाथ से तकरीबन 15 मिनट बात की होगी जिससे आप खुद अंदाज़ा लगा सकते हैं कि पीएम मोदी ने सीएम योगी को कितना एक्टिव रहने को कहा होगा कि आरोपी कोई भी हो बचना नहीं चाहिए क्योंकि आज हमारे देश के कई उज्जवल भविष्य की मौत हुई है.

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कहीं न कहीं पीएम मोदी भी इस घटना से इतने दुखी हैं कि उन्होंने राज्य सरकार से 63 बच्चों की मौत की रिपोर्ट मांगी है और इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के साथ यूनियन हेल्थ सेक्रेटरी को गोरखपुर भेजा है. पीएम मोदी इस घटना को लेकर इतना ज्यादा चिंतित थे कि उन्होंने एक ट्वीट कर के जनता को आश्वासन दिया है कि “इस मामले पर मेरी नजर है. मैं लगातार केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों से संपर्क में हूं.”

इतना ही नहीं जैसे ही प्रशासन हरकत में आया तो इस मामले में सबसे पहले बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल राजीव मिश्रा को यूपी सरकार ने सस्पेंड कर दिया है और इसके साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, “इस मामले में अब जवाब मांगने की कोई गुंजाइश नहीं है. अब किसी से भी यह नहीं पुछा जायेगा कि क्या हुआ, कैसे हुआ.. इसकी जांच की जा रही है और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा.”

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जानिए गैस एजेंसी ने क्या कहा

वैसे इस लापरवाही का अस्पताल प्रशासन पर तो कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन उनकी इस लापरवाही ने कई मासूमों की जान ले ली. हालांकि अस्पताल प्रशासन ऑक्सीजन सप्लाई रुकने से मौत की बात को सिरे से नकार रहा है.

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ऐसे में सवाल ऑक्सीजन एजेंसी पर उठ रहे थे जिसका नाम पुष्पा गैस एजेंसी है. इस बीच जब एजेंसी से ये सवाल किया गया कि आखिर इतनी बड़ी गलती कैसे हुई तो जो जवाब मिला वो हैरान करने वाला था. कंपनी की HR ने बताया कि ‘ऐसे कोई ऑक्सीजन सप्लाई नहीं काट सकता है.’

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आपको बता दें कि योगी ने कुछ दिन पहले ही वहां जाकर सब चीज़ की जांच की थी लेकिन अमूमन देखा गया है कि जब कोई बड़ा सरकारी अफसर ऐसी जगाहों पर आता है तो सभी चीज़ें बेहतर कर दी जाती हैं

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आपको बता दें यह सरकार की नहीं बल्कि कॉलेज प्रशासन की ज़िम्मेदारी है कि वो ऑक्सीजन देने वाली कंपनी का बकाया पैसा चुकाएं. मासूमों की जान जाने लगी तो कॉलेज ने 22 लाख बकाया राशि देने का फैसला किया और फिर पुष्पा गैस कंपनी ने ऑक्सीजन दी है.

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ऐसे में शक के घेरे में आता है तो वो शख्स जिसका काम मेडिकल कॉलेज को ऑक्सीजन देना है. सूत्रों की माने तो जिस कम्पनी के पास ऑक्सीजन सप्लाई करने का ज़िम्मा था उसके 68 लाख बकाया थे, जिसकी वजह से उसने ऑक्सीजन की सप्लाई बंद कर दी थी. जानकरी के लिए बता दें सरकार इन सब कामों के लिए टेंडर निकालती है और ऐसे में ज़िम्मेदारी टेंडर लेने वाली की हो जाती है ना कि सरकार की

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