तब सिर्फ राष्ट्रपति भवन की सुख-सुविधा से प्रभावित होकर प्रणब दा ने अपनी बहन से व्यक्त की थी ऐसी इच्छा जिसे सुनते ही उनकी बहन ने…

प्रणब मुखर्जी देश के 13 वे राष्ट्रपति रहे हैं.  प्रणब मुखर्जी  साल 2012 से देश के राष्ट्रपति पद की गरिमा बनाये हुए थे. कल यानी 24 जुलाई को प्रणब मुखर्जी जी का राष्ट्रपति कार्यालय में आखिरी दिन था क्योंकि आज 25 जुलाई को देश के 14 वे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी अपने राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे. प्रणब मुखर्जी वो शख्सियत हैं जिन्हें कांग्रेस का एक निष्ठावान एवं विश्वसनीय व्यक्ति जाना जाता है। शायद यही एक वजह थी जिसके चलते प्रणब मुखर्जी जी को राष्ट्रपति बनाया गया था न कि देश का प्रधानमंत्री.

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आपको बता दें कि प्रणब मुखर्जी इतने सरल स्वभाव के थे कि एक बार जब वे युवा सांसद थे तो वे अपने आवास के बरामदे में बैठे हुए थे और तभी उन्होंने राष्ट्रपति वाली बग्गी को देखा. जिसे देखते ही प्रणब दा अपनी बड़ी बहन से मजाक में कहा कि इस आलीशान राष्ट्रपति भवन का आनंद उठाने के लिए वो अगले जन्म में घोड़ा बनना पसंद करेंगे।

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अपने से करीब 10 साल छोटे भाई के मुंह से ऐसी बात सुनते हुए प्रणब मुखर्जी की बड़ी बहन अन्नपूर्णा बनर्जी ने तभी भविष्यवाणी करते हुए कहा था कि घोड़ा छोड़ो आप इसी जन्म में इस देश के राष्ट्रपति ज़रूर बनेंगे.

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कल यानी 24 जुलाई को प्रणब मुखर्जी जी को विदाई दी गई. आपको बता दें कि इस समारोह में प्रणब दा काफ़ी भावुक हो गए थे. यह क्षण उनके जीवन में बहुत महत्व रखने वाला था.इस विदाई में प्रणब मुखर्जी को उपहार के उपलक्ष में एक मोमेंटो और कॉफी टेबल बुक दी गई है.

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इस कॉफी टेबल बुक में पीएम मोदी के अलावा सोनिया गांधी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, लोकसभा उपाध्यक्ष थंबी दुरई और राज्यसभा के उपसभापति पी जे कुरियन और संसद के कई सदस्यों के दस्तखत हैं। साथ ही इस बुक में प्रणब दा की उन तस्वीरों को भी जगह दी गई है जो अलग अलग मौकों पर संसद भवन में ली गई थीं.

राष्ट्रपति भवन की खासियत

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राष्ट्रपति भवन वो जगह होती है जहाँ भारत का प्रथम नागरिक निवास करता है. देश के प्रथम नागरिक के इस भवन की भव्यता का पता इसी बात से चल  जाता है कि चार मंजिला इस भवन में 340 कमरे हैं. हर कमरे का अलग महत्व है और हर कमरे को किसी न किसी में उपयोग किया जाता है. आज का राष्ट्रपति भवन ब्रिटिश वायसराय का सरकारी आवास होता था.ये आलीशान भवन माल्चा और रायसिनी गांव की जमीन पर बना है इसमें 70 करोड़ ईटों और 30 लाख घनफुट पत्थरों का इस्तेमाल हुआ है उस वक्त इस इमारत को बनाने में  140 करोड़ रुपये की लागत आई थी l

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