राज्य की जनता से सर्वोपरि कुछ भी नहीं इसकी मिशाल योगी सरकार ने दुनिया के सामने पेश की

प्रदेश में जबसे योगी आदित्यनाथ सत्ता में आये हैं तब से वह बहुत ज्यादा सतर्क हैं। वह छोटी से छोटी चीज पर नजर रखते हैं कि एक गलती की वजह से उनके सरकार की विपक्ष खिंचाई ना कर दे। इसलिए वह खुद और अपने मंत्रियों को भी सतर्क रहने का आदेश पहले ही दे चुके हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालते ही प्रदेश में कई बड़े बदलाव किये।।योगी सरकार द्वारा बदलाव करने की वजह कुछ और नहीं बल्कि प्रदेश का विकास करना ही था। शुरुआत में उन्होंने आते ही कई पुलिस अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया |

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इसपर एक पुलिस अधिकारी ने उन पर आरोप भी लगाया था कि वो जाति के आधार पर बर्खास्त कर रहे हैं। जिन लोगों का सरनेम यादव है, केवल उन्हें ही बर्खास्त किया जा रहा है। बाद में उस पुलिस अधिकारी को जब अपनी गलती का एहसास हुआ तो उसने माफी भी मांगी थी। योगी ने उत्तर प्रदेश की महिलाओं को मनचलों से बचाने के लिए एंटी रोमियो दल की स्थापना की।

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उत्तर प्रदेश में योगी सरकार आने से प्रदेश का कायाकल्प शुरू हो चुका हैl योगी जी ने जिस तरीके से प्रदेश में फैले अव्यवस्था को सुधारने के लिए ताबड़तोड़ कदम उठाये हैं वो उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने में सहायक होंगेl  वैसे योगी सरकार के आने से जनता का कानून में विश्वास बढ़ा हैl प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए योगी ने बेहतरीन कदम भी उठाये हैंl

 

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योगी सरकार ने अब तक जनता कि भलाई के लिए बहुत कदम उठाए है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले की वजह से योगी सरकार को 5000 करोड़ का नुकसान हुआ हैं | सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल शराबबंदी को लेकर एक फैसला सुनाया था जिसमें नेशनल ओर स्टेट हाईवे से शराब के ठेके 500 मीटर अंदर हो |

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जिसकी वजह से योगी सरकार को राजस्व में 5000 करोड़ का नुकसान हुआ है | उत्तर प्रदेश के आबकारी मंत्री जय प्रताप सिंह ने बताया, नेशनल और स्टेट हाईवे  के किनारे शराब की सभी दुकाने बंद होने से वित्तीय वर्ष 2016-17 में राज्य सरकार को करीब 5,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है.’

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से 8,591 शराब की  दुकानें बंद हुई है और  3,000  से  ज्यादा शराब कारोबारियों ने अपने लाइसेंस वापस ले दिए हैं. उत्तर प्रदेश के मिनिस्टर ने \ बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से दुकानों के बंद किए जाने के बाद 19 हजार करोड़ रुपए के राजस्व वसूली लक्ष्य के मुकाबले उत्तर प्रदेश के आबकारी विभाग को 14,000 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं.

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