1962 का युद्ध जीत सकता था भारत अगर पंडित नेहरु ने इजराइल के सामने ये घटिया शर्त न रखी होती ?

पीएम मोदी का इजराइल दौरा…

इन दिनों पीएम मोदी इजराइल की यात्रा पर हैं और वहां उनका काफी ज़ोरदार स्वागत हुआ है. इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू  ने रेड कारपेट बिछाकर पीएम मोदी का स्वागत किया है. ख़ास बात ये रही कि इजराइल के पीएम ने अपने कोट में भारत का झंडा लगा रखा था. आपको बता दें इजराइल के प्रधानमंत्री ने मोदी के स्वागत में हिंदी में अपने भाषण की शुरूआत की थी. इन दिनों पूरे भारत में एक ही चर्चा है वो है भारत और इजराइल के रिश्ते लकिन क्या आप जानते हैं भारत 1962 की जंग नहीं हारता अगर नेहरु ने इजराइल के सामने ये शर्त नहीं राखी होती… ijrael

भारत और इजराइल के बीच संबंध…

ये बात सभी जानते हैं कि कांग्रेस शुरू से ही इजराइल के निर्माण के खिलाफ थी और उसके बनने के बाद आज तक किसी कांग्रेसी ने वहां जाना मुनासिफ नहीं समझा. इसके पीछे वजह बताई जाती है की इजराइल मुस्लिमों के खिलाफ है और वहां जाना भारत के मुस्लिमों को नाराज़ करने जैसा है. इजराइल के निर्माण के बाद पीएम मोदी भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने वोट बैंक के ऊपर सोचते हुए इजराइल का दौरा किया है. पीएम मोदी ने शुरू से ही रिश्ते सुधरने की सोची है और कई देशों से बढ़िया संबंध कायम किये हैं.

 

62 की जंग में जब पहले नेहरु ने इजराइल से मांगी मदद… 

नेहरु ने यूं तो इजराइल के बनने का समर्थन नहीं किया था लेकिन जब चाइना ने भारत को धोखे से घेर लिया था तो मदद मांगने नेहरु सबसे पहले इजराइल के पास गये थे, इजराइल ने उस समय में बिना कुछ सोचे भारत की मदद के लिए हाँ बोल दिया था.

 

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नेहरु ने मदद के लिए इजराइल को राज़ी तो कर लिया लेकिन रख दी एक शर्त…

नेहरु कप जब पता चला के इजराइल हमारी मदद के लिए तैयार है तो उसने तुरंत इज्रिली पीएम से कहा कि इजराइल से आने वाले हथियारों पर कोई निशान ना हो, कहने का मतलब है नेहरु को इजराइल से आने वाले हथियारों पर इजराइल की मार्किंग नहीं चाहिए थी. इतनी ही नहीं मदद के लिए आने वाले इजराइल के जहाजों पर इजराइल का झंडा होने से भी नेहरु को परेशानी थी.

 

 

क्या हुआ इसके बाद…

इजराइल के पीएम को यह बात पसंद नहीं आई और उन्होंने मदद के हाथ पीछे खींच लिए, जब नेहरु को लगा चीन भारत पर हावी हो रहा है तो उसने फिर इजराइल से कहा और इजराइल के जहाज भारत आने के लिए राज़ी कर लिए. इसके बाद इजराइल से मदद भारत आ सकी थी.

 

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भारत ने चीन से 1962 की हार का  बदला 5 साल बाद ही ले लिया था, जानिए भारत की जीत का अनसुना इतिहास !

इन दिनों चीन के बॉर्डर पर लगातार टेंशन चल रही है और इसी बीच चाइना ने भारतीय सेना पर हमला भी किया है.हाल ही में एक खबर आई थी कि चीनी मीडिया के अनुसार भारत पर 1962 के युद्ध का काफी गहरा असर पड़ा था. आज कई सालों बाद एक बार फिर भारत और चीन के बीच युद्ध जैसे हालत हैं और इसके लिए दोनों की देश तैयार हैं. ये जो वाक्य हम आपको बताने वाले हैं आपने आज से पहले कभी नहीं सुना होगा ना ही कहीं पड़ा होगा. दरअसल भारत ने चीन से 1962 की हार का बदला 1967 में ले लिया था. hargksdalkgn

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वो इलाका जहाँ लड़ाई हुई थी…

बता दें भारत और चीन के बीच करीब 4 हजार किलोमीटर लंबी लाईन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल है.  ज्ञात हो इसी लाइन को  एलओसी है और इसी  पर 1967 में भारतीय सेना ने चीन को बुरी तरह से खदेड़ा था. बताया जाता है कि उस जगह का नाम सिक्कम का नाथुला पास है. इस इलाके में एक दरवाजे के पीछे लोहे की बाड़ है जिसके लिए 11 सितम्बर 1967 को आमने-सामने आ गये थे.

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चीन ने दी थी भारत को ये धमकी…

आपको बता दें उन दिनों वहां पर सीमा की पहचान के लिए सिर्फ एक पत्थर था और चीनी सेना ने वहीं पर भारतीय सेना को चेतावनी दी थी l चेतावनी में “चीनी सेना ने कहा था के पीछे हट जाओ नहीं तो 1962 की तरह कुचले जाओगे” चीन ने इतना ही नहीं हमेशा की तरह नीचता दिखाते हुए भारतीय सीमा में घुसपैठ भी की थी. चीनी सेना भारत में बनकर बनाना चाहती थी.आपको बता दें वह भारतीय सीमा की आखिरी पोस्ट थी.

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बदले में भारत ने उठाया था ये कदम… 

उस समय 1967 में मेजर जनरल सगत राय नाथुला पास पर ड्यूटी करते थे.चीन की धमकी के बाद उन्हीं के कहने पर उस इलाके में काटों से भरे तार लगाने का फैसला किया गया था.इसके बाद बेशर्म चीन ने वो किया जो किसी ने नहीं सोचा था.चीनी सेना ने साईट पर मौजूद इंजिनियर समेत सेना के जवानों पर अचानक हमला कर दिया और 67 भारतीय इस हमले में शहीद हो गये.

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भारतीय जवानों के शहीद होने के बाद ऐसा लिया था भारत ने बदला…

इसके बाद भारतीय जवानों में बदले की आग बुरी तरह भर चुकी थी और भारतीय जवानों ने चीन की पूरी  मशीनगन यूनिट को बुरी तरह से तबाह कर दिया था. उसके बाद से आज तक चीनी सेना ने उस इलाके में घुसपैंठ करने की कोशिश तक नहीं की है. आज नाथुला पास पर इस लड़ाई में शहीद हुए भारतीय जवानों की याद में अम्र जवान ज्योति बनी हुई है फूट है..

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एक और ऐसा ही इलाका जहां भारतीय जवानों ने चीनी सैनिकों से लिया था बदला…

आपको बता दें नाथुला पास से कुछ ही मीटर दूर एक और इलाका है जिसका नाम है चोला पास जहां चाइना और भारत के बॉर्डर की दूरी महज 700 फूट है. इस इलाके में भी भारतीय सेना ने चीनी सेना को बुरी तरह से हराया था और अपना हक वापिस लिया था.इस जगह पर लाल रंग से पेंट किया गया एक पत्थर रखा हुआ है, यह वही पत्थर है जिसको लेकर जंग शुरू हुई थी. यह इलाके इतने संवेदनशील हैं कि भारतीय सेना के जवान 24 घंटे यहाँ तैनात रहते हैं. बता दें 15 हजार फीट की ऊँचाई पर भारत की चोला चौकी बनी हुई है. लड़ाई में मारे गये चीनी सैनिकों की लाश उठाने के लिए चीन ने रात के अंधरे का फायदा उठाया था.

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आज भी डरा हुआ है चीन…

चीन और भारत में एक बार फिर युद्ध जैसा माहौल बन रहा है लेकिन चीन भूल रहा है कि भारत इस समय 1962 वाला भारत नहीं है और अब मोदी सरकार के चलते पूरे विश्व में अपना परचम लहरा चुका है. कई खबरों के अनुसार आज भी चीन भारत के नाथुला पास और चोला के आस-पास नहीं भटकता है. इन्हीं दो जगह पर चीन को बुरी तरह हराते हुए भारत ने 1962 के युद्ध का बदला ले लिया था.