कोरोना से जंग में जिस ‘दवा’ को दुनिया ने ठुकराया, उसी को आजमाएगा भारत

by supriya
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कोरोना के हर दिन बढ़ रहे प्रकोप के चलते पूरे देश मे पीएम मोदी ने लॉकडाउन को आगे बढ़ाने का फैसला लिया था. लॉकडाउन को 31 मई तक के लिए आगे बढ़ा दिया है. इसके बावजूद भी हालात नही सुधर रहे. ऐसे वक़्त में जब देश में कोरोना के मामले बेतहाशा बढ़ रहे हैं, सरकार और डॉक्टर सावधानियां बरतने की अपील कर कर रहे हैं. साफ़ सफाई पर ध्यान देने की अपील की जा रही है. आपको बताते हैं एक ऐसी दवा के बारे में, जिसे सारी दुनिया ने ठुकरा दिया लेकिन भारत उसी को आजमा कर कोरोना की दवा बनाने जा रहा हैं. आइये आपको बताते हैं उस दवा का नाम.

कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने के लिए पूरा विश्व प्रयास में जुटा है. उधर कई देश यह जानने की कोशिश में भी लगे हैं कि मौजूदा हालात में कोरोना से बचने के लिए कौन सी दवाई काम आ सकती है. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने एक रिसर्च में पाया है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन लेने से कोविड-19 से संक्रमण की संभावना कम हो जाती है. यह रिसर्च इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में एक रिसर्च सामने आई थी, जिसमें कहा गया था कि इस दवाई का कोरोना के खिलाफ कोई कारगर प्रभाव नहीं है. बल्कि इस दवाई से कोरोना मरीजों में कार्डिएक रिस्क यानी कि हृदय संबंधी खतरा बढ़ जाता है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह मलेरिया रोधी दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का सेवन कर रहे हैं. जबकि अमेरिका के विशेषज्ञ और नियामक यह कह चुके हैं कि कोरोना वायरस से लड़ने के लिए यह दवा उपयुक्त नहीं है. ट्रंप ने बताया कि उनका कोरोना वायरस का टेस्ट निगेटिव आया है और उनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं दिखे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह एहतियाती तौर पर डेढ़ हफ्ते से यह दवा ले रहे हैं. ट्रंप ने बताया, “मैं जिंक के साथ रोज एक गोली लेता हूं. यह पूछे जाने पर कि क्यों- इस पर उन्होंने जवाब दिया कि क्योंकि मैंने इसे लेकर अच्छा सुना है. कई अच्छी खबरें सुनी हैं.

वहीं भारत सरकार ने कोविड-19 से बचाव के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (HCQ) के इस्तेमाल को और बढ़ाने का फैसला किया है. ICMR ने मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवा क्लोरोक्वीन और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (HCQ) के इस्तेमाल के लिए नई संशोधित गाइडलाइन जारी की है. इससे पहले रिसर्च बॉडी ने नई दिल्ली में तीन केंद्रीय सरकार के अधीन अस्पतालों पर इसकी जांच की है. जांच में पता चला है कि वैसे हेल्थ वर्कर (कोविड- 19 केयर में काम करने वाले भी) जिनको HCQ प्रोफिलैक्सिस दिया गया था उनमें SARS-CoV-2 के संक्रमण की संभावना बेहद कम थी.