इंसानो का पोस्टमार्टम दिन मे क्यो नही किया जाता है। क्या सच मे चींखती है लाशें?

by Abhishek
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इंसानों का पोस्टमॉटर्म रात में क्यों नहीं किया जाता है क्या सच में लाशे चीखती हैं ?

क्या है इसके पीछे का विज्ञान ?

या कोई कपोल कल्पना ?

या धार्मिक वर्जना ।

क्या सच में लाशें चीखती हैं ?

या डॉक्टरों द्वारा फैलाया गया झूठ है ये ।

इसका जवाब शायद हम आपको बेहतर बता सकें । पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों की एक टीम के द्वारा हमने इस विषय पर जानकारी एकत्रित की और आपके सामने प्रस्तुत हैं ।।

पोस्टमार्टम को शव विछेदन क्रिया भी कहते हैं जो अक्सर उसी व्यक्ति का होता है जिस के मामले में पुलिस केस बनता है। जैसे रोड एक्सीडेंट के मामले, किसी को जलाने की कोशिश, आत्महत्या, हत्या, लावारिस लाश ये कुछ अहम मामले हैं इन मामलों में पोस्टमार्टम किया जाता है। इसके अलावा विवाद के मामले में भी पोस्टमार्टम होता है जिसमें परिवार की ओर से इच्छा जाहिर की जा सकती है ।।

पोस्टमार्टम की अनुमति केवल और केवल राजकीय डॉक्टर यानी सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों को ही होती है। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर पोस्टमार्टम नहीं करते हैं, उन्हें विशेष, हाई वोल्टेज या विवादित मामलों में ही कमेटी बनाकर पोस्टमार्टम की टीम में शामिल किया जाता है।
पोस्टमार्टम करने वाली टीम 3 लोग होते हैं जिनमें फार्मासिस्ट, डॉक्टर और वार्ड ब्वाय होता है। डॉक्टर सिर्फ नोटिंग करते हैं परिस्थिति देखते हैं वो ज्यादातर मामलों में चीड़फाड़ नहीं करते।

पोस्टमार्टम के दौरान शरीर के कुछ अंग जैसे सिर, पेट, फेफड़े को देखा जाता है और इन्हीं में कुछ चीज़ें सुरक्षित रखी जाती हैं। जहर के मामलों में विसरा सुरक्षित रखा जाता है। हत्या के मामलों में बॉडी को पूरी तरह से चेक किया जाता है निशान देखें जाते हैं मौत का कारण पता किया जाता है।

डॉक्टर बनने के 5 साल बाद ही आप पोस्टमार्टम के लिए वैध होते हैं और 50 या 55 साल की उम्र के बाद सरकार डॉक्टर से पोस्टमार्टम नहीं कराती। इसबार यूपी में पोस्टमार्टम को लेकर काफी बवाल मचा था क्योंकि 50 उम्र के बाद वाले डॉक्टर को भी पोस्टमार्टम करने के लिए सरकार ने कहा था।

पोस्टमार्टम एक कानूनी प्रक्रिया होती है इसलिए डॉक्टर इसके पचड़े में नहीं पड़ना चाहते। पोस्टमार्टम करने के बाद अगर कोई कानूनी मामला होता है तो डॉक्टर को गवाही देने के लिए कोर्ट भी बुलाया जाता है, ऐसे में रिटायरमेंट के बाद भी डॉक्टर कोर्ट के चक्कर लगाते फिरते हैं ।

अब अंतिम में आपको वो बात बता दूं जिसे आप जानना चाहते हैं कि रात में पोस्टमार्टम क्यों नहीं होता। ऐसा नहीं है कि रात में पोस्टमार्टम नहीं होता है, बिल्कुल होता है लेकिन विशेष मामलों में। आम दिनों में सूरज ढलने के बाद पोस्टमार्टम की इजाजत नहीं है। इसके कानूनी कारण हैं। जैसे बिजली की समस्या और शरीर में निशान सही न दिखना। इसके अलावा पोस्टमार्टम के ठीक बाद लाश का अंतिम संस्कार करते हैं उनके परिजनों को सौंप देते हैं तो चीड़फाड़ के बाद लाश को रख पाना मुश्किल होता है इसलिए भी सामान्य मामलों में नहीं करते। कई पोस्टमार्टम हाऊस में तो फ्रीज की व्यवस्था भी नहीं होती है।

रात में पोस्टमार्टम के लिए डॉक्टर को सिर्फ और सिर्फ जिलाधिकारी ही अनुमति दे सकता है। उसकी अनुमति से ही डॉक्टर रात में पोस्टमार्टम करने आ सकते हैं। जिलाधिकारी एक पत्र पर हस्ताक्षर करके मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पास भेजते हैं जो डॉक्टर को पोस्टमार्टम के लिए भेजता है।

ऐसे पोस्टमार्टम किसी भी सिफारिश से हो जाते है । इसलिए यह कहना सही नहीं है कि रात में पोस्टमार्टम नहीं होते।

और हां दोस्तों सबसे जरूरी बात लाशें रात में चीखती नहीं है

लेकिन आपको पोस्टपार्टम हाउस में तैनात चौकीदार जरूर डरावना लग सकता है।

अधिकतर चौकीदार बिना नशा किया ड्यूटी नहीं दे पाते।

और इनको वहां किसी भी काम के लिए बख्शीश देनी पड़ती है,

इसमें पुलिस भी उसे नहीं रोक सकती। यह 100 फीसद सत्य है।