निर्भया के चारों आरोपियों में से बस एक विनय शर्मा ने जाहिर की थी ये अंतिम इच्छा

by nishant
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16 दिसंबर 2012 में निर्भाया के साथ की गयी बर्बरता का हिसाब चुकता हो गया है. चारों आरोपियों को 20 मार्च को फांसी पर लटका दिया गया था. दोषियों ने खुद को बचाने के लिए लाख करते रहे लेकिन धीरे धीरे उनके सारे कानूनी रास्ते बंद होते गये और 20 मार्च की सुबह सुबह ही उन्हें 5:30 पर फांसी दे दी गयी. जिसके बाद तिहाड़ जेल के बाहर लोगों ने जमकर जश्न मनाया और आखिरकार निर्भया को न्याय मिल ही गया.

जानकारी के लिए बता दें निर्भया की मां आशा देवी ने भी तब तक हार नहीं मानी जब तक इन दरिंदों को फांसी नहीं हो गयी. उन्होंने अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए कोर्ट में कोई कमी नहीं छोड़ी. वहीं फांसी पर लटकने से पहले दोषी रोये फांसी घर में लेट गये लेकिन उनकी एक न सुनी गयी और समय के अनुसार फांसी दे दी गयी. फांसी से पहले जब निर्भया के चारों कातिलों से उनकी आखिरी इच्छा पूछी गयी.

चारों आरोपियों से उनकी जब आखिरी इच्छा पूछी गयी तो तीन आरोपियों ने इस बारे में जेल अधिकारियों से कुछ नहीं कहा. वहीं विनय ने अपनी अंतिम इच्छा जाहिर की और कहा कि अगर आज सच में उन्हें फांसी दी जाती है तो उसके द्वारा बनाई गयी कुछ पेंटिंग्स में से एक पेंटिंग मरने के बाद आप जेल सुपरिडेंट को दे देना बाकी की पेंटिंग और अन्य सामान उसकी माँ को दे देना.

गौरतलब है कि आखिरी समय तक दोषियों को यही लगता रहा है कि कैसे भी उनकी फांसी रुक जाए लेकिन ऐसा हुआ नही. विनय के अलावा चारों में से किसी ने अपनी जिंदगी खत्म होने से पहले न तो अपने बारे में न ही अपने घरवालों के बारे में कोई बात जेल अधिकारियों से कही. सुबह 3:15 पर उन्हें उठाये जाने के बाद नहाने को कहा गया और फिर उन्हें चाय मंगाई गयी हालाँकि किसी ने चाय नास्ता नहीं किया और फिर कुछ क़ानूनी कार्रवाई पूरी होने के बाद 5:30 पर उन्हें फांसी दे दी गयी.