छत्तीसगढ़ में अगर अजीत जोगी और मायावती ना आते साथ तो बीजेपी का और भी बुरा हो सकता था हाल , जानिए कैसे बीजेपी को फायदा पहुंचाया

देश के 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं और इन चुनावों में सबसे बड़ा झटका भाजपा को मिला है. तीनो प्रमुख राज्यों से भाजपा की सरकार चली गयी है. तीनो ही राज्यों में कांग्रेस अपनी सरकार बनाने जा रही है. भाजपा को सबसे बड़ा झटका छत्तीसगढ़ में हुआ है, जहाँ बीजेपी को बुरी स्थिति देखने को मिली है. 90 में से बीजेपी महज 15 सीटों पर ही सिमट कर रह गयी और विपक्षी दल कांग्रेस ने शानदार रिकॉर्ड दर्ज करते हुए 90 में से 68 सीटों पर जीत दर्ज करके लोगों को चौंका दिया है.

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जानकारी के लिए बता दें छत्तीसगढ़ में बीजेपी को मिली करारी हार के लिए जितना जिम्मेदार कांग्रेस को माना जा रहा है उतना ही हार का ठीकरा बसपा सुप्रीमो मायावती और अजीत जोगी पर भी फोड़ा जा रहा है. छत्तीसगढ़ के नतीजों को अगर गहराई में जाकर देखा जाए तो बेहद ही चौंकाने वाले आंकड़े सामने आ रहे हैं. जी हाँ छत्तीसगढ़ में जहाँ एक एक ओर भाजपा अजीत जोगी और मायावती की जोड़ी को अपनी बुरी हार का जिम्मेदार ठहरा रही है वहीँ दूसरी ओर मायावती और अजीत जोगी ने देखिये किस तरह भाजपा को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा पहुंचाया है और कांग्रेस को नुकसान. आइये बताते हैं पूरा माजरा….

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अगर सही मायने में देखा जाए तो छत्तीसगढ़ में बीजेपी को 15 सीटें दिलाने में मायावती और अजीत जोगी ने अहम भूमिका निभाई है नहीं तो परिणाम इससे भी ज्यादा गंभीर हो सकते थे. वहीँ बीजेपी को कुछ सीटों पर फायदा पहुँचाने के पीछे कांग्रेस का भी हाथ रहा है. वो ऐसे बताते हैं हम आपको- मायावती और अजीत जोगी की जोड़ी ने सीधे-सीधे कांग्रेस पार्टी के वोट बैंक में ही सेंध मारी है, जिसका फायदा बीजेपी को हुआ है तो वहीँ कांग्रेस के बागी नेताओं ने भी कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध मारी है.

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गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में बीजेपी को मिली 15 सीटों में से 2 सीटों पर कांग्रेस की वजह से बीजेपी जीती है, जिनमे से तीन विधायकों (पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, बृजमोहन अग्रवाल और विद्या रत्न भासीन) ने सीधे तौर पर अपनी विपक्षी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों को मात दी है. वहीँ बात अगर 12 सीटों की जाए तो मायावती और अजीत जोगी के गठबंधन ने कांग्रेस के वोट बैंक में सेंधमारी करके बीजेपी को ही फायदा पहुंचाया है. इनमे से दो सीट ऐसी भी हैं जहाँ कांग्रेस के बागी नेताओं ने ही अलग चुनाव लड़ा और इसका फायदा बीजेपी को हुआ. इसका सीधा उदाहरण हम आपको बताते हैं…

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पहला धमतरी की कुरूद विधानसभा सीट से बीजेपी के उम्मीदवार अजय चंद्राकर ने 72,922 वोटों से जीत दर्ज की है, वहीँ दूसरे नम्बर पर नीलम चंद्राकर रहे, जिन्हें 60,605 वोट मिले. नीलम चंद्राकर कांग्रेस से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लडे थे और वहीँ तीसरे नंबर पर कांग्रेस के उम्मीदवार रहे, जिन्हें 26,483 वोट मिले. अगर नीलम चंद्राकर बागी होकर निर्दलीय चुनाव नहीं लड़ते तो बीजेपी के लिए बड़ा खामियाजा उठाना पड़ सकता था. अगर नीलम चंद्राकर बागी ना होकर कांग्रेस से लड़ते तो सारा वोट एक ही जगह रहता और वह जीत सकते थे. वहीँ दूसरी तरफ धमतारी सीट से कांग्रेस विधायक गुरुमुख सिंह होरा चौथी बार चुनाव लड़ रहे थे लेकिन पहली बार वो बीजेपी की रंजना कुमारी से 464 वोट से चुनाव हार गये हैं, उनके हारने के पीछे की वजह रही यूथ कांग्रेस लीडर आनंद पवार का अलग से चुनाव लड़ना. आनंद पवार ने 29163 वोट हासिल किये. अगर वो नहीं लड़ते तो कांग्रेस के उम्मीदवार गुरुमुख सिंह चुनाव जीत सकते थे. बाकी 10 सीटों पर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़, बीएसपी और सीपीआई) ने सत्ता विरोधी लहर के चलते भारी संख्या में वोटों पर कब्जा किया, जिसका सीधा असर बीजेपी को ही हुआ.

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