चाचा शिवपाल के बाद अब अखिलेश यादव का ये जिगरी दोस्त बनाने जा रहा है अपनी नई पार्टी, वजह बेहद खास है

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समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को झटके पे झटके मिल रहे हैं. पहले उनके चाचा शिवपाल यादव ने समाजवादी पार्टी से नाता तोड़ अपनी अलग नई पार्टी बना लिए और अब उनके एक और जिगरी रहे खासम खास ने अखिलेश से अलग होकर नयी पार्टी बनाने की राह पकड़ ली है. जहां तक शिवपाल यादव की बात है तो शिवपाल यादव को सपा में नजरंदाज किया जा रहा था, जिसकी वजह से उन्होंने पार्टी से नाता तोड़ने का फैसला किया. बता दें कि शिवपाल ने ‘समाजवादी सेक्यूलर मोर्चा’ के नाम से एक अलग पार्टी बना ली है लेकिन अब उनके एक और खास ने नई पार्टी बनाने का निर्णय ले लिया है.

बता दें कि अखिलेश यादव के बेहद खास रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया जोकि निर्दलीय विधायक रहा करते हैं उन्होंने अब अपनी एक नई पार्टी बनाने का मन बना लिया है. पार्टी को लेकर नाम के आवेदन चुनाव आयोग को दे दिए गए हैं. अक्सर ये देखा गया था कि राजा भैया हमेशा अखिलेश के साथ बुरे दिनों में साथ नजर आते थे और उन्हें राजनीतिक संकटों से बाहर निकालते थे. लेकिन अब इस दोस्ती में गांठ पड़ गयी है.

आगामी 30 नवंबर को राजा भैया को राजनीति में 30 साल पूरे हो जायेंगे, इस मौके पर उम्मीद की जा रही है कि वो अपनी एक पार्टी आधिकारिक तौर पर बना सकते हैं. अभी तक राजा भैया निर्दलीय चुनाव लड़ते थे और निरंतर जीत हासिल करते रहे हैं. उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की कुंडा विधानसभा सीट से 25 सालों से विधायक रहने वाले राजा भैया कभी बीजेपी तो कभी सपा के साथ नजर आते रहे हैं. हालाँकि कोई भी पार्टी उन्हें सीधे तौर पर अपनाने से कतराती रही.

वजह ये है..

राजा भैया और बसपा सुप्रीमों मायावती के बीच 36 का आंकड़ा देखा जाता है, और इसलिए कहा जाता है कि यूपी में बीते राज्यसभा चुनाव में राजा भैया ने अखिलेश के मनमुताबिक बसपा के उम्मीदवार को वोट ना देकर भाजपा के प्रत्याशी को दे दिया. तभी से अखिलेश और राजा भैया के बीच दोस्ती में दरार पैदा होनी शुरू हो गयी. जिसका नतीजा ये है कि अब राजा भैया खुद की पार्टी लांच करने जा रहे हैं जिससे अखिलेश को झटका लग सकता है. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि राजा भैया सपा के वोट प्रतिशत में सेंध मारने में माहिर हो सकते हैं.

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