पीडीपी से अलग होने से पहले जो ‘शख्स’ बीजेपी प्रमुख अमित शाह से मिला था उसके बारे में जानकर कांपते हैं दुश्मन !

कहते हैं जब पानी सिर के ऊपर बहने लगे तो बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता है. ये कहावत जम्मू-कश्मीर की महबूबा मुफ़्ती सरकार पर एकदम सटीक बैठती है. दरअसल महबूबा मुफ़्ती और उनकी पार्टी की जो विचारधारा है उसके मुताबिक वो चाहती थीं कि सेना पर पत्थर फेंकने वालों के साथ नरमी बरती जाए. महबूबा मुफ़्ती ये भी चाहती थीं कि कश्मीर के हालातों पर अलगाववादियों से बात की जाय. यही नहीं मुफ़्ती तो ये भी चाहती थीं कि रमजान के महीने में सेना के ऑपरेशन पर जो रोक लगी थी उस पर रोक लगी रहे.

ईद के बाद पीएम मोदी ने गृहमंत्री से बात करके सेना को आल आउट ऑपरेशन की फिर से मंजूरी दी थी (फोटो सोर्स)

इस वजह से अलग हुई बीजेपी

फ़िलहाल ऐसी मंशा से बीजेपी खुद को रोक नहीं पा रही थी. क्योंकि मामला देश की छवि से जुड़ा हुआ था, मामला सेना के जवानों की शहादत से जुड़ा हुआ था, और मामला कश्मीर में फैले आतंकवाद से जुड़ा हुआ था. राज्य की कमान महबूबा मुफ़्ती को देकर भाजपा की सोच थी कि वो अलगाववादियों और आतंकवादियों के खिलाफ कड़े कदम उठाएंगी लेकिन हर मोर्चे पर वो विफल रहीं. इसी को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी प्रमुख अमित शाह ने महबूबा मुफ़्ती सरकार से अलग होने फैसला लिया.

पीडीपी से अलग होने से पहले अमित शाह मिले थे ‘इस शख्स’ से

खबरों की मानें तो पीडीपी से अलग होने के फैसले को लेने से पहले अमित शाह की मुलाकात एक ऐसे शख्स से हुई थी जो देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगाने से भी नहीं कतराता. ज़ी न्यूज़ के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में पीडीपी से समर्थन वापस लेने में उसी शख्स का हाथ बताया जा रहा है जिसका जिक्र अभी हमने ऊपर किया. बता दें कि उस शख्स का नाम अजीत डोभाल है. अजीत डोभाल भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं और पीएम मोदी के बेहद खास भी.

मंगलवार की सुबह अमित शाह से मिलने उनके घर पहुंचे थे अजीत डोभाल (फोटो सोर्स)

सुबह ही हो गयी थी मुलाकात 

ये तो पहले से ही तय था कि मंगलवार को बीजेपी प्रमुख अमित शाह कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं और इसके लिए उन्होंने महबूबा मुफ़्ती सरकार में बीजेपी के सभी मंत्रियों को दिल्ली बुलाया था. यह मुलाकात 19 जून को दोपहर में होनी थी. इससे पहले ही मंगलवार की सुबह अमित शाह से अजीत डोभाल से मिले और उन्हें घाटी के हालातों की जानकारी दी. कहा जा रहा है अजीत डोभाल की मुलाकात के बाद और घाटी के हालात जानने के बाद ही अमित शाह ने ये बड़ा कदम उठाया है.

अजीत डोभाल आतंकियों की नस ढीली करने के लिए जाने जाते हैं (फोटो सोर्स)

केंद्र सरकार बड़े एक्शन की तैयारी में थी लेकिन..

खबर ये भी है कि, मोदी सरकार कश्मीर में शांति बनाये रखने के लिए किसी बड़े एक्शन की तैयारी में थी लेकिन महबूबा मुफ़्ती सरकार की तरफ से केंद्र को सहयोग नहीं मिल रहा था, जिसके बाद बीजेपी ने पीडीपी से अलग होने का फैसला किया.

आपके लिए एक सवाल:

आपको क्या लगता है पीडीपी से अलग होकर बीजेपी ने सही किया ?