इस बीजेपी नेता का राम मंदिर पर ये बयान बवाल करने के लिए काफी है…

राम हमारी संस्कृति के धोतक है l राम भारत के आदर्श है  और इस बात को सिद्ध करने के पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध हैं। पर्याप्त शोधो से ज्ञात होता है कि भगवान राम का जन्म आज से 7128 वर्ष पूर्व अर्थात 5114 ईस्वी पूर्व को उत्तरप्रदेश के अयोध्या नगर में हुआ था। अयोध्या हिन्दुओं के प्राचीनतम और 7 पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। जब हम रामायण का अध्यन करते है तो पता चलता है कि सरयू नदी के तट पर बसे इस नगर को ‘मनु’ ने बसाया था। यह हिन्दुओं के लिए सबसे पवित्र स्थल है। इतिहास का अध्यन करने पर पता चलता है कि मध्यकाल में राम जन्मभूमि पर बने इस भव्य मंदिर को आक्रांता बाबर ने तोड़कर वहां एक मस्जिद स्थापित कर दी जिस पर अभी भी विवाद जारी है।

अयोध्या विवाद को वर्षों बीत रहे हैं। मसला आज भी जस का तस है। विवाद इस बात पर है कि देश के हिंदूओं की मान्यता के अनुसार अयोध्या की विवादित जमीन भगवान राम की जन्मभूमि है जबकि देश के मुसलमानों की पाक बाबरी मस्जिद भी विवादित स्थल पर स्थित है। राम मंदिर का मुद्दा एक भारतीय के लिए एक ऐसा भावुक मुद्दा है जिसके ऊपर आये दिन बयानबाजी कर के देश के बड़े-छोटे नेता अपनी राजनीति की दाल गलाने की ताक में रहते हैं| ऐसे में बीजेपी विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने राम मंदिर निर्माण को लेकर बहुत बड़ी बात बोल दी है.

मनजिंदर सिंह सिरसा ने राम मंदिर निर्माण को लेकर कहा है कि मंदिर को तोड़कर अगर मस्जिद बनाया जाएगा, तो लोग मस्जिद को तोड़कर मंदिर भी बनाएंगे, और अब यह मसला रुकने का नाम नहीं लेगा।” इसके साथ ही अपनी बात कहते हुए सिरसा ने फेसबुक पर एक वीडियो को शेयर करते हुए लिखा कि मुगल शासकों ने  हमारे मंदिर और गुरुद्वारे तोड़े, शाहजहां ने हमारे सिख लाहौर के सिख मंदिर तोड़े, जहांगीर ने गुरू अर्जुन देवजी को शहीद किया और औरंगजेब ने चार साहिबजादे को शहीद किया। अगर आप मुझसे पूछेंगे कि क्या ये इमारतें(ताजमहल) हमारे कल्चर को दर्शाती हैं मेरा जवाब होगा नहीं।

आपको बता दें कि बीजेपी विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा ताजमहल के ऊपर दिए गए बयान पर अपनी सहमति जताई हैं दरअसल हालही में सीएम योगी आदित्यनाथ ने दरंभंगा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि, देश में आने वाले विदेशी गणमान्य व्यक्ति ताजमहल और अन्य मीनारों की प्रतिकृतियां भेंट करते थे जो भारतीय संस्कृति को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। लेकिन अब यानी मोदी सरकार के सत्ता में आ जानें से विदेशी गणमान्य जब भारत आते हैं तो वो भगवद गीता और रामायण की प्रति भेंट करते हैं।

सीएम योगी यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि आगरा का ताजमहल भले ही पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचता हो और उसे विदेशों में भारत की एक अमिट पहचान के रूप में जाना जाता हो, मगर मेरे लिए ताजमहल एक इमारत के सिवा कुछ नहीं है। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति का हिस्सा मानने से इनकार कर दिया। वहीं देश के कुछ इतिहासकार सीएम योगी के इस बयान की आलोचना कर रहे हैं और अपनी असहमति जता रहे हैं, वहीँ पटना यूनिवर्सिटी की इतिहास की प्रोफेसर डेजी नारायण ने ‘द टेलीग्राफ’ से बातचीत में कहा कि मध्यकालीन और पूर्व आधुनिक काल यानी 1206 से लेकर 1760 तक के कालखंड को कुछ लोग भारतीय इतिहास का इस्लामिक युग मानते हैं और यही वजह है कि एक खास तरह की राजनीतिक सोच रखने वाले लोग इस कालखंड में बने ताजमहल को भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं मानते हैं। प्रोफेसर साहिबा यहीं नहीं रुकी उन्होंने कहा कि सीएम साहब का यह तथ्य बहुत ही चौंकाने वाला है, जबकि पूरी दुनिया में ताजमहल को भारतीय धरोहर के रूप में प्रसिद्दी मिली हुई है। प्रोफेसर साहिबा ने कहा कि कुछ लोग भारतीय इतिहास को पुनर्परिभाषित करना चाहते हैं और तथ्यों के साथ खिलवाड़ करना चाहते हैं।

योगी सरकार ने हाल ही में अपनी सरकार के 100 दिन पूरे किए हैं और पटना यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम के दौरान जहाँ योगी आदित्यनाथ ने खुद ही अपनी सरकार की तारीफ की तो वहीं विपक्ष ने उनकी 100 दिन की सरकार की खूब आलोचना भी की है। लोगों का कहना है कि मोदी सरकार केवल बड़े-बड़े बोल बोलती है बस बाकी उसपर काम कुछ नहीं हुआ होता है क्योंकि उनको तो केवल दूसरों कि गलतियाँ गिनना आता है, अभी तो योगी सरकार को केवल 100 दिन ही हुए हैं, बाकी 5 साल अभी पूरे बाकी हैं यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि कौन कितना काम करता है क्योंकि शुरूआती दिनों में तो हर सरकार खुद को अच्छा साबित करती है. असली पहचान तो कुछ दिनों बाद ही होती है फिर 100 दिन का गुणगान क्यों गाना।

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