क्यों चीन के मुंह से पीएम मोदी के लिए निकले मीठे बोल? अब तक तो भारत को दे रहा था चेतावनी लेकिन अब…

एशिया के दो बड़े मुल्कों भारत और चीन के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है. इसी बीच हमबर्ग में G-20 का समिट शुरू होने जा रहा है. इसमें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पीएम मोदी भी हिस्सा लेंगे और इनके साथ ही विश्व के कई बड़े नेता भी इसमें शिरकत करेंगे. इस समिट में सबकी नजरें भारत और चीन के ऊपर रहेंगी, क्योंकि सीमा विवाद को लेकर दोनों मुल्क आमने सामने हैं. इसी को लेकर चीन के एक अखबार ने एक विश्लेषण छापा है.

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सरकारी अखबार में छपी खबर 

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने एक विश्लेषण में लिखा है कि,  ‘भारत और चीन को एक दूसरे के साथ संबंध बढ़ाने चाहिए.’ अखबार ने आगे लिखा कि, ‘अगर पीएम मोदी एक संवेदनशील नेता हैं तो इतने तनाव के बीच भी जो वर्तमान आर्थिक सहयोग की दिशा है उसे वह नहीं बदलेंगे. वॉशिंगटन में 26 जून को प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच काफी दोस्ताना दिखा. इसी दौरान भारतीय सैनिक सिक्किम के ज़रिए सीमा पार कर चीनी इलाक़े में घुस गए. शायद भारत चाहता है कि वह चीन के मुकाबले अमेरीका के ज़्यादा नजदीक रहे.’ हालांकि ये चीन का नजरिया है हालांकि सच्चाई ये है कि चीन के सैनिकों ने भारतीय सीमा पर अतिक्रमण करने की कोशिश की थी. जिसको भारतीय सैनिकों ने रोका था.

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मोदी को संवेदनशील बताते हुए लिखा 

ग्लोबल टाइम्स में आगे लिखा गया कि, ”लगता नहीं है कि मोदी इस तरह का बचकाना क़दम उठाएंगे. आज़ादी के बाद से भारतीय नेताओं के दिमाग़ में गुटनिरपेक्ष की नीति रही है. इसके साथ ही भारत चीन से आर्थिक संबध ख़त्म करने का जोखिम भी नहीं उठाना चाहेगा.”

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अखबार ने आगे लिखा कि, ‘साफ़ तौर पर उम्मीद जताई जा सकती है कि भारत जी-20 समिट में मुखर दिखेगा. जून में पेरिस जलवायु समझौते से ट्रंप के पीछे हटने के बाद से भारत के पास बड़ा मौक़ा है कि वह कई वार्ताओं की अगुवाई करे. भारत शायद ही इस मौक़े को हाथ से निकलने देगा लेकिन मौक़ों को हासिल करने के लिए उसे चीन के सहयोग की जरुरत होगी इसलिए उसे चीन के साथ मिलकर काम करना चाहिए.’

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G-20 में भारत कर सकता है नेतृत्व

ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, ‘2009 में कोपेनहेगन जलवायु परिवर्तन कॉन्फ्रेंस में उस वक्त के अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कथित रूप से बंद दरवाजे के भीतर भारत और चीन से बात की थी. उन्होंने ऐसा विकासशील देशों के बीच समन्वय के लिए किया था. जबकि अमेरिका के अधिकारियों ने इस तरह की किसी भी मीटिंग से इनकार किया था.’

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अखबार ने ट्रम्प के पेरिस समझौते से पीछे हटने को लेकर लिखा, ‘ट्रंप के पेरिस में जलवायु समझौते से पीछे हटने का अर्थ है कि चीन और भारत को दुनिया के बड़े और तीसरे कार्बन उत्सर्जक के रूप में नेतृत्व का दम दिखाना चाहिए. इसको लेकर अब नई दिल्ली और बीजिंग के बीच सहयोग बढ़ाने की ज़रूरत है. इस संदर्भ में जी-20 भारत और चीन के लिए एक मौक़ा है कि दोनों तनाव को ख़त्म कर द्विपक्षीय संबंधों को आगे की ओर ले जाएं.’

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ग्लोबल टाइम्स ने ज़ोर देकर ये बात कही है कि अमेरिका से ज्यादा चीन भारत के करीब है. अमेरिका मैन्युफैक्चरिंग को अमेरिका ले जाने की कोशिश कर रहे हैं ऐसे में भारत के लिए चीन निवेश के सोर्स के रूप में सबसे अहम् है. चीन के अखबार में छपी ये रिपोर्ट साफ़ दिखाती है कि चीन, भारत से उलझने की कोशिश नहीं करेगा क्योंकि अगर उसने ऐसा किया तो वो इंडिया जैसे एक बड़े बाज़ार को गंवा बैठेगा. हालांकि अख़बार का नजरिया ये है कि भारत के लिए चीन आवश्यक है लेकिन सच्चाई इस के उलट है चीन को भारत की आवश्यकता है क्योंकि भारत से उसके कही हित जुड़े हैं.