रक्षाबंधन पर घर आने का वादा कर के गए थे शहीद तेंजिन, लेकिन उससे पहले ही आ गयी उनकी शहादत की ख़बर जिसे सुनकर उनकी बहन ने बोला कुछ ऐसा कि…

देश में एक तरफ तो रक्षाबंधन का त्यौहार आने वाला है, लेकिन दूसरी तरफ कुछ ऐसे भी परिवार है जो शायद अब इस ख़ुशी के त्यौहार से महरूम रहने वाले हैं. यकीनन इस त्यौहार के लिए आपने भी सभी तैयारी कर ली होगी, लेकिन ज़रा सोचिये उन बहनों के बारे में जिनके भाई इस बार क्या किसी भी रक्षाबंधन पर अब उनके पास नहीं आयेंगे. सोचिये उन भाइयों के बारे में जो अपनी सूनी कलाई पर अपनी लाडली बहन की राखी बंधवाने के ख्वाब के साथ ही इस दुनिया से रुखसत हो चलें हैं. जी हाँ हम बात कर रहे हैं देश के उन वीर सपूतों की जो सिर्फ अपनी बहनों की नहीं बल्कि पूरे देश की रक्षा में 365 दिन सीमाओं पर तैनात रहते हैं और देश की रक्षा की खातिर हंसते-हंसते अपने जान भी दे देते हैं.

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बहनें करती रहीं इंतज़ार लेकिन अब नही आएगा उनका भाई

हाल ही में में लाहौल के करपट गांव के शहीद तेंजिन छुलटिम के पिता किशन चंद ने अपने बेटे की शहादत पर नाम आँखों से कहा कि, “मैंने आज अपना चिराग खो दिया है, लेकिन देश के लिए शहीद होने वाले मैं अपने बेटे की देशभक्ति को सलाम करता हूं. मेरा बेटा जो आज शहीद हो गया है वो बचपन में नकली पिस्तौल से खेलने का शौक रखता था और आज उसने अपना ये शौक भी पूरा कर लिया.

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तो वहीँ अपने बेटे को तिरंगे में लिपटा देख शहीद की मां तेंजिन आंगमो और उनकी दो बहनें अपने लाडले के दूर जाने और अब कभी ना लौट कर आने की ख़बर पर फूट-फूट कर रो रही हैं. शहीद की मां कभी आसमान के तारों में अपने बेटे को ढूंढती हैं तो कभी आंसू भारी आँखों से घर को आने वाले रास्ते पर टकटकी लगाये देखती रहती हैं.

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इस आस में कि शायद उनके बेटे के शहीद हो जाने की ख़बर मात्र एक ग़लतफ़हमी हो और उनका बेटे सही सलामत अपने बैग में अपनी बहनों के लिए तोहफ़े लिए अपनी सूनी कलाई बंधवाने आ ही जाये.  शहीद के परिवार को गांव से जो भी दिलासा देने आ रहा है वो भी परिवार की ऐसी हालत देखकर अपने आंसू नहीं रोक पा रहा है.

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शहीद तेंजिन छुलटिम के चाचा रमेश बताते है कि तेंजिन पिछली बार जून के महीने में घर आये थे. छुट्टी के बाद  21 जून को उन्होंने दोबारा ड्यूटी ज्वाइन की थी. शहीद के चाचा ने बताया कि तेंजिन इस बार सरहद पर जाने से पहले अपने माता-पिता और बहनों से वादा कर के गए थे कि जल्द ही दोबारा छुट्टी लेकर घर आयेंगें. स्थानीय पंचायत प्रधान प्रेमदासी ने शहीद तेंजिन छुलटिम के बारे में बताते हुए कहा कि वो काफी मिलनसार था और उसमें देशभक्ति की भावना बचपन से ही थी.

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हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लाहौल का करपट गांव इन दिनों बाढ़ की वजह से मुसीबत में घिरा हुआ है. करपट नाले में आई बाढ़ से यहां का जनजीवन बुरी तरह से नष्ट हो चुका है. इसी प्राकृतिक आपदा के बीच ग्रामीणों ने अपने गांव के एक वीर सैनिक को खो दिया है. मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार सुबह हेलीकॉप्टर से शहीद की पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव लाया जायेगा. जिसके बाद सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा.

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तेंजिन के पिता किशन चंद का कहना है कि उन्हें अपने बेटे की शहादत पर नाज है. तेंजिन को जानने वाले बताते हैं कि चार साल पहले सेना में भर्ती होने पर तेंजिन ने अपनी बहनों से कहा था कि अब मेरा जीवन देश के लिए ही है. मुझे देश के लिए कुछ कर दिखाना है. 21 जून को छुट्टी काटकर जाते हुए तेंजिन ने अपनी बहनों से राखी पर घर आने का वायदा किया था.