भारतीय मुद्रा का कौड़ी से लेकर रूपये तक के सफ़र की ऐसी रोचक जानकारी जिसे आपको जरूर जाननी चाहिए

आज के वक्त में हर कोई रुपये का इस्तेमाल करता है लेकिन बहुत कम लोग जानते है की इसकी शुरुआत कैसे और किसने की थी. इस बात की जानकारी आज हम आपको देते है. कैसे फूटी कौड़ी से कौड़ी बन गया. कौड़ी से दमड़ी, दमड़ी से धेला, और धेला से पाई, पाई से पैसा, पैसा से आना, आना से रुपया बना. इस तरह धीरे धीरे फूटी कौड़ी का सफ़र रुपये तक आया. और इसी रूपये का चलन आज भी हमारे बीच जारी है.  मुद्रा के तौर पर आज हम जिस रूपये का प्रयोग करते है उसका चलन भारत में सदियों से चलता आ रहा है. फर्क बस इतना है कि पहले मुद्रा के नाम पर चांदी और सोने के सिक्के चलते थे.

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ये सोने और चांदी के भारत में 18वीं सदी के शुरूआती दौर तक चले थे उसके बाद जब यूराेपीय कंपनियां भारत में व्यापार करने के लिए आई तो उन्होंने अपनी चीजों को आसान करने के लिए भारत में निजी बैंक की स्थापना की. जिसके बाद उन्होंने भारत में सोने और चांदी के सिक्कों की जगह नोटों का चलन शुरु कर दिया.

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भारत में सबसे पहले नोटों की मुद्रा कलकत्ता के बैंक ऑफ हिंदुस्तान ने 1770 में जारी की थी. उसके बाद जैसे-जैसे इन ब्रिटिश कंपनियों का व्यापार बढ़ता गया वैसे ही भारत में अलग-अलग बैंकों की स्थापना शुरू होती गई.

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भारत में रुपये का इतिहास 1947 में आजादी के बाद शुरु हुआ था. आजाद भारत का पहला नोट एक रूपये था जिसको 1949 में जारी किया गया था. इस नोट पर सारनाथ का अशोक स्तंभ बना था. इसके बाद नोट में कई बदलाव किये गए. 1953 में भारत सरकार के द्वारा जो नोट छापा गया था उसे हिंदी भाषा में छापा जाने लगा था.

इन नोटों के कितने ही टाइम बाद 1966 और 2005 में  महात्मा गांधी की फोटो छपनी शुरु हुई. आज  5, 10, 20, 50, 100, 500 और 2000 के कागजी नोट भारत में काफी चलन में है.

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