जब पत्थरबाजों के झुण्ड में खुद पत्थरबाज बनकर घुस गये ‘पुलिस के जवान’ तो उसके बाद किया ऐसा कारनामा कि हर कोई दंग रह गया !

कश्मीर में कट्टरपंथी आतंकवादियों को बचाने के लिए सेना और सुरक्षाकर्मियों के सामने भीड़ की शक्ल में आ जाते हैं. इस कायराना हरकत से सेना को आतंकवादियों से लड़ने में और उन्हें मार गिराने में थोड़ी कठिनाई होती है. वैसे वहां अब ये आम बात हो चुकी है. सेना इससे निपटने के लिए कई कड़े कदम उठाती रहती है. आर्मी चीफ बिपिन रावत पहले भी चेतावनी दे चुके हैं कि आतंकवादियों का साथ देने वाले लोगों को भी उसी श्रेणी में गिना जायेगा और उन्हें भी सजा मिलेगी.

आर्मी चीफ बिपिन रावत (फोटो सोर्स: टोटल टीवी)

पुलिस ने पत्थरबाजों के झुण्ड में अपने पुलिसकर्मी भेज दिए

हालाँकि मोदी सरकार में पत्थरबाजों पर अच्छी खासी लगाम लग चुकी है लेकिन अब भी कुछ कट्टरपंथी हैं जो सेना के काम में बाधा पहुंचाते हैं. इन सभी को सबक सिखाने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस की तरफ से एक बेजोड़ तरीका निकाला गया. दरअसल जम्मू-कश्मीर की पुलिस ने पथराव के पीछे मुख्य आरोपियों को पकड़ने के लिए पत्थरबाजों के झुण्ड में अपने पुलिसकर्मी भेज दिए.

ऐतिहासिक जामा मस्जिद क्षेत्र में पत्थरबाज अक्सर कट्टरपंथी पत्थरबाजी करते हैं (फोटो सोर्स: न्यूज़ डॉग)

दरअसल ऐसा अमूमन होता है कि कश्मीर में जुमे की नमाज के बाद सेना पर पथराव की ख़बरें आती हैं. इस जुमे भी ऐसा ही प्लान था. इससे निपटने और सही गुनाहगारों को पकड़ने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पत्थरबाजों के बीच अपने सुरक्षाकर्मी भेज दिए. इस बात की भनक पत्थरबाजों को जरा सी भी नहीं हुई कि उनके बीच पुलिसकर्मी हैं.

जब पत्थरबाजों की संख्या बढ़ने लगी तो..

जुमे की नमाज खत्म हुई तो पत्थरबाजों ने पुलिस कर्मियों और CRPF जवानों पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए. जब पत्थरबाजों की संख्या बढ़ने लगी तो जो पुराने पत्थरबाज थे वो आगे आकर भीड़ की अगुवाई करने लगे. बस फिर क्या था सुरक्षाबलों को साफ़-साफ़ नजर आने लगा कि आखिर असल में गुनाहगार कौन है. जब उनकी पहचान हो गयी तो भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने आंसू गैस के छोड़ दिए.

पत्थरबाजों को पकड़ने के लिए पुलिस खुद बन गयी पत्थरबाज (फोटो सोर्स: द क्विंट)

पुलिसकर्मियों ने डराने के मकसद से अपने हाथों में खिलौने की बंदूके..

इसके बाद जब भीड़ तितर-बितर हो गयी तो भीड़ का हिस्सा बने पुलिसकर्मियों ने दो गुनाहगारों को पकड़ लिया. पकड़ने के बाद उन्हें अपने वाहनों से थाने ले गये. दिलचस्प तो ये है कि इन पुलिसकर्मियों ने डराने के मकसद से अपने हाथों में खिलौने की बंदूके भी ले रखी थी. पुलिस की इस रणनीति का पत्थरबाजों को जरा सा भी अंदाजा नही हुआ लेकिन जब पुलिसकर्मी अपने असली रूप में आये तो भीड़ भौचक्की रह गयी और अपना प्रदर्शन ख़त्म करके वहां से भाग खड़ी हुई.

पुलिस की इस खास रणनीति का अदांजा भी नहीं हुआ पत्थरबाजों को (फोटो सोर्स: जनसत्ता)

2010 में भी यही रणनीति अपनाई गयी थी

ऐसा नहीं है कि सुरक्षा बलों की तरफ से ये रणनीति पहली बार अपनाई गयी हो, इससे पहले 2010 में भी यही रणनीति अपनाई गयी थी. इस बार की रणनीति में ख़ास बात ये भी देखी गयी कि पत्थरबाजों में शामिल पुलिसकर्मी जबतक गुनाहगारों को अपने गिरफ्त में नहीं ले पाए तब तक सुरक्षाबलों की तरफ से ना तो लाठीचार्ज की गयी और ना ही आंसू गैस के गोले छोड़े गये.

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