‘आप’ से बाहर होते ही आशुतोष ने अपनी जाति को लेकर कहा कुछ ऐसा कि केजरीवाल की पोल-पट्टी खुल जाएगी !

साफ-सुथरी राजनीति का वादा करके अन्ना हजारे के कांधे पर चढ़कर अपनी खुद की पार्टी बनाने वाले अरविन्द केजरीवाल की पोल अब उन्ही के साथी खोलने लगे हैं. लोकपाल की मांग को लेकर हुए एक आन्दोलन से निकलकर अरविन्द केजरीवाल अपने साथियों के साथ खुद की नई पार्टी तो बना लेते हैं लेकिन जिस गन्दी राजनीति को साफ करने की बात कर रहे थे, वो उसी गन्दी राजनीति को बढ़ावा देने लगे हैं. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि उन्हीं के राजनीतिक साथी कह रहे हैं. जो कभी उनकी ही टीम का हिस्सा हुआ करते थे. हम बात आशुतोष की बात कर रहे हैं.

राजनीति साफ करने चले थे, खुद मैले हो गये (फोटो सोर्स: इंडिया टीवी)

पार्टी छोड़ने के बाद आशुतोष ने किया ऐसा ट्वीट कि..

दरअसल 15 अगस्त को आम आदमी पार्टी छोड़ने वाले ‘पत्रकार से राजनेता’ बने आशुतोष पहले तो पार्टी छोड़ने का कारण निजी बता रहे थे लेकिन अब धीरे-धीरे उनके मन की टीस बाहर निकल रही है. गौर किया जाए तो वो अपनी टीस के सहारे केजरीवाल पर ‘जातिगत राजनीति’ का आरोप भी लगा रहे हैं.

क्या कहा आशुतोष ने…

“मेरे 23 साल के पत्रकारिता जीवन में ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसी ने मुझसे मेरी जाति पूछी हो या फिर सरनेम, लेकिन राजनीति में जाने के बाद जब 2014 में लोकसभा चुनाव लड़ रहा था तो मुझे मेरी जाति के साथ लोगों से परिचय करवाया गया. जब मैंने इस चीज का विरोध किया तो मुझसे कहा गया कि, ‘सर अगर आप जाति नहीं बतायेंगे तो आप जीतेंगे कैसे, आपकी जाति से यहाँ बहुत वोटर हैं.’ “

आशुतोष के ट्विटर अकाउंट से लिया गया ट्वीट

बता दें कि आशुतोष ने यह बात 29 अगस्त, बुधवार को एक ट्वीट के जरिये कही. जब इस मामले ने तूल पकड़ना शुरू किया तो बाद में आशुतोष ने सफाई देने वाला ट्वीट भी पेश कर दिया. सफाई वाले ट्वीट में उन्होंने बताने की कोशिश की कि उनका निशाना केजरीवाल पर नहीं था. हालाँकि आशुतोष की ये सफाई बेकार ही साबित हो रही है क्योंकि तीर एक बार जब कमान से निकल जाता है तो उसे वापस लाना असंभव हो जाता है.

केजरीवाल और आशुतोष के ट्वीट का कनेक्शन !

दरअसल केजरीवाल जब राजनीति में आये थे तब खुद को पाक साफ़ बताने की कोशिश में लगे रहते थे. कहते फिरते थे कि वो धर्म और जाति की राजनीति नहीं करेंगे, सबको साथ लेकर चलेंगे, सबके हित की बात करेंगे. समय के साथ केजरीवाल की ये बातें भी इतिहास हो गईं. अब केजरीवाल एक खास धर्म से ताल्लुक रखने वाले विधायक की हाँ में हाँ मिलाते नजर आते हैं. उनकी बात को कभी काटने का साहस नही कर पाते. उसी का नतीजा है कि आज कवि कुमार विश्वास पार्टी में बेरुखी के आलम पर हैं.

पार्टी छोड़ने वालों की लाइन लग गयी है

कुमार विश्वास ही नहीं पार्टी छोड़ने वालों में अब पार्टी के बड़े नेता आशीष खेतान का भी नाम शामिल हो चुका है. 15 अगस्त को आशुतोष ने पार्टी छोड़ी और फिर 26 अगस्त(रक्षाबंधन) को आशीष खेतान ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया. अब देखना ये है कि केजरीवाल अपनी जिद और गन्दी राजनीति के सहारे पार्टी को कहां ले जाते हैं.

आपके लिए एक सवाल:

आपको लगता है कि केजरीवाल साफ-सुथरी राजनीति करते हैं ?