आतंकियों ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि डोभाल उनके खात्मे के लिए ऐसे घातक प्लान तैयार करेंगे कि जिससे…

कश्मीर मुद्दा आज के समय में एक ऐसा मुद्दा बन चुका हैं जिसके चलते आये दिन कोई-ना-कोई नई कहानी देखने-सुनने को मिल ही जाती है. कश्मीर भारत का हिस्सा है और हमेशा ही रहेगा. हालाँकि इस देश में अभी भी कुछ ऐसे अलगाववादी नेता हैं जिनका बस चले तो आज ही वो कश्मीर के हिस्से कर दें. उनका मानना है कि कश्मीर पाकिस्तान के हिस्से में जाना चाहिए. खैर सच तो यही है कि कश्मीर हमारा था, हमारा है, और हमारा ही रहेगा. India

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कश्मीर में हाल ही में पत्थरबाजी की घटनाएं तेज़ हुई हैं लेकिन भारत सरकार ने इसका हल ढूँढना शुरू भी कर दिया है. भारत सरकार द्वारा जो कदम उठाए जा रहे हैं उन्हें देखकर लग रहा है कि ये आने वाले वक्त में कश्मीर के भविष्य को निर्धारित करेंगे और कश्मीर एक बार फिर खुशहाल राज्य के रूप में जाना जाएगा. कश्मीर में इस वक्त केन्द्रीय एजेंसियां जिस तरह से काम कर रही हैं वो सिर्फ रूटीन कारवाई नहीं है बल्कि भारत के प्रधानमंत्री और अजीत डोभाल की  संयुक्त प्लानिंग का हिस्सा हैं.

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आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी और अजीत डोभाल ने ये प्लानिंग आज नहीं बनाई है बल्कि ये प्लानिंग तो पिछले साल ही बन चुकी थी जब हिजबुल कमांडर बुरहान वानी मारा गया था और कश्मीर में हिंसा का माहौल छाया हुआ था. इस माहौल को देखते हुए केंद्र सरकार ने तमाम सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर कश्मीर में हो रही हिंसा को ख़त्म करने की प्लानिंग बनाई थी. 

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इस प्लानिंग में सिर्फ कश्मीर में फ़ैल रहे आतंक का खात्मा ही शामिल नहीं है बल्कि उन पत्थरबाज़ों और अलगाववादियों को भी सबक सिखाने की तरकीब निकाली गई है ताकि यह लोग जिस तरह से घाटी में बैठकर और दूसरों को भड़काकर हिंसा फैलाते है और इसे ही अपना व्यवसाय बनाकर बैठे हैं, तो अब देखते हैं कैसे करेंगे ये लोग अपनी मनमानी.

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प्रधानमंत्री मोदी और अजीत डोभाल की इस प्लानिंग का मुख्य उद्देश्य ही यही है कि कश्मीर में फैले ऐसे हालातों को ही सबसे पहले बदला जाए. इस प्लानिंग में चाणक्य के तौर पर काम कर रहे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल वो शख्स हैं जिन्होंने आतंक और अलगाववाद को एक साथ ख़त्म करने की ठानी हुई है.

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सूत्रों की मानें तो कश्मीर में केंद्र सरकार, वहां की सेना और साथ ही केंद्रीय एजेंसियां एक साथ मिलकर एक संयुक्त रणनीति पर काम कर रही हैं.  जिसके अंतर्गत एक तरफ कश्मीर में फैले आतंकियों द्वारा की जा रही सभी गतिविधियों  को ध्यान में रखने के लिए खुफिया एजेंसियों को सक्रिय कर दिया गया है और इसके साथ ही काउंटर ऑपरेशन के आतंक का अंत करने के लिए ताबड़तोड़ तैयारियां शुरू कर दी गई हैं.

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वहीँ कश्मीर में सरकार बदलने के साथ ही कुछ नयी  रणनीतियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है. कश्मीर में केंद्र सरकार ने अपनी सेना और एसओजी के कमांडोस को पूरी छूट दे रखी है कि वे लोग कोई भी कार्रवाई कर सकते हैं. और इसके साथ ही हमारे सुरक्षाबलों को कोई भी नुकसान ना हो तो इसके लिए राष्ट्रीय राइफल्स रेजीमेंट ऑपरेशन को लम्बे समय तक चलाने के निर्देश दिए हैं लेकिन उसका रिजल्ट प्रभावी होना चाहिए. जिसके लिए आतंकवादियों के ठिकानों को भी रॉकेट लांचर की मदद से नष्ट करने की खुली छूट दे दी गई है.

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आपको बता दें कि इस बार प्रधानमंत्री मोदी और अजीत डोभाल  ने इतनी कड़ी प्लानिंग बनाई है जिससे आतंकवाद ख़त्म होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा और हर आतंकवादी हम पर हमला करने से पहले 10 बार सोचेगे  कि हम किससे  भिड़ने जा रहे हैं. जी हाँ इस बार तो केंद्र सरकार और सेना ने कई हैकर्स और साइबर एक्सपर्ट्स को भी अपनी टीम का हिस्सा बनाया है ताकि हाइटेक स्मार्ट फोन्स के जरिए और सर्विलांस कि मदद से आतंकियों  के ठेकेदारों की लोकेशन को ट्रेस कर सकें.

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आतंकवादियों के मंसूबों को तोड़ने के लिए सेना ने बकायदा एक लिस्ट तैयार की है, जिस पर काम भी किया गया है और उसके परिणाम भी अच्छे दिखाई दिए हैं. जिसका उदाहरण आप इसी से ले सकते हैं कि अनंतनाग में हुए हमले से लेकर कश्मीर में सुरक्षाबलों के काफिले को अपना निशाना बनाने वाले तमाम आतंकियों को कुछ ही दिनों के भीतर उन्हें ढूँढकर मार गिराया गया।