जब गुस्से में तमतमाई इंदिरा ने फोन कर मुख़र्जी को सुनाई खरी-खोटी लेकिन इससे पहले कि प्रणब मुख़र्जी कुछ कह पाते उन्होंने…”

प्रणब मुखर्जी 25 जुलाई को राष्ट्रपति पद से सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं. उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान भारत में कई परिवर्तन आए हैं. आपको बता दें कि रविवार को संसद भवन के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का विदाई समारोह आयोजित किया गया था. इस समारोह में मोदी सरकार के साथ-साथ विपक्ष के भी कई नेता मौजूद थे. अपने विदाई समारोह में प्रणव मुखर्जी ने कहा कि ‘इस शानदार समारोह के लिए पार्लियामेंट का शुक्रिया.’ इसी के साथ प्रणब मुखर्जी ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ़ करते हुए कहा कि ‘मैं नरेन्द्र मोदी की एनर्जी का मुरीद हूँ और उनके साथ जुड़ी अच्छी यादें लेकर जा रहा हूँ.”

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अपने इसी विदाई समारोह में इंदिरा गाँधी को भी याद करते हुए प्रणब मुख़र्जी थोडा भावुक हुए थे. प्रणब मुख़र्जी ने इस ऐतिहासिक क्षण में इंदिरा गाँधी को याद और उन्हें सम्मान देते हुए कहा कि, “इंदिरा गाँधी मेरी मेंटर (गुरु) थीं. मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है.”

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प्रणब मुखर्जी के विदाई समारोह में लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने सम्मान पत्र पढ़ते हुए कहा कि, ‘प्रणब मुखर्जी ने आदर्शों की मिसाल पेश की है.’ इसके बाद उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा कि, हम प्रणब मुखर्जी को प्रणव दा के रूप में ज्यादा जानते हैं. इस समारोह में केंद्र सरकार के अधिकतर सभी मंत्रियों के साथ विपक्ष के बड़े नेता भी सेंट्रल हॉल में मौजूद थे. प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 25 जुलाई को समाप्त हो रहा है. वे देश के 13वें राष्ट्रपति हैं. उनके बाद अब 25 जुलाई को NDA के रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति पद ग्रहण करेंगे.

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अब जब राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी का भारत के राष्ट्रपति पद से कार्यकाल ख़त्म हो चला है तो ऐसे में आइये उनकी ज़िन्दगी से जुड़े कुछ ऐसे किस्सों पर गौर किया जाये जिससे आपको भी यकीन हो जायेगा कि हमेशा गंभीर दिखने वाले प्रणब दा भी कितने जिंदादिल और हाज़िर-ज़वाब हैं.

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प्रणब मुख़र्जी को पाइप पीना का बेइंतेहा शौक है

जयंत घोषाल जो कि प्रणब मुखर्जी के अच्छे मित्र और वरिष्ठ पत्रकार रह चुके हैं उन्होंने बताया कि असम के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता देबकांत बरुआ ने पहली बार प्रणब दा को पाइप पीने को दिया था.  बस फिर क्या था, ये एक आगाज़ था जिसके बाद कब प्रणब मुख़र्जी को पाइप पीने की लत लग गई ये खुद उन्हें भी पता नहीं चला.

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हालाँकि, प्रणब मुखर्जी के पाइप पीने के शौक को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी बिलकुल भी पसंद नहीं करती थीं. कहते हैं कि श्रीमती गांधी को पाइप से कोई नाराजगी नहीं होती थी दरअसल उनके गुस्से की असली वजह पाइप से निकलता धुआं हुआ करता था.

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प्रणब दा के पाइप के शौक पर फब्ती कसते हुए इंदिरा गाँधी ने एक बार कहा था कि, “प्रणब मुखर्जी से कोई चाहे जो कहे, लेकिन उसके मुंह से धुआं के अलावा कुछ नहीं निकलेगा.”  इंदिरा गांधी के इस बयान का मतलब ये था कि कि प्रणब मुखर्जी अपने पाइप के शौक के चलते कभी भी कोई बात लीक नहीं कर सकते हैं. वो छुपाने वाली बात को अपने मन में ही छुपाकर रखते हैं.

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बताया जाता है नियमित पाइप के सेवन से प्रणब दा की सेहत पर इसका असर भी पड़ गया था. जयंत घोषाल बताते हैं कि बीमारी के चलते डॉक्टरों ने प्रणब मुख़र्जी को पाइप पीने की आदत छोड़ने की सलाह दी, जिसके बाद उन्होंने कुछ समय पाइप नहीं पिया. लेकिन कुछ दिनों बाद फिर से ही प्रणब मुख़र्जी को पाइप पीने की तलब उठी. पुरानी आदत थी और छोड़े भी नहीं छूट रही तो अब प्रणब दा ने काफी समय तक निकोटिन रहित स्मोकिंग पाइप का सेवन किया.

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एक वाक्या प्रणब मुख़र्जी और उनकी पाइप की लत का कुछ इस तरह भी है कि जब बांग्लादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हमीद भारत दौरे पर थे तो वो राष्ट्रपति भवन प्रणब मुख़र्जी से मिलने पहुंचे थे. इसी मुलाकात के दौरान उन्हें भी स्मोकिंग की तलब उठी तो उन्होंने राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी से इसकी इज़ाज़त मांगी. यूँ तो राष्ट्रपति भवन “नो स्मोकिंग” ज़ोन होता है लेकिन प्रणब दा ने उन्हें इसकी अनुमति दे दी कि वो वहां स्मोकिंग कर लें.  बताया जाता है कि इस घटना के बाद अब्दुल हमीद ने भी स्मोकिंग छोड़ दी थी.

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पाइप का शौक राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी को इस कदर था कि बतौर राष्ट्रपति रहते उन्हें 500 पाइप उपहार के रूप में मिल चुके हैं. बताया जा रहा है कि अब इन 500 पाइप्स को वो राष्ट्रपति भवन के म्यूजियम को दान कर देंगें l

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कुछ ऐसा था इंदिरा गाँधी और प्रणब मुख़र्जी का रिश्ता

इंदिरा गाँधी और प्रणब मुख़र्जी का एक किस्सा ये भी है कि जब 1980 में लोकसभा चुनाव हुए थे तो उसका परिणाम जानते ही इंदिरा ने झल्लाते हुए प्रणब मुख़र्जी को फोन घुमाया और चिल्लाते हुए वो उनसे बोलीं, “जब सबको उम्मीद थी कि आप जीत नहीं सकते तो आप चुनाव लड़े ही क्यों?” दरअसल हुआ कुछ यूँ था कि जैसे ही चुनाव के नतीजे घोषित हुए तो नतीजा ये सामने आया कि उस चुनाव में कांग्रेस तो जीत गयी थी, लेकिन प्रणब दाहार चुके थे. यूँ तो कांग्रेस जीती थी…

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लेकिन इंदिरा गाँधी को प्रणब मुख़र्जी की हार बर्दाश्त नहीं हो पा रही थी. खुद को काफी देर रोकने के बाद भी जब उनसे नहीं रहा गया तो उन्होंने प्रणब मुख़र्जी को फोन घुमाया और कहा, “आपको ये क्यों लगा था कि आप चुनाव जीत सकते हैं? जबकि पूरे देश, यहाँ तक कि आपकी खुद की पत्नी तक को आपकी हार इस चुनाव में नज़र आ रही थी?” इंदिरा को इस हार का इतना गुस्सा था कि उन्होंने इतना कह कर ही फ़ोन पटक दिया.

दो दिन बाद फिर गाँधी आवास से इंदिरा गाँधी के लिए फोन आया लेकिन इस बार..

बताया जाता है इस वाकये को गुज़रे दो दिन बीत चुके थे जब एक बार फिर प्रणब मुख़र्जी को गाँधी आवास से फोन आता है. फोन तो आया लेकिन इस बार फोन पर इंदिरा गाँधी नहीं बल्कि उनके बेटे संजय गाँधी थे. संजय गाँधी ने बड़े ही सरल लहजे में बात करते हुए प्रणब मुख़र्जी से कहा, “मम्मी आपसे ज़रूर नाराज़ हैं लेकिन कहीं ना कहीं वो भी ये बात अच्छी तरह से जानती और मानती हैं कि आपके बिना कोई मंत्रिमंडल बन ही नहीं सकता.”
(बिजनेस स्टैंडर्ड में लिखे गये लेख के अनुसार)