नवनिर्वाचित राष्ट्रपति के घरेलु नौकर के साथ घटी चोरी की घटना के बारे में जब दरोगा को रिपोर्ट लिखने को कहा गया तो उसने…

देश में कई दिनों से चली उठा-पटक के बीच अंततः गुरुवार 20 जुलाई को भारी मतों से जीता कर रामनाथ कोविंद को देश का अगला राष्ट्रपति चुना जा चुका है. हालाँकि एनडीए ने जिस वक़्त से राष्ट्रपति पद के लिए रामनाथ कोविंद का नाम सुझाया था वो तभी से सुर्ख़ियों में आ गए थे. जीत के बाद अब भारत के लिए 14 वें राष्ट्रपति के रूप में रामनाथ कोविंद 25 जुलाई को संसद के सेंट्रल हॉल में शपथ लेंगे. मौजूदा राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को ख़त्म हो रहा है. जीत की घोषणा होने के बाद उन्होंने कहा ‘अपने समाज व देश का अथक सेवाभाव मुझे यहाँ तक ले आया है’. इसी के साथ कोविंद ने कहा कि इस पद पर रहते हुए संविधान की रक्षा करना तथा उसकी मान मर्यादाओं को बनाये रखना मेरा कर्तव्य रहेगा. ramnath

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ऐसे में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से जुड़ी एक खबर ये आ रही है कि हाल ही में उनके घरेलु नौकर की साइकिल चोरी हो गयी. नवनिर्वाचित राष्ट्रपति के नौकर की साइकिल चोरी होने की खबर सामने आई तो मानो हडकंप सा मच गया, लेकिन ये क्या जब उस साइकिल चोरी की रिपोर्ट लिखाने की बात आई तो..

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रिपोर्ट लिखने के बजाय थानेदार बोले..

बताया जा रहा है जैसे ही इस चोरी की खबर लोगों को लगी तो वो झट थाने पहुँच गए इसकी शिकायत दर्ज कराने. मामले की भनक लगते ही खुद थानाध्यक्ष राष्ट्रपति कोविंद के नौकर के घर आये और उनसे बोले, “हमे पता चला है कि आपकी साइकिल चोरी हो गयी है. आप कृपया करके हमसे एक नयी साइकिल ले लीजिये बस इस चोरी की रिपोर्ट मत दर्ज कराइए.”

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दरअसल किरकिरी से डर रहे हैं पुलिसवाले

वैसे तो ये कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा कि यूपी में इस तरह के चोरी के मामले काफी आम हैं. हाँ योगी सरकार आने के बाद इस तरह की घटनाओं पर लगाम ज़रूर लगी है लेकिन ये पूरी तरह ख़त्म हो गयी है ये कहना गलत होगा. मामला चोरी का था और वो भी नवनिर्वाचित राष्ट्रपति के नौकर के घर चोरी का शायद इसी वजह से इस मामले ने तूल पकड़ लिया.

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अब पुलिसवालों को इस बात का डर सताए जा रहा था कि अगर इस चोरी का मामला सामने आ गया तो उनकी काफी किरकिरी हो सकती है. यही नहीं अगर यह मामला उछला तो ऐसा भी हो सकता है कि बेईज्ज़ती के साथ ही साथ उन्हें ट्रांसफर भी झेलना पड़ जाये. शायद इसी डर से वो खुद ही नौकर के घर पहुंचकर उन्हें ‘सहुलियत’ देने का जुगाड़ करते नज़र आये.

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एक नज़र राष्ट्रपति कोविंद के वकालत से लेकर राष्ट्रपति बनने तक के सफ़र पर 

वकालत की उपाधि लेने के बाद उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायलय में वकालत की शुरुआत की. कोविंद 1977-1979 तक केंद्र सरकार के वकील रहे.जिसके बाद वह राज्यसभा के सदस्य रहे तथा 8 अगस्त 2014  को बिहार के राज्यपाल के पद पर नियुक्ति हुई. कोविंद ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा भी तीसरी बार में ही निकाल ली थी. कोविंद सन 1991 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे.सन 1994 में कोविंद उत्तरप्रदेश राज्य से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए. इसी के साथ वर्ष 2000 में पुनः राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए.

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देखिये वीडियो: 

इसी प्रकार कोविंद लगातार 12 वर्ष तक राज्यसभा के सदस्य रहे. आपको बता दें कि रामनाथ कोविंद भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रिय प्रवक्ता भी रहे हैं.भाजपा के राष्ट्रिय अध्यक्ष अमित शाह ने सर्व सहमति से एनडीए की तरफ से राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार घोषित किया था. जिसके बाद रामनाथ कोविंद ने विपक्ष यूपीए की प्रत्याशी मीरा कुमार को लगभग 3 लाख 34 हजार वोटों के अंतर से हराया है!