कोर्ट ने कहा कि, ‘सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश होगा’, लेकिन पुजारी ने कहा कि..

केरल के सबरीमाला मंदिर का महत्व भारत में बहुत खास माना जाता है. इस मंदिर में आशीर्वाद लेने के लिए पूरी दुनिया से लाखों श्रद्धालू आते हैं. लाखों की संख्या में श्रद्धालू भले ही आते हों लेकिन इस मंदिर में पीरियड्स जैसी वजहों के चलते 10 से 50 साल की महिलाओं का प्रवेश अभी तक वर्जित था. इसको लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में भी था और इसपर अब देश की सबसे बड़ी अदालत ने अपना फैसला भी सुना दिया है. फैसला कुछ ऐसा है कि मंदिर के पुजारी नाराज हैं. हालाँकि उन्होंने कोर्ट का सम्मान करते हुए कहा है कि वो महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने देंगे.

सबरीमाला मंदिर का एक दृश्य (फोटो सोर्स: सबरीमाला केरला की सरकारी वेबसाइट से ली गई है)

बता दें कि महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ फैसला सुना दिया है कि, ‘अब 10 से 50 साल की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश वर्जित नहीं होगा और उन्हें प्रवेश मिल सकेगा.’

इस मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक इसलिए भी थी क्योंकि कहा जाता है कि, सबरीमाला मंदिर अयप्पा भगवान का है और वो अविवाहित थे इसलिए महिलाओं को मंदिर के अंदर नहीं जाने दिया जाता.

हालाँकि इस मुद्दे पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि, “मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक संविधान की धारा-14 का उल्लंघन होगा. हर किसी को पूजा-पाठ करने के लिए बिना भेदभाव समान अधिकार मिलने चाहिए.”

फोटो सोर्स: स्क्रॉल

मंदिर यात्रा की खासियत:

आपको बता दें कि इस मंदिर की खासियत ये भी है कि इसमें 18 पवित्र सीढ़ियाँ हैं और इन सीढ़ियों पर चढ़ने के लिए 41 दिनों का व्रत भी करना होता है. लोगों को काले और नीले रंग के कपड़े पहनने होते हैं और शेविंग तबतक नहीं करनी होती जबतक यह यात्रा पूरी ना हो जाए. पूरी यात्रा के दौरान माथे पर चंदन का लेप लगाना होता है.

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